Sarvan Kumar 20/02/2018

तिरुपति मंदिर गैर-ब्राह्मण ,दलित बने पुजारी

परंपरागत अंधविश्वास और रूढ़िवादी को पीछे छोड़ते हुए तिरुमला तिरुपति देवस्थान (टीटीडी) का पहला गैर-ब्राह्मण पुजारियों का बैच तैयार हो चुका है. मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आने वाले पुजारी जल्द ही प्रभार ग्रहण करने वाले हैं.
टीटीडी प्रबंधन द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तहत दलित और पिछड़े वर्गों के लगभग 200 लोग तीन महीने तक सशक्त प्रशिक्षण से गुजर चुके हैं. टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी अनिल सिंघल का कहना है की, “प्रबंधन जल्द ही इसके द्वारा शासित मंदिरों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के पुजारी नियुक्त करने जा रहा है.”

सिंघल ने कहा कि यह पहली बार है जब समाज के दलितों के सदस्यों के सदस्यों को विश्व के सबसे अमीर मंदिर की भर्ती प्रक्रिया में मौका दिया जा रहा है.

सिंहल ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान कहा, “पुजारी के लिए दलितों के लिए आरक्षण की मांग कई दशकों से जारी रही है. मांग को पूरा करने के लिए पिछले कुछ क्वॉर्टर्स से कठोर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है, लेकिन अब हम इसे एक वास्तविकता बना चुके हैं.”

टीटीडी के श्री वेंकटेश्वर एम्प्लॉइज ट्रेनिंग एकेडमी (एसवीईए) ने इस कार्यक्रम को दो साल पहले लॉन्च किया था लेकिन बाद में बंद कर दिया गया था.

अब प्रशिक्षित पुजारी के पहले बैच तैयार है और बहुत जल्द वे मंदिरों में नियुक्त होंगे. साथ ही टीटीडी एंडोमेंट्स डिपार्टमेंट के साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और मछुआरों के कालोनियों में करीब 500 मंदिरों का निर्माण करने जा रहा है.

यह एक स्वागतयोग्य कदम है-

हिन्दुओ में जातिवाद धर्म के ठेकेदारों, मुगलो, मिशिनरी ईसाईयों, वामपंथियों और छदमसेकुलरों द्वारा फैलाई गयी एक कुरीति है. वास्तविक हिन्दू धर्म में हिन्दुओ में जातिवाद की कोई व्यवस्था थी ही नहीं. वर्ण का निर्धारण जन्म के आधार पर नहीं बल्कि कर्म के आधार पर होता था.

ये अत्यंत ही हर्ष का अवसर है की तिरुमला तिरुपति बोर्ड ने अपने 500 मंदिरों के लिए नए पुजारियों के पहले जत्थे को नियुक्त किया. ये सभी “हिन्दू” हैं और पुजारी बनने के विभिन्न संस्कारों के परीक्षाओं को पास करके पुजारी बने हैं. ये सभी अब तिरुपति मंदिर में विभिन्न पूजा कर्म कराएँगे और ये सभी वर्ण से ब्राह्मण हो गए. अब ये सब के सब “ब्राह्मण” बन चुके हैं क्योंकि इन्होंने ये वर्ण स्वयं चुना है, वर्ण कर्म के आधार पर होता है, चूँकि ये सभी अब पुजारी का कर्म करेंगे, और वर्ण व्यवस्था के हिसाब से ये कर्म करने वाले ब्राह्मण होते है, इसलिए ये सभी पुजारी अब से ब्राह्मण है.

संविधान ने हिन्दुओं को GENERAL , OBC SC, ST में बांटकर हिन्दू समाज के टुकड़े- टुकड़े कर दिए. अगर सुरु से ही जातिवाद ख़तम करने पर जोड़ दिया जाता तो आज हिन्दू समाज इतना बिखड़ा नहीं होता. दलितों के नाम पर वोटबैंक की राजनीति करने वाले दलितों को और भी हाशिये पर लाने के जिम्मेदार हैं, ताकि उनका वोटबैंक बचा रहे. नकली अम्बेडकरवादीओ के हिसाब से ये सभी “शुद्र” हैं. पर हिन्दू धर्म के हिसाब से ज्ञान जिसके पास है वो ब्राह्मण है, कमज़ोरों की रक्षा करने वाला क्षत्रिय है, व्यापार करने वाला वैश्य है और सेवा करने वाला शूद्र. वर्ण कर्ममूलक है नाकी जन्ममूलक.

