Sarvan Kumar 30/01/2018

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कासगंज हिंसा, जिसमे तिरंगा यात्रा के दौरान एक एक हिन्दू युवक चन्दन गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी, पर हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा. इस घटना ने देश को सकते में डाल दिया है की देश में क्या हो रहा है, अब हम देश में तिरंगा यात्रा भी नहीं निकाल सकते क्या?
एक तरफ कानून व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा पर सवाल उठाये जा रहें हैं. तो दूसरी तरफ लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता पर भी तरह-तरह के सवाल उठाये जा रहे.

पत्रकारिता पर सवाल इसलिए उठ रहे की कुछ पत्रकार खुद ही जाँचकर्ता मानने लगे हैं. ये पत्रकार स्टुडिओ या अपने घर के बेडरूम में बैठे-बैठे कासगंज हिंसा पर जाँच तो कर ही रहे , साथ ही 5 मिनट में फैसला भी सुना रहे. इनके जाँच और फैसला सुनाने की गति को देखकर लगता है की CBI और कोर्ट को बंद कर देना चाहिए.!

बहरहाल कासगंज मामले में दो पत्रकारों का जिक्र करना ज़रूरी है. एक हैं ABP पत्रकार अभिसार शर्मा और दूसरे राजदीप सरदेसाई.

अभिसार शर्मा

पत्रकार अभिसार शर्मा ने अविलम्ब एक वीडियो जारी किया. वीडियो में अभिसार शर्मा ने कहा,”
हो ये रहा है की जानबूझ के एक तबका ना सिर्फ भड़काऊ बयान दे रहा है बल्कि आप तक झूठ तक पंहुचा रहा है. ये तबका कह रहा हम कश्मीर में तिरंगा नहीं फहरा सकते, केरल में नहीं फहरा सकते अब उत्तरप्रदेश में नहीं फहरा सकते? तिरंगा यात्रा निकलना अपराध है क्या ?
अब्दुल हमीद चौराहे पर सत्य ये है की कुछ मुस्लमान तिरंगा फहरा रहे थे. वहां पर AVBP के लोग मोटर साइकिल पर सवार होक आये साथ में वो भगवा झंडा लेकर भी आये. मुसलामन तिरंगे के खिलाफ नहीं था, वो भगवे के खिलाफ था.”

राजदीप सरदेसाई.

पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्विटर पर लिखा, “कासगंज में आख़िर क्या हुआ? आजतक के ग्राउंड रिपोर्ट से सचाई सामने आइ. ABVP ने हिंसा भड़काई, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने जवाब दिया, फ़ाइअरिंग में एक लड़के चंदन की मौत हुई. अब रूमर बंद करिए.

इन दोनों पत्रकारों से सीधा सवाल है जो देश की जनता पूछना चाहती है-
अभिसार शर्मा से सवाल-

1. अभिसार शर्मा आपने इतने कम समय में जाँच कर के निष्कर्ष पर कैसे पहुँच गए?
2. अभिसार शर्मा ये बताएं की भारत में तिरंगा यात्रा निकलना कब से भड़काऊ हो गया ?
3. इसमें झूठ क्या है की एक खास वर्ग कश्मीर हो या केरल तिरंगे फहराने पर बवाल खड़ा करता है? क्या ऐसे सवाल नहीं उठने चाहिए?
4. अब्दुल हमीद चौराहे पर अगर कुछ मुस्लमान तिरंगा फहरा रहे थे तो स्वागत योग्य बात है. लेकिन आपने कहा वहां पर AVBP के लोगों के हाथ में भगवा झंडा था जिससे मुस्लिम भड़क गए. वाह !कमाल की बात है! अब हिन्दू देश में भगवा झंडा लेकर भी नहीं चल सकता? क्या यही सेकुलरिज्म है?
5. केरल में फिर गणतंत्र दिवस पर कई जगह मुसलमानो ने केवल हरे झंडे में जुलूस क्यों निकला गया?
6.अगर मुसलमान भगवे के खिलाफ है , तो फिर हिन्दू अगर हरे झंडे के खिलाफ हो गया तो क्या होगा?
अगर मुसलमान भगवे के खिलाफ है , तो फिर हिन्दू अगर हरे झंडे के खिलाफ हो गया तो देश का सेक्युलरिज़्म खतरे में तो नहीं आएगा ना? इसे आप आगे असहिष्णुता तो नहीं ही कहेंगे?

