Sarvan Kumar 29/09/2018

भगत सिंह कहा करते थे कि इंसान मरता है विचार नहीं मरते. ये भगत सिंह के विचार ही थे जो उन्हें बांकी क्रांतिकारियों से अलग करते थे. ज़ानिये बालक भगत सिंह के विचार.

मैं खेतों में बंदूकें उपजाऊँगा

शाम का वक्त था. एक बच्चा अपने पिता के साथ घूमने निकला. साथ में एक बुजुर्ग व्यक्ति भी थे जिनसे बच्चे के पिता बात करते हुए आगे बढ़ रहे थे. घूमते- घूमते वे लोग गांव से निकल कर खेतों की तरफ आ गए. बच्चे का पदचाप ना सुनाई देने के कारण पिता ने पीछे मुड़कर देखा तो चौंक गए. बच्चा खेत में बैठकर कोई पौधा लगा रहा था.

पिता ने बच्चे से पूछा- “क्या कर रहे हो?

बच्चे ने भोलेपन से जबाब दिया – ” पिताजी, मैं खेत में बंदूकें उपजाऊँगा !”बच्चे के आखों में एक तेज़ और बातों में दृढ विश्वास था.बच्चे का जबाब सुनकर पिता और बुजुर्ग आश्चर्य चकित रह गए.उस बच्चे का नाम था भगत सिंह और उनकी उम्र थी केवल 3 साल !

कैसे नाम पड़ा “भगत”

भगत सिंह के पिता का नाम था सरदार किशन सिंह. सरदार सिंह के 2 छोटे भाई थे जिनका नाम था – अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह. सरदार किशन सिंह खुद एक क्रांतिकारी थे. उनका परिवार अंग्रेज़ों के खिलाफ आज़ादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था और पूरे इलाके में साहस भरे कार्यों के लिए विख्यात था.

अंग्रेज़ों ने आज़ादी के संघर्ष में भाग लेने के कारण सरदार किशन सिंह और उनके भाइयों अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह को जेल में डाल दिया था.ऐसे प्रतिकूल समय में सरदार किशन सिंह की पत्नी विद्यावती ने 28 सितम्बर , 1907 को एक बच्चे को जन्म दिया. कहते हैं बच्चे के जन्म  से माता, पिता और परिवार का भाग्य बदल जाता है.बच्चे के जन्म के साथ ही सरदार किशन सिंह और उनके भाई अजीत सिंह को अंग्रेज़ों ने जेल से रिहा कर दिया. लोग उस बच्चे को भागों वाला या भाग्यवान कहकर पुकारने लगे. इस कारण ही उस बच्चे का नाम रखा गया-भगत सिंह !

हरदिल अजीज, सभी के दोस्त भगत

भगत सिंह बचपन से ही बहुत पॉपुलर थे.उनकी मुस्कान में एक जादू था. वो सबको प्यारे लगते थे. सब लोग उनके बारे में कहते थे – सरदार किशन सिंह का यह बच्चा एक दिन बहुत नाम कमायेगा और खूब प्रसिद्धि पायेगा. बचपन से ही दिलों को जीतने का हुनर रखते थे. वो सभी को अपना दोस्त बना लेते थे. उनसे बड़ी उम्र के लड़के , गाड़ी वाले, कुली, दर्जी और सफाई करने वाले – सभी लोग उनके मित्र थे.

जब बालक भगत सिंह ने मां से कहा इस गाँव का प्रत्येक व्यक्ति मेरा दोस्त है!

एक बार भगत सिंह के लिए कुछ कपड़े सिलवाये