Sarvan Kumar 26/01/2018

फिल्मों को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है

भारत एक विविधताओं से भरा देश है. देश में सभी समुदाय की अपनी-अपनी भावनाएं हैं जो समय समय पर आहात होते रहती हैं. चाहे विश्वरूपम हो ,PK हो , लिस्प्सटिक अंडर बुरका हो या पद्मावत; इन सभी फिल्मों को विरोध झेलना पड़ा है.

लेकिन लेकिन ‘पद्मावत’ की कहानी इनसब से अलग है. सामान्य रूप में किसी फिल्म को लेकर जब
विरोध प्रदर्शन होते हैं, तो सरकारें रोकती हैं और सख्ती से प्रदर्शनकारिओं से निपटा जाता है. साथ ही विपक्षी पार्टी भी उस फिल्म की लिए अपनी एक राय रखते हैं. बुद्धिजीवी अपनी राय रख कर समाज को दिशा देते हैं.

करणी सेना और भंसाली 

करणी सेना का कहना था कि ‘पद्मावती’ में सुलतान खिलजी और रानी पद्मावती के बीच एक स्वप्न प्रेम दृश्य फिल्मांकित किया जा रहा है. साथ ही एक गाने में दीपिका पद्मावती के रूप में भरी सभा में पुरुषों के बीच घूमर नृत्य कर रही हैं जबकि कोई रानी गैर मर्द के सामने नृत्य कर ही नहीं सकती. घूमर गाने के दौरान दीपिका ने जो वस्त्र पहने हैं, उनमें उनका बदन दिख रहा है, जो आपत्तिजनक है. बाद में यह भी खबर आयी की घूमर गाने में बदलाव किये गए हैं.
हलाकि खिलजी-पद्मावती के स्वप्न दृश्य के मामले में तो भंसाली ने अपना विडियो जारी कर साफ कर दिया कि ऐसा तो क्या, खिलजी और पद्मावती के साथ का भी कोई दृश्य फिल्म में नहीं है. अब सुलतान खिलजी और रानी पद्मावती के बीच एक स्वप्न प्रेम दृश्य फिल्मांकित किये गए की नहीं , इसका जबाब भंसाली ही दे सकते हैं. यह भी संभव है की स्वप्न प्रेम दृश्य को विरोध बढ़ने पर हटाया गया हो. यह एक तथ्य है कि चित्तौड़ की रानी पद्मिनी के रूप में पद्मावती को राजस्थान सहित कुछ और स्थानों पर देवी की भांति पूजा जाता है.

सरकार और सत्तापक्ष

राजस्थान,मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तरप्रदेश सरकारों ने विवाद और हिंसा के डर से पद्मावती को बैन करने की घोषणा तभी कर दी थी जब फिल्म सेंसर बोर्ड के पास गई भी नहीं थी. सवाल उठता है सेंसर बोर्ड और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के देखे बगैर ही फिल्म बैन कैसे की जा सकती है? इसमें इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है की नहीं , रानी पद्मावती का अपमान हुआ है की नहीं यह बात फिल्म देखने के बाद कही जाती तो इसका कुछ मतलब भी होता.

राज्य सरकारों का यह गलत कदम ही करणी सेना के लिए वरदान बन गया और करणी सेना के आंदोलन को हवा मिल गई . करणी सेना को पहचान मिलने लगी और इसकी बातें सुनी जाने लगी. एक छोटे से आंदोलन ने उग्र और भयावह रूप लेना शुरू कर दिया.
पद्मावत को लेकर सत्ता पक्ष चाहता चाहता था की की फिम्ल को बैन कर देना चाहिए जिससे राजनितिक नुकसान की स्थिति ही ना पैदा हो. जब सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म को बैन करने से इंकार कर दिया तो सरकार ने बड़े बेमन से कहा की हम फिम्ल को सुरक्षा प्रदान करेंगे.

सरकार को चाहिए था की पद्मावत को शुरू में ही बन करके फ़ज़ीहत मोल लेने के बजाय राजपूत हिन्दू समाज को विश्वास में लेके उन्हें इस बात के लिए राज़ी करें की आप पहले फिल्म देख लें एक बार. अगर फिल्म के कंटेंट में आपत्ति होगी तो आगे का फैसला होगा. पर ऐसा नहीं किया गया.

कांग्रेस और विपक्ष का दोगला रवैया 

विपक्ष का भी रवैया बहोत ही निराशाजनक है. विपक्ष फिम्ल के रिलीज़ होने से पहले ये कहना था की ये कला और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला है , हर हाल में ये फिल्म को रिलीज़ होनी चाहिए. लेकिन जैसे ही फिल्म रिलीज़ हुयी तो विपक्ष की घेराबंदी शुरु हो गयी. विपक्ष के सुर बदलने लगे. एक तरफ जहाँ हिंसक घटनाओं के लिए सरकार की आलोचना की जाने लगी,वहीँ दूसरी तरफ विपक्ष के वरिष्ठ नेता यहाँ तक कहने लगे की ऐसी फ़िल्में नहीं बननी चाहिए जिससे की जाति या धर्म की भावना आहात हो.

