Ranjeet Bhartiya 05/02/2020
जाट गायक सिद्धू मूसेवाला आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा बनी रहेगी। अपने गानों के माध्यम से वह अमर हो गए हैं । सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को मानसा जिले में उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या किसने और किस वजह से की यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन हमने जाट समाज का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके फैंस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। jankaritoday.com की टीम के तरफ से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 07/09/2020 by Sarvan Kumar

कासगंज भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक जिला है. उत्तर प्रदेश राज्य के पश्चिमी भाग में स्थित यह जिला अलीगढ़ मंडल के अंतर्गत आता है. कासगंज शहर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है. यह जिला प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हरि की पौड़ी के लिए प्रसिद्ध है. आस्था के केंद्र इस स्थल का संबंध भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह से है. जिले में कितने तहसील है? कितनी जनसंख्या है आइये जानते हैं कासगंज जिले की पूरी जानकारी.

कासगंज जिला कब बना?

एक स्वतंत्र जिले के रूप में अस्तित्व में आने से पहले कासगंज एटा जिले का हिस्सा हुआ करता था. 17 अप्रैल, 2008 को इसे एटा जिले से अलग करके एक स्वतंत्र जिला बनाया गया.

नामकरण
कुछ समय के लिए उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मायावती सरकार ने जिले का नाम प्रसिद्ध दलित नेता कांशीराम के सम्मान में काशीराम नगर रखा था, लेकिन 2012 में इसका नाम फिर से बदलकर कासगंज कर दिया गया.

कासगंज जिले की भौगोलिक स्थिति

बाउंड्री (चौहद्दी)
यह जिला कुल 5 जिलों से घिरा हुआ है.
उत्तर में-बदायूं जिला
दक्षिण में-एटा जिला
पूरब में-फर्रुखाबाद जिला
पश्चिम में-अलीगढ़ जिला और हाथरस जिला

समुद्र तल से ऊंचाई
कासगंज जिला समुद्र तल से लगभग 177 मीटर की औसत ऊंचाई पर स्थित है.

क्षेत्रफल
इस जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1955 वर्ग किलोमीटर है.

प्रमुख नदियां:

गंगा नदी जिले की उत्तर-पूर्वी सीमा पर बहती है और इसे बदायूं जिले से अलग करती है. जिले के प्रमुख नदियां हैं: गंगा, बूढ़ी गंगा और काली.

अर्थव्यवस्था-कृषि, उद्योग और उत्पाद

इस जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन, वन, उद्योग और व्यवसाय पर आधारित है.

कृषि

जिले की अर्थव्यवस्था प्राथमिक रूप से कृषि पर निर्भर है. जिले की भूमि उपजाऊ है और यहां रबी, खरीफ और जायद फसलों को खेती होती है. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फसल हैं: गेहूं, बार्ली, मक्का, ज्वार, बाजरा, धान, दलहन (चना,मूंग, उड़द और मटर), तिलहन (मूंगफली और सरसों), गन्ना, तंबाकू, आलू, और सब्जियां. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फल हैं: आम अमरूद, पपीता, केला, बेर, जामुन, कटहल और इमली.

पशुपालन

जिले के ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान है. जिले में बेहतर गुणवत्ता वाले पशुओं का पंजाब और हरियाणा से आयात किया जाता है. जिले के प्रमुख पशु धन हैं: गाय, भैंस, सूअर, बकरी और पोल्ट्री.

वन

जिले में वन क्षेत्र बहुत कम हैं. जिले में कोई आरक्षित वन क्षेत्र नहीं है. जिले में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण पेड़ हैं: ढाक, बबूल, शीशम, जामुन, आम, नीम, इमली, सेमल, गूलर, बेल, बेर, अमलतास, अशोक, कचनार और गुलमोहर.

खनिज

यह जिला खनिज संपदा से समृद्ध नहीं है. जिले में मूल्यवान खनिजों का अभाव है. जिले में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं: बालू, कंकर, रेह और क्ले.

