Sarvan Kumar 26/02/2018

असली असहिष्णुता की  घट्ना 1: एक किलो चावल चुराने के लिए आदिवासी युवक को पीट-पीट कर मार दिया गया

असली असहिष्णुता की  घट्नायें और मीडिया बुद्धिजीवियों का शर्मनाक रवैया.  केरल के पलक्कड़ जिले  और मीडिया से मानवता को झकझोरने वाला एक मामला सामने आया है. मधु कडुकुमन्ना नाम के एक आदिवासी युवक को महज एक किलो चावल चोरी करने के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. केवल इतना ही नहीं युवक को पीटने वाली भीड़ में से कुछ लोगो ने उसके साथ सेल्फी भी लेते रहे. कुछ लोग ऐसे थे जो यह सब देख कर मौन रहे और उस युवक को बचाने की बजाय इस घटना का वीडियो बनाते रहे, ताकि इसे सोशल मीडिया पर डाल कर लाइक्स और FOLLOWERS बढ़ाया जा सके

जानकरी के मुताबिक आदिवासी युवक मधु कडुकुमन्ना 27 साल का था. मधु को भीड़ ने एक किलो चावल चुराने के आरोप में पहले तो रस्सियों से बांधा और फिर उसे लात-घूंसे और डंडों से पीटा गया. इस दौरान कुछ लोग उसके साथ सेल्फी भी लेते रहे. सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी शेयर की गई हैं, जिसमें भीड़ में मौजूद लोग पीड़ित के साथ सेल्फी लेते दिखाई दे रहे हैं.

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद पीड़ित को फौरन हॉस्पिटल ले जाया गया।. सरकारी ट्राइबल स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल जाते वक्त रास्ते में ही युवक की मौत हो गई.

क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने ट्विटर पर लिखा, ‘मधु ने सिर्फ एक किलो चावल चुराया था. इसपर उबेद, हुसैन और अब्दुल की भीड़ ने उस गरीब आदिवासी को मार डाला. यह एक सभ्य समाज के लिए कलंक की तरह है. मुझे इस बात पर शर्म आती है कि ऐसा होने पर भी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा.’

असली असहिष्णुता की  घट्ना 2 : चर्च का फरमान “बीजेपी को वोट न दें ईसाई”

नगालैंड देश का ऐसा राज्य है जिसकी 90 फीसदी से ज़्यादा आबादी ईसाई है.
नगालैंड की 1500 से ज़्यादा चर्चों की मुख्य संस्था कही जाने वाली ‘नगालैंड बाप्टिस्ट चर्च काउन्सिल’ के जनरल सेक्रेटरी रेव्हरंड डॉ झेल्हू किहो ने 1 फ़रवरी को एक खुला खत लिखकर बीजेपी, आरएसएस और हिंदुत्व की विचारधारा पर हमला कर दिया.

कथित तौर पर उनके खत में लिखा है, “आरएसएस का राजनीतिक संगठन भाजपा जब से देश में सत्ता में आया है तब से हिंदुत्व की ताकत बढ़ी है और उसका रूप आक्रामक हो गया है. आप आम आदमी को कितना भी समझाने की कोशिश करो इसे नकारा नहीं जा सकता. आप इससे भी इनकार नहीं कर सकते कि केंद्र में सत्तासीन ये पार्टी पूरी ताकत से ईसाई बहुल नगालैंड में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही है. क्या आपने यह सोचा है कि इसके पीछे उनका उद्देश्य क्या है? अगर नहीं सोचा है, तो बेवकूफ़ ना बनें.’

इस खुले खत में लिखा गया है कि भाजपा सरकार के आने के बाद ईसाई, मिशनरी, फ़ादरों पर हमले बढ़े हैं. खत के आख़िरी हिस्से में रेव्हरंड किहो अपील करते हैं, “जो ईसा को ज़ख़्मी करना चाहते हैं उनके हाथों, पैसों और विकास के नाम पर अपने धर्म के सिद्धांतों से समझौता ना करें.”

असली असहिष्णुता की  घट्ना 3 : त्रिपुरा में चुनाव में महिला ने BJP को दिया वोट, ससुराल वालों ने पीट-पीटकर मार डाला

चुनाव में एक पुरुष या महिला किस पार्टी को वोट करते हैं यह एक व्यक्तिगत चयन का निजी मामला है. लेकिन त्रिपुरा में जब 32 साल की एक आदिवासी महिला ने अपनी इच्छा के उम्मीदवार को वोट दिया तो उसके ससुराल वाले वहशीपन पर उतर आए. परिवार की बात में ना आकर वोट करने की कीमत इस महिला को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी.

ये घटना उत्तर त्रिपुरा के नलकाटा इलाके की है. जानकारी के मुताबिक हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में CPM के खिलाफ वोट करने के लिए एक महिला की हत्या कर दी गई. महिला के पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि पीड़ित महिला के ससुर और जेठ रात कथित रूप से उसके घर में घुस गये. इन पर आरोप है कि इन दोनों ने महिला को CPM को वोट ना देकर BJP को वोट देने के लिए उसे खूब डांट लगाई.

