Ranjeet Bhartiya 13/10/2019
जाट गायक सिद्धू मूसेवाला आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा बनी रहेगी। अपने गानों के माध्यम से वह अमर हो गए हैं । सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को मानसा जिले में उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या किसने और किस वजह से की यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन हमने जाट समाज का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके फैंस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। jankaritoday.com की टीम के तरफ से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 07/09/2020 by Sarvan Kumar

चित्रकूट भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक जिला है. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में आने वाला यह जिला चित्रकूट प्रमंडल के अंतर्गत आता है. चित्रकूट प्रमंडल के अंतर्गत कुल 4 जिले आते हैं: चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर और महोबा. चित्रकूटधाम शहर (कर्वी) जिले का तथा चित्रकूट प्रमंडल का प्रशासनिक मुख्यालय है. चित्रकूट पौराणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत ही महत्वपूर्ण जिला है. हिंदुओं के लिए एक पवित्र धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात इस स्थान का उल्लेख रामायण में मिलता है. भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने वनवास काल के 11 वर्ष यहीं पर व्यतीत किए थे. चित्रकूट अपने प्राकृतिक सुंदरता, खूबसूरत झरने, घने वन, सुंदर पहाड़ियों और गुफाओं के कारण पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है. जिले मे कितने तहसील है? कितनी जनसंख्या है? आईये जानते हैं चित्रकूट जिले की पूरी जानकारी.

नामकरण

चित्रकूट का नामकरण “चित्र+कूट” पर पड़ा है. ‘चित्र’ का अर्थ होता है ‘विभिन्न प्रकार के रंग’ और ‘कूट’ का अर्थ होता है ‘पहाड़ी’. ऐसी मान्यता है कि यहां पर विभिन्न रंग के पत्थर पाए जाने के कारण इस स्थान का नाम चित्रकूट पड़ा.

चित्रकूट जिला कब बना

एक स्वतंत्र जिले के रूप में अस्तित्व में आने से पहले चित्रकूट बांदा जिले का हिस्सा हुआ करता था. 6 मई 1997 को इसे बांदा जिले से अलग करके एक स्वतंत्र जिला बनाया गया. शुरुआत में इस नवगठित जिले का नाम छत्रपति शाहूजी साहू जी महाराज नगर रखा गया. लेकिन 4 सितंबर 1998 को इसका नाम बदलकर के चित्रकूट कर दिया गया.

चित्रकूट जिले की भौगोलिक स्थिति

चित्रकूट जिला मैप
चित्रकूट जिला मैप

बाउंड्री (चौहद्दी)
चित्रकूट 6 जिलों से घिरा हुआ है.
उत्तर में-फतेहपुर जिला
दक्षिण में-मध्यप्रदेश का सतना जिला और रीवा जिला
पूरब में-कौशांबी जिला, प्रयागराज जिला और मध्य प्रदेश का रीवा जिला
पश्चिम में-बांदा जिला और मध्य प्रदेश का सतना जिला

समुद्र तल से ऊंचाई
कर्वी (चित्रकूट धाम) समुद्र तल से लगभग 120-125 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. राजापुर और मऊ समुद्र तल से लगभग 100 से 105 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. जिले की कोई भी पहाड़ी 450 से 500 मीटर से ज्यादा ऊंची नहीं है.

क्षेत्रफल

चित्रकूट जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 3216 वर्ग किलोमीटर है.

प्रमुख नदियां:

यमुना नदी जिले के उत्तरी सीमा का निर्माण करती है और चित्रकूट को फतेहपुर और कौशांबी जिले से अलग करती है. जिले की प्रमुख नदियां है: यमुना, मंदाकिनी और बघैन.

अर्थव्यवस्था-कृषि, उद्योग और उत्पाद

चित्रकूट जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन, वन, उद्योग और व्यवसाय पर आधारित है.

कृषि

जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फसल हैं: धान, गेहूं, ज्वार, बाजरा, दलहन, तिलहन और सब्जियां.

पशुपालन

ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन जिले के लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण जरिया है. जिले के प्रमुख पशु धन हैं: गाय, बैल, भैंस, सूअर, बकरी और पोल्ट्री.

वन

चित्रकूट जिले का लगभग 17.5% भूभाग वनों से आच्छादित है. जिले में पाए जाने वाले प्रमुख वन संपदा हैं: बबूल, करौंदा, करील, महुआ, सहजन, ढाक, तेंदू, खैर, हल्दु, बांस, साल और औषधीय वनस्पति. तेंदू के पत्तों का प्रयोग बीड़ी बनाने के लिए तथा खैर का इस्तेमाल कत्था बनाने के लिए किया जाता है.

खनिज

जिले में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं: सिलिका सैंड, सेंड स्टोन, ग्रेनाइट स्टोन, बालू और पहाड़ी मुरम.