उद्योग

औद्योगिकरण की दृष्टि से यही पिछड़ा जिला है. जिले में बड़े उद्योगों का अभाव है.

व्यापार और वाणिज्य

कासगंज कृषि उत्पादों का व्यापार केंद्र है. जिले से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख पदार्थ हैं: अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, गुड़ और आलू. जिले में आयात किए जाने वाले प्रमुख पदार्थ हैं: रोजमर्रा के सामान, नमक, दवाई, कपड़े, पेट्रोल, डीजल और बिल्डिंग मटेरियल.

प्रशासनिक सेटअप

प्रमंडल: अलीगढ़
प्रशासनिक सहूलियत के लिए कासगंज जिले को 3 तहसीलों (अनुमंडल) और 7 विकासखंडो (प्रखंड/ ब्लॉक) में बांटा गया है.

तहसील (अनुमंडल):
कासगंज जिले को कुल 3 तहसीलों में बांटा गया है:
पटियाली, सहावर और कासगंज.
विकासखंड (प्रखंड):
जिले को कुल 7 विकासखंडों (प्रखंडों) में बांटा गया है.
पटियाली तहसील के अंतर्गत कुल 3 विकासखंड आते हैं: पटियाली, गंजडुंडवारा और सिढपुरा. सहावर तहसील के अंतर्गत कुल दो विकासखंड आते हैं: सहावर और अमानपुर.
कासगंज तहसील के अंतर्गत कुल 2 विकासखंड आते हैं: कासगंज और सोरों.
पुलिस थानों की संख्या: 11
नगर पालिका परिषदों की संख्या: 3
नगर पंचायतों की संख्या: 7
ग्राम पंचायतों की संख्या: 389
गांवों की संख्या: 715
निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र: 1; एटा
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र: 3
कासगंज जिले के अंतर्गत कुल 3 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं: कासगंज, अमानपुर और पटियाली.

कासगंज जिले के डेमोग्राफीक्स  (जनसांख्यिकी)

2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, इस जिले की जनसांख्यिकी इस प्रकार है-
कुल जनसंख्या: 14.37 लाख
पुरुष: 7.64 लाख
महिला: 6.72 लाख
जनसंख्या वृद्धि (दशकीय): 16.93%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 735
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में अनुपात: 0.72%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष): 880
औसत साक्षरता: 61.02%
पुरुष साक्षरता: 71.56%
महिला साक्षरता: 49.00%
शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या: 20.06%
ग्रामीण जनसंख्या: 79.94%

धार्मिक जनसंख्या

2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, कासगंज एक हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 84.32% है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 14.88% है. अन्य धर्मों की बात करें तो जिले में ईसाई 0.14%, सिख 0.16%, बौद्ध 0.27%, जैन 0.02% और अन्य 0.01% हैं.
भाषाएं
जिले में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं: हिंदी और उर्दू.

कासगंज जिला आकर्षक स्थल

इस जिले में पौराणिक, धार्मिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कई दर्शनीय स्थल हैं. जिले में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में संक्षिप्त विवरण:

हरि की पौड़ी

आस्था का केंद्र यह पवित्र कुंड कासगंज शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूरी पर सोरों में स्थित है. यहां लोग अपने मृतक परिजनों के अस्थियों को डुबाने आते हैं. कहा जाता है कि इस कुंड में मानव हड्डियों को छोड़ देने पर 72 घंटे वो गल कर गायब हो जाती है. यह आज तक एक अनसुलझा रहस्य है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप नाम के एक असुर ने पृथ्वी को चुरा कर एक कुंड में छिपा दिया था. भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध करके पृथ्वी को फिर से पुनर्स्थापित किया.
इस प्रकार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में यहां पर एक मंदिर का निर्माण किया गया.