राजदीप सरदेसाई से सवाल-

1 ABVP ने हिंसा भड़काई, ये बिना जाँच के आप कैसे कह सकते हैं?
2. टुकड़े गैंग से आपको बड़ा लगाव है, ABVP से इतनी नफरत आपके पत्रकारिता पर सवाल उठाते हैं सर.

3. ABVP ने हिंसा भड़काई,और चन्दन मारा गया. ये लॉजिक समझ से बाहर है?अगर ABVP ने हिंसा भड़काई ,मतलब ABVP के लोग तैयारी से गये थे, लेकिन 2 हिंदू की मौत हुईं और मुसलमानों को कुछ नही हुआ?

खैर छोड़िये . कम से कम न्यायिक जाँच हो जाने तक तो चुप रहते?

4. सबसे शर्मनाक बात जिनसे आपको जनता के सामने नंगा कर दिया. पत्रकार हैं आप हिंसा को समर्थन देना बंद कीजिए.
” मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने जवाब दिया, फ़ाइअरिंग में एक लड़के चंदन की मौत हुई. ”
अर्थात जबाब में कोई गोली मरने के लिए हिंसा करने के लिए स्वतंत्र है?

अगर इस तरह से हिन्दू भी गोलियों में जबाब देने लगा तो?

5. ” रूमर बंद करिए.” एक लड़के की जान गयी, ये अफवाह है क्या?

इन पत्रकारों की सच्चाई-

पत्रकार सुधीर चौधरी ने सही कहा- “चंदन गुप्ता अगर चाँद खान या चंदन वेमूला होता तो आज देश में माहौल बिलकुल अलग होता.मीडिया और नेताओं को समझना होगा कि हर भारतीय के अधिकार बराबर हैं.चाहे वो खान हो,वेमुला हो या गुप्ता हो. अधिक जानकारी के लिए भारत का संविधान पढ़ें.”

सन्देश साफ है पत्रकार अपना दोहरा रवैया छोड़ दें और अख़लाक़ और चन्दन को अलग-अलग चश्मे से ना देखें!

जिसके ह्रदय मे देश प्रेम का भाव है, जो तिरंगा फहराना देश की शान समझते है, वन्देमातरम और भारत माता की जय जैसे नारों का यशगान करते है,वो कोई भी हों. ई गुंडे हो,उपद्रवी और दंगाई नहीं हो सकते. ऐसे पत्रकारों को शर्म आनी चाहिए.

पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने लिखा, ये बात कितनी सच है यह जांच में सामने आएगा। लेकिन क्या ऐसे नारे भी किसी को किसी पर गोली चलाने का हक दे देते हैं ? क्या अब इस देश मे पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाने वालों को गोली मारी जाएगी ? हिन्दू मोहल्ला हो या मुस्लिम मोहल्ला, जब तक पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाना बन्द नहीं करता, निर्दोष हिंदुस्तानियों को मारना बंद नहीं करता,हर हिंदुस्तानी को हर गली मोहल्ले में पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाने का हक है.

निष्पक्ष और निडर हो पत्रकारिता

भारत के सभी स्कुल, काँलेज अपनी तिरंगा रैली केवल हिंदुओ की इलाकों मे करें अन्य इलाकों मे किया तो उसे सांप्रदायिक माना जायेगा क्या? अगर आज वंदेमातरम् और भगवा झंडे पर दंगा होता है यही हाल रहा तो आपके घर के मंदिर पर भी विरोध होना शुरू हो जाएगा तो?

अगर साहस से निडर पत्रकारिता नहीं कर सकते तो देश को गुमराह करने का धंधा ना करें पत्रकार क्योंकि जनता अब समझदार हो चुकी है!

 

 

 

 

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