उद्योग

औद्योगिकरण की दृष्टि से चित्रकूट एक पिछड़ा हुआ जिला है. जिले में कृषि आधारित छोटे-मोटे उद्योग स्थित हैं.

व्यवसाय

चित्रकूट जिला कृषि आधारित उत्पादों का व्यापार केंद्र है.

प्रशासनिक सेटअप

प्रमंडल: चित्रकूट
प्रशासनिक सहूलियत के लिए चित्रकूट जिले को 4 तहसीलों (अनुमंडल) और 5 विकासखंडो (प्रखंड/ ब्लॉक) में बांटा गया है.
तहसील (अनुमंडल):
चित्रकूट जिले को कुल 4 तहसीलों में बांटा गया है: राजापुर, मऊ, कर्वी और मानिकपुर.
विकासखंड (प्रखंड):
चित्रकूट जिले को कुल 5 विकासखंडों (प्रखंडों) में बांटा गया है-पहाड़ी, कर्वी, रामनगर, मऊ और मानिकपुर
पुलिस थानों की संख्या: 10
नगर पालिका परिषद की संख्या: 1
नगर पंचायतों की संख्या: 2
ग्राम पंचायतों की संख्या: 339
गांवों की संख्या: 663
निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र: 1, बांदा
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र: 2
चित्रकूट जिले के अंतर्गत कुल 2 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं: चित्रकूट और मानिकपुर.

चित्रकूट जिले की डेेेमोग्राफीक्स (जनसांख्यिकी)

2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, चित्रकूट
जिले की जनसांख्यिकी इस प्रकार है-
कुल जनसंख्या: 9.92 लाख
पुरुष: 5.27 लाख
महिला: 4.64 लाख
जनसंख्या वृद्धि (दशकीय): 29.43%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 308
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में अनुपात: 0.50%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष): 879
औसत साक्षरता: 65.05%
पुरुष साक्षरता: 75.80%
महिला साक्षरता: 52.74%
शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या: 9.71%
ग्रामीण जनसंख्या: 90.29%

धार्मिक जनसंख्या

2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, चित्रकूट एक हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 96.33% है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 3.48% है.अन्य धर्मों की बात करें तो जिले में ईसाई 0.07%, सिख 0.01%, बौद्ध 0.01% और जैन 0.03% हैं.
भाषाएं जिले में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं: हिंदी और उर्दू.

चित्रकूट में घूमने वाले स्थल

इस जिले में पौराणिक, धार्मिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कई दर्शनीय स्थल हैं. जिले में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में संक्षिप्त विवरण:

रामघाट

मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित यह शांत और सुंदर घाट एक पवित्र तीर्थस्थल है. इस घाट के बारे में मान्यता है कि भगवान श्री राम यहां पर स्नान किया करते थे. यह घाट भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के साक्षात्कार स्थल के रूप में प्रसिद्ध है.

गणेश बाग

मिनी खजुराहो के नाम से प्रसिद्ध गणेश बाग चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर सिद्धपुर गांव के नजदीक स्थित है. यहां एक विशाल नक्काशीदार भव्य मंदिर है जिसका निर्माण पेशवा विनायकराव में 19वीं शताब्दी में करवाया था.

शबरी जलप्रपात

यह खूबसूरत जलप्रपात जिले के मानिकपुर तहसील में स्थित है.

कामदगिरि पर्वत

धार्मिक दृष्टि से यह चित्रकूट धाम का एक प्रमुख पवित्र स्थान है. कहा जाता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने यहां निवास किया था. ऐसी मान्यता है कि इस पर्वत के दर्शन और परिक्रमा करने से सभी प्रकार की इच्छाएं और मनोकामनाएं पूर्ण होती है.

भरतकूप

भरतकूप चित्रकूट से लगभग 20 किलोमीटर पश्चिम में स्थित एक विशाल कुआं है. भरतपुर गांव के समीप स्थित इस कुएं के बारे में मान्यता है कि भगवान राम के भाई भरत ने उनके राज्याभिषेक के लिए सभी पवित्र जलाशयों का जल एकत्रित किया था. भगवान राम को वापस अयोध्या लौटने के लिए मनाने पर असफल रहने के पश्चात महर्षि अत्रि के आज्ञा अनुसार भरत ने एकत्रित किए गए जल को इसी कुएं में में डाल दिया था. कहा जाता है कि इस कुएं के पानी से स्नान करने पर सभी तीर्थ स्थानों का पुण्य मिलता है.

भरत मिलाप मंदिर

चित्रकूट जिले में स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसी स्थान पर भरत ने भगवान राम को वनवास से वापस अयोध्या लौटने के लिए मनाने के लिए मुलाकात किया था. कहा जाता है कि भगवान राम के प्रति भरत के प्रेम और चारों भाइयों का मिलन इतना भावुक और मार्मिक दृश्य था कि यहां की चट्टानें और पहाड़ भी पिघल गए. भगवान राम और उनके भाइयों के पदचिन्ह आज भी इन चट्टानों पर देखे जा सकते हैं.