विपक्ष एक तरफ सामने से फिल्म के विरोध का समर्थन कर रहा दूसरी तरफ आग में घी डालने का भी काम कर रहा. पद्मावत पर सत्ता हो या विपक्ष – दोनों का रवैये से साफ लगता है कि यह सब वोट बैंक की राजनीति के चलते हो रहा है.

कांग्रेस पद्मावत के जरिए राजपूत वोटों को अपने पाले में लाने की बराबर कोशिश करती रही है.
कांग्रेस पद्मावत के जरिए बीजेपी के लिए एक ओर कुआं, दूसरी ओर खाई वाली स्थिति उत्पन्न करना चाहती है. वो एक तरफ आंदोलनकारी को हवा देकर बीजेपी और केंद्र सरकार पर उन्हें छलने का आरोप लगाना चाहती है तो दूसरी तरफ फिल्मकारों, प्रबुद्ध जन और मध्यवर्ग को अपने पाले में लेना चाहती है.
एक तरफ कांग्रेस कहती है की पद्मावत को रिलीज़ करने का फ़ैसला “कट्टरपंथी” ताक़तों के मुँह पे एक बड़ा “तमाचा” है, जो इस देश को “तालिबान” बनाना चाहती हैं.

कांग्रेस का कहना था सरकार के पास सेंसर बोर्ड है, मीडिया है, सुप्रीम कोर्ट है फिर भी पद्मावत रिलीज़ कैसे हो रही है…तो सरकार क्या राजपूतों को बेवकूफ समझती है?

मतलब साफ है कांग्रेस हिन्दुओं में जातिगत भावना पैदा करके, आंदोलन को हवा देके हिन्दू वोटबैंक में सेंध लगाना चाहती है .

सच बात ये है की पद्मावत मुद्दे पर सत्ता हो, या विपक्ष हो या बुद्धिजीवी – एक विचार पर दृढ़ रहना चाहिए था. बार बार एक मुद्दे पर विचार बदलना दोगलापन दर्शाता है क्योकि दोनों तरफ बोलने वाले को दोगला कहते है.

पहले से ही तय था अगर पद्मावत रिलीज नही होती तो गला फाड़ फाड़ कर “असहिष्णुता” ” अभिव्यक्ति की आजादी” का करना है और अगर हिंसा हुयी तो कानून व्यवस्था के नाम पर सरकार को घेरना है.

अर्थात कोंग्रस एक एक हाथ में मक्खन,एक हाथ में चूना लेकर घूम रही. जिधर जो मौका मिल जाये लगा देना है बस.

तथाकथित बुद्धिजीवियों का वर्ग है जो हर बात में हिन्दुओं का विरोध करते हैं.

इन बुद्धिजीवियों का कहना है की पद्मावत का विरोध करने वाले इतिहास और संस्कृति का ठेकेदार है क्या?
पद्मावत का विरोध करने वाले छद्म जातीय गौरव के नाम पर किसी फिल्म या कलाकृति का विरोध करते हैं, तो कभी लेखकों-कलाकारों का जीना मुहाल कर देते हैं.
पद्मावत का विरोध करने वाले दरअसल इनके जरिए मध्ययुगीन सामंती ताकतें देश में हर तरह की आधुनिकता, प्रगतिशीलता और सृजनशीलता को खारिज करती हैं. अगर भारत को एक विकसित देश बनना है तो उसे संस्कृति के नाम पर फैलाई जाने वाली अराजकता को अस्वीकार करना होगा.

ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवी जबाब दें –
जब छद्म मज़हबी कट्टरता के नाम पर तस्लीमा नसरीन पर फतवा जारी हुआ तो वो कहाँ सो रहे थे?
जब योग को किसी मज़हब में हराम घोषित करके रांची की एक मुस्लिम लड़की को अत्याचार किया गया और उसके घर को जला दिया गया तब ये तथाकथित बुद्धिजीवी मज़हब के ठेकेदारों का विरोध क्यों नहीं करते?
जब विश्वरूपम, लिपस्टिक अंडर बुरका पर बवाल हुआ तो लेखकों-कलाकारों का जीना मुहाल पोन पर आप चुप क्यों रहते हैं?

हिन्दुओं का साफ़ सन्देश-

हिन्दुओं ने पद्मावत पर साफ सन्देश दिया है की का चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी का “जौहर” भारत की अस्मिता,स्त्रियों के सतीत्व ,नारी धर्म , स्वाभिमान और गौरव का प्रतीक है.
फिल्मी लोग हिन्दू धर्म और हिंदुस्तान की सभ्यता के साथ खिलवाड़ करेंगे तो अब उनका देश में विरोध होगा.
जो फिल्मकार हिन्दुओं और हिन्दू धर्म को सॉफ्ट टार्गेट बनाने की कोशिश करेगा उसका विरोध होगा.
इतिहास और हिन्दू भावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा तो विरोध होगा.

आधुनिकता, प्रगतिशीलता, और सृजनशीलता का ठेका केवल हिन्दू ही क्यों लेगा?

 

 

 

 

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