एक उम्मीद जगी है कि जातिवाद की बुराई हिन्दू समाज से खत्म हो जाएगी. एक दिन मुझे यकीन है कि जब हमारे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भाई सामाजिक भेदभाव के चंगुल से बाहर आएंगे और कहेंगे कि हमें कोई सामाजिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ रहा.

भगवान लोगों में भेदभाव कभी नहीं करते हैं. यह हम है, जो पृथ्वी के इन सभी अवांछित भेदभाव पैदा करते हैं. यह हिंदू धर्म की सुंदरता है, जो अन्य धर्मों के विपरीत, समय के साथ विकसित होता है.
एक पुजारी बनने के लिए ज्ञान और अनुष्ठान और सही रवैया और एक मनभावन व्यक्तित्व की आवश्यकता होती है, जन्मजात प्रमाणपत्र नहीं!

इस स्वागतयोग्य कदम पर क्यों चुप हैं जातिवाद धर्म के ठेकेदार, वामपंथी, छदमसेकुलर, ,मीडिया और राजनेता

जातिवाद धर्म के ठेकेदार, वामपंथी, छदमसेकुलर, ,मीडिया और राजनेता इसलिए चुप हैं की उनकी दुकान न बंद हो जाये. जातिवाद धर्म के ठेकेदार जो की हर जाती से आते हैं, अपने निजी फायदे के लिए हिन्दुओं को बाँट कर रखना चाहते है. राजनेता चुनावी समीकरण साधने के लिए हिन्दू समाज को दलित, पिछड़ा, सामान्य वर्ग में बाँट कर सत्ता पाना कहते हैं. वामपंथी देश को अस्थिर करने के लिए , विदेशी ताकतों से मिलकर हिन्दू समाज को बाँट कर ख़त्म कर देना चाहते हैं.
मीडिआ , मीडिया जो की ज़मीर बेच कर अमीर बन चुका है , वो TRP और पैसों के लिए काम करता है. इन ज़मीर बेच कर अमीर बन चुके पत्रकारों से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती.

अब हिन्दू खुद ही अपने हितों की रक्षा करें, सजग रहें, एक रहें. क्योंकि सुरक्षित रहने का सिर्फ यही एक तरीका है!

 

1 thought on “गैर-ब्राह्मण पुजारियों , पर खुश क्यों नहीं हैं वामपंथी, छदमसेकुलर, मीडिया और राजनेता?

  1. संविधान ने general, obc, sc, st, मे बांटा तो ये 6743 जातीया किसने बनाई क्या ये सब संविधान के बाद बनी हैं तुम्हारा कहना हैं जन्म से नही कर्म से वर्ण तय होता हैं तो मुझे बताये शिवाजी महाराज के कौनसे कर्म बुरे थे की ब्राम्हणो ने राज्यभिषेक करणे से मना कर दिया था,तुकाराम महाराज के कौनसे कर्म खराब थे के उनके अभंग इंद्रायणी मे डूबाया और उन्हे सदा के लिये वैकुंठ मे भेजा गया,डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के कौनसे गुणकर्म खराब थे की उन्हे जातीयता के नाम पर हमेशा अपमानित होणा पडा क्यो उनको गुणो के आधार पर ब्राम्हण नही माना गया?बडी बडी बाते करणा आसन हैं अगर हिम्मत हैं तो जातीया खतम करणे का आंदोलन चलावो कोई उचा और कोई नीचा नही रहेगा सब समान होंगे सभी पहले और अंत मे भारतीय होंगे..जय शिवराय.. जय भीम..जय संविधान.. जय भारत

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