हनुमान धारा

पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हनुमान जी को समर्पित यह प्रसिद्ध मंदिर एक विशाल चट्टान के ऊपर स्थित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार लंका दहन करने के पश्चात हनुमान जी इस मंदिर में भगवान राम के साथ रहे थे. यहां पर भगवान श्रीराम ने हनुमान जी शारीरिक जलन और क्रोध को शांत करने में मदद किया था.

जानकी कुंड

धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह सुंदर घाट चित्रकूट से लगभग 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. ऐसी मान्यता है कि वनवास काल के दौरान माता सीता इसी स्थान पर स्नान किया करती थी.

गुप्त गोदावरी

चित्रकूट से लगभग 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित गुप्त गोदावरी का पौराणिक महत्व है. ऐसी मान्यता है कि रामायण काल में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण वनवास काल के दौरान कुछ समय के लिए इस स्थान पर रहे थे.

सती अनुसूया आश्रम

यह आश्रम ऋषि अत्री के विश्राम स्थल के रूप में विख्यात है. इस स्थान पर अत्रि ऋषि, उनकी धर्मपत्नी अनुसुइया और तीन पुत्रों ने तप किया था. वनवास काल के दौरान भगवान राम और माता सीता अनुसूया के पास गए थे. इसी स्थान पर अनुसूया ने माता सीता को शिक्षाएं दी थी.

राम दर्शन मंदिर

भगवान राम को समर्पित इस अनूठे मंदिर में पूजा-अर्चना करना और प्रसाद चढ़ाना वर्जित है. यह मंदिर श्रद्धालुओं को एकात्म मानववाद की नैतिक शिक्षा देकर भगवान राम के जीवन-चरित्र को समझने में मदद करता है.

स्फटिक शिला

स्फटिक शिला मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित एक छोटा सा शिलाखंड है. ऐसी मान्यता है कि इस चट्टान में भगवान श्री राम के पदचिन्ह अभी भी मौजूद हैं. कहा जाता है कि इस स्थान पर माता सीता ने श्रृंगार किया था. एक दूसरी मान्यता यह है कि इस स्थान पर इंद्र के पुत्र जयंत ने एक कौवे का रूप धारण करके माता सीता के पैर में चोंच मारा था.

सीतापुर

यह धार्मिक स्थल चित्रकूटधाम जिला मुख्यालय कर्वी से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर पयस्वनी नदी के बाएं तट पर स्थित है. कामदनाथ की पवित्र पहाड़ियां यहां से लगभग 2 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित हैं. तीर्थयात्री पहले सीतापुर में पयस्वनी नदी में स्नान करते हैं और फिर कामदनाथ पहाड़ी की परिक्रमा करते हैं. नदी के किनारे 24 सुंदर घाट और कई दर्शनीय मंदिर हैं.

राजापुर

राजापुर, चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन से लगभग 38 किलोमीटर दूरी पर यमुना के किनारे स्थित एक गांव है. इस गांव को श्रीरामचरितमानस और विनय पत्रिका जैसे पवित्र हिंदू धार्मिक ग्रंथों के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के जन्म स्थली होने का गौरव प्राप्त है.

चित्रकूट कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग

चित्रकूट जिले का अपना हवाई अड्डा नहीं है. यहां के लिए डायरेक्ट हवाई सेवा उपलब्ध नहीं हैं. निकटतम हवाई अड्डा: प्रयागराज एयरपोर्ट/इलाहाबाद एयरपोर्ट (Code: IXD). यह हवाई अड्डा चित्रकूट धाम से लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर इलाहाबाद के बमरौली में स्थित है.

रेल मार्ग

चित्रकूट, रेल मार्ग से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तथा देश के विभिन्न हिस्सों से अच्छे से जुड़ा हुआ है.निकटतम रेलवे स्टेशन: चित्रकूटधाम धाम कर्वी रेलवे स्टेशन (Code: CKTD).

सड़क मार्ग

चित्रकूट सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यहां के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध है. आप यहां अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी आ सकते हैं.
नेशनल हाईवे 76 (NH 76) जिले से होकर गुजरती है.

चित्रकूट जिले की कुछ रोचक बातें:

2011 के जनगणना के अनुसार

1. जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में 70वां स्थान है.
2. लिंगानुपात के मामले में उत्तर प्रदेश में 51वां स्थान है.
3. साक्षरता के मामले में उत्तर प्रदेश में 50वां स्थान है.
4. सबसे ज्यादा बसे गांव वाला तहसील: कर्वी (387).
5. सबसे कम बसे गांव वाला तहसील: मऊ (175)
6. जिले में कुल निर्जन गांवों की

 

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