Sarvan Kumar 13/05/2019

वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की चर्चा जोरों पर है. विश्वनाथ मंदिर के आसपास के घरों को तोड़कर मंदिर निकाले जा रहे हैं. देशभर के लोग और विश्व हिंदू समुदाय में काफी खुशी है तो कुछ संगठनों और लोगों में नाराजगी भी है. ये प्रोजेक्ट क्या है? श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की पूरी जानकारी.

क्या है श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ?

गंगा नदी से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक एक कॉरिडोर बनाया जा रहा है ताकि तीर्थयात्री आसानी से मंदिर पहुंच सके.
मणिकर्णिका, जलासेन और ललिता घाट से सीधे और आसानी से श्रद्धालु मंदिर जा सकेंगे. श्रद्धालुओं को तंग गलियों, गंदगी और भीड़ से छुटकारा मिल जाएगा. पीम नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में जो कॉरिडोर बन रहा है उसकी चौड़ाई 56 मीटर होगी जो गंगा घाट से शुरू होगी. आसपास के मकानों और छोटी – छोटी गलियों में यह मंदिर छिप जाता था.

 सुविधा युक्त अनोखा कॉरिडोर

अब लोग गंगा घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर को सीधा देख पाएंगे. श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में तीर्थ यात्रियों के लिए काफी सुविधाएं देने का प्रयास किया जाएगा. वेटिंग रूम ,म्यूजियम, यज्ञशाला ,पुजारी और तीर्थ यात्रियों के लिए रहने के  जगह भी बनाया जाएगा. सिक्योरिटी सिस्टम को काफी दुरुस्त किया जाएगा. सावन के महीने में लगभग तीन लाख श्रद्धालु रोज यहां आते हैं. तंग गलियों से होकर मंदिर पहुंचने में काफी कठिनाइयों होती थी. कॉरिडोर बन जाने से अब यह सब परेशानियां खत्म हो जाएगी और लोग आसानी से मंदिर पहुंच पाएंगे.

कितने एरिया में होगा श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर?

कॉरिडोर की एरिया लगभग 40000 स्क्वायर मीटर होगी. कॉरिडोर ललिता घाट से शुरू होगी और पहले पड़ाव पर सांस्कृतिक सेंटर बनाया जाएगा. अगले पड़ाव पर आपको लाइब्रेरी मिलेगा, इस लाइब्रेरी में काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास के बारे में जुड़ी हुई जानकारी मिलेगी . थोड़ी दूर जाने के बाद कैफे और विश्राम घर मिलेगा. यहां पर थके हुए यात्री आराम कर सकते हैं. आगे बढ़ने पर कॉरिडोर के दोनों और दुकानों की व्यवस्था भी की गई है. कॉरीडोर का सबसे अनोखा आकर्षण होगा मंदिर चौक और यहीं पर दिखेगा होगी काशी विश्वनाथ मेन मंदिर में एंट्री होने का दरवाजा.

तोड़े जाएंगे 296 बिल्डिंग्स

श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के लिए 296 घरों को चिन्हित किया गया है.इनमें अभी तक 175 मकान खरीदे जा चुके हैं. 40 को तोड़ा जा चुका है और 60 को तोड़ने का प्रक्रिया जारी हो गया है. घरों को तोड़ने के बाद अंदर से मंदिर निकल रहे हैं. इनमें कुछ मंदिर 11वीं और 12वीं शताब्दी के बताए जाते हैं. कुछ मंदिर 18वीं और 19वीं सदी के है. सीढ़ियों के नीचे से एक शिवलिंग भी मिला.इन बातों से यह साबित होता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर वास्तव में एक विशाल प्रांगण था जिसके चारों ओर कई सारे दूसरे प्राचीन मंदिर थे . समय के साथ इन मंदिरों को ढक दिया गया और इसके जगह घर बना दिया गया. गलियां तंग हो गई और काशी विश्वनाथ मंदिर इसमें कहीं गुम हो गया.

घरों को तोड़ने के बाद निकले मंदिर और पुराने आर्किटेक्चर

कॉरीडोर बनाने के ध्वस्तीकरण क्रम में हस्यमय तरीके से मंदिर बाहर निकल निकल रहे हैं. ध्वस्तीकरण क्रम में जब घरों को तोड़ा गया तो घरों से मंदिर निकलने शुरू हुए. लोगों ने मंदिरों में ही घर बना रखा था. ये मंदिर काफी प्राचीन काल का है. 43 ऐसे मंदिर और दूसरे चीजें मिली हैं जो कि  काफी प्राचीन है. इस क्रम में समुद्र गुप्त काल का एक मंदिर मिला है जो की पूरी तरह दीवारों से ढका हुआ था और उसके ऊपर टॉयलेट भी बना हुआ था.ऐसा लगता है इन मंदिरों का निर्माण औरंगजेब के पतन के बाद कराया गया था. इनमें से एक मंदिर का निर्माण 1777 ईसवी में अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था.

काशीनाथ मंदिर  से मिलता-जुलता एक और मंदिर

एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई. कॉरीडोर के रास्ते में एक मकान है CK37/27. इस मकान में जो मंदिर मिला वह हूबहू काशीनाथ मंदिर का नकल लगता है. फर्क बस इतना है कि शिवलिंग और नंदी का साइज बड़ा है. कॉरिडोर बनाने के क्रम में प्रवेश द्वार भी मिला है.इस प्रवेशद्वार को पूरी तरह से ईटो से ढक दिया गया था.श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को बनाने के लिए 600 करोड़ का बजट तैयार करके रखा गया है.

मेन मंदिर परिसर अब होगा 10 गुना बड़ा

वर्तमान में काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर सिर्फ 2100
वर्ग फुट है जो बढकर 21000 फीट हो जाएगा. अब मंदिर परिसर 10 गुना बड़ा होगा. हजारों श्रद्धालु अब एक साथ आराधना कर सकेंगे.

घरों के मालिक और दुकानदारों का क्या होगा

श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण के दौरान घरों के मालिक और दुकानदारों को कोई परेशानी ना हो इसके लिए उनके पुनर्वास का भरपूर प्रयास किया जा रहा है.

काशी विश्वनाथ मन्दिर
काशी विश्वनाथ मन्दिर

आपको बता दें कि काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है. मंदिर कई बार तोड़ी गई और बनाई गई. अंतिम बार जब यह मंदिर तोड़ी गई तो वह औरंगजेब के द्वारा तोड़ी गई थी उस जगह पर ज्ञान व्यापी मस्जिद बनाई. बाद में 1780 में मराठा शासिका अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर का निर्माण कराया.”

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