मुरलीधर घंटाघर

यह पर्यटन स्थल कासगंज शहर के मध्य में सोरों गेट से लगभग 0.5 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. इसका निर्माण लाला दयाल ने अपने पिता मुरलीधर अग्रवाल के याद में करवाया था.

लक्ष्मी गेट

अपने निर्माण शैली और सुंदर वास्तु कला के लिए प्रसिद्ध लक्ष्मी गेट कासगंज शहर के मध्य में रोडवेज बस स्टैंड से लगभग 0.5 किलोमीटर दूर पर स्थित है.

नदरई ब्रिज

ब्रिटिश काल में निर्मित यह ऐतिहासिक ब्रिज कासगंज शहर से से लगभग 3 किलोमीटर दूरी पर मथुरा बरेली राजमार्ग पर स्थित है. 346 मीटर लंबे इस ब्रिज निर्माण 1885 से 1889 के बीच हुआ था. गंगा नहर और काली नदी पर बना यह ब्रिज अपने वास्तुकला और निर्माण शैली के बेजोड़ नमूने के तौर पर देश-विदेश में प्रसिद्ध है.

भीमसेन घंटा मंदिर

यह मंदिर कासगंज शहर से लगभग 4 किलोमीटर पश्चिम में मथुरा-बरेली राजमार्ग पर नदरई गांव में स्थित है.  इस मंदिर का मुख्य आकर्षण है 194 साल पुराना भारी-भरकम घंटा जिसकी कहानी बहुत ही रोचक है. नदरई गांव में भीमसेन नाम के एक जमींदार हुआ करते थे. वह अंग्रेजी सेना में रिसालदार थे. एंग्लो-बर्मा युद्ध में उन्होंने असाधारण युद्ध कौशल का परिचय दिया जिसके कारण ब्रिटिश सेना बर्मा के कॉगवांग राजवंश को हराने में सफल रही. भीमसेन के बहादुरी से प्रसन्न होकर अंग्रेजों ने कॉगवांग किले से छीना हुआ अष्ट धातु से निर्मित भारी भरकम घंटा उन्हें इनाम के रूप में दिया. बाद में भीमसेन ने इस घंटे को नदरई गांव में स्थित शिव मंदिर में स्थापित करवा दिया.

कासगंज कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग

कासगंज जिले का अपना हवाई अड्डा नहीं है. यहां के लिए डायरेक्ट हवाई सेवाएं उपलब्ध नहीं है. निकटतम हवाई अड्डा: पंडित दीनदयाल उपाध्याय एयरपोर्ट/आगरा एयरपोर्ट (Code: AGR). यह हवाई अड्डा कासगंज से लगभग 125 किलोमीटर की दूरी पर आगरा में स्थित है. दूसरा नजदीकी एयरपोर्ट: ग्वालियर एयरपोर्ट (Code: GWL) हवाई अड्डा कासगंज से लगभग 230 किलोमीटर की दूरी पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित है.

रेल मार्ग

कासगंज रेल मार्ग से प्रदेश की राजधानी लखनऊ, देश की राजधानी नई दिल्ली तथा देश के विभिन्न हिस्सों से अच्छे से जुड़ा हुआ है.
निकटतम रेलवे स्टेशन: कासगंज जंक्शन रेलवे स्टेशन (Code: KSJ).

सड़क मार्ग

कासगंज सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यहां के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध है. आप यहां अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी आ सकते हैं.
स्टेट हाईवे 33 (SH 33) जिले से होकर गुजरती है.

कासगंज जिले की कुछ रोचक बातें:

2011 के जनगणना के अनुसार,
1. जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में 64वां स्थान है.
2. लिंगानुपात के मामले में उत्तर प्रदेश में 50वां स्थान है.
3. साक्षरता के मामले में उत्तर प्रदेश में 60वां स्थान है.
4. सबसे ज्यादा बसे गांव वाला तहसील: पटियाली (258).
5. सबसे कम बसे गांव वाला तहसील: सहावर (168)
6. जिले में कुल निर्जन गांवों की संख्या: 65

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