पड़ोसियों के मुताबिक इसके बाद महिला पर ईट और डंडों से हमला किया गया. जिससे महिला की मौत हो गई.

सबसे शर्मनाक है इन तीनो घटनाओं पर मीडिया और बुद्धिजीवियों का रवैया

इन तीनो घटनाओं को मीडिया ने अपने-अपने तरीके से नज़रअंदाज़ कर दिया. बुद्धिजीवी इस पर मौन ही रहें. पत्रकार मानक गुप्ता ने बिलकुल सही कहा,” सी.पी.एम.को छोड़ कर बीजेपी को वोट दिया तो बहू को ईटों और डंडो से मार डाला …!! इनटॉलेरेंस का झंडा ले कर यही लोग देश भर में घूम रहे थे”

पत्रकार राहुल सिन्हा ने ट्वीट किया,” देश में असहनशीलता का राग अलापने वाला अवॉर्ड वापसी गैंग अगले चुनाव तक छुट्टी पर है,वैसे भी मधु ने अगर इन तीनों (उबेद, हुसैन और अब्दुल) का मारा होता तो अब तक तो हाथों में तख्ती लेकर उस गैंग का सोशल मीडिया पर अभियान चरम पर होता.”

साफ है मीडिया और बुद्धिजीवियों के रवैये में एक दोहरापन है. अगर यही सब घट्नायें उत्तरप्रदेश या मध्यप्रदेश में होती तो इसे असहिष्णुता या इमरजेंसी घोषित कर दिया जाता.

जायज है जनता का मीडिया और बुद्धिजीवियों को संशय भड़ी निगाहों से देखना

मीडिया और बुद्धिजीवियों के रवैये को देख कर आज देश की जनता इनको संशय भड़ी निगाहों से देखने लगी है. और इन दोहरे मापदंड वाले मीडिया और बुद्धिजीवियों से पूछ रही है-
1. पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट आई जिसमे मधु ने मुट्ठी भर चावलो की कीमत अपनी खोपड़ी और पसलियाँ तुड़वाकर,अंदर ही अंदर रिसते हुए खून के साथ,जान देकर चुकाई है. वनवासी मधु के साथ मुस्कुराकर सेल्फी ले रहा है,आतंक का असली चेहरा है. क्या ये मानवता के नाम पर धब्बा नहीं है?
2. क्या केरल में मधु को मारा गया और मारने वाले विशेष समुदाय के है तो क्या इसपर नहीं बोलना चाहिए?
3. उत्तरप्रदेश का दलित दलित है और अगर केरल में दलित मारा जायेगा तो क्या उसे दलित नहीं समझा जायेगा?4. 16 से अधिक लोगों ने आदिवासी युवक को पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया, क्या इसे राजस्थान वाला “भीड़तंत्र” नहीं कहा जायेगा ?
5. एक दलित को केरल में पीट कर इसलिये कर दी क्योंकि भूख से विवश होकर दुकान से इसने खाना चुराया। क्या मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी नही बनती अब? क्या असहिष्णुता नही आ रही? अबकी बार बढ़ती असहिष्णुता और “मोब लिंचिंग” के लिए मुख्यमंत्री का इस्तीफा नही मांगा जायेगा?
6. दलित आदिवासी की आवाज उठाने वाले बड़ेलोग है बापसी गैंग ,असहिष्णुता ब्रिगेड JNU आजादी गैंग , अखलाख की मौत पर रोने वाले मौन क्यों हैं? बस इसलिए केरल में बेजेपी की सरकार नहीं है?

7. आरएसएस अगर हिन्दुओं की बात करे तो सांप्रदायिक , फिर ‘नगालैंड बाप्टिस्ट चर्च काउन्सिल’ ईसाईयों की बात करे तो सांप्रदायिक क्यों नहीं ?
8. सेक्युलर देश में राम और ईसा के नाम पर टकराव पैदा कर रहा चर्च. इस पर संविधान के ठेकेदार क्यों नहीं बोलते?
9. भाजपा एक राजनीतिक पार्टी है जो देश के संविधान के तहत काम करती है. फिर चर्च नफरत क्यों फैला रहा?
किसी संस्था को मतदाता को यह बताने का अधिकार किसने दिया की कौन किसे वोट देगा?
मगर धर्म के नाम पर कोई किसी को नही बता सकता की किसे वोट देना है?

10. चुनाव में महिला के BJP को दिया वोट देने पर ससुराल वालों ने पीट-पीटकर मार डालना सबसे बड़ा इनटॉलेरेंस है. इस पर कोई बात क्यों नहीं कर रहा? क्या एक महिला किसी वोट करेगी ये वो खुद तय नहीं कर सकती ?

 

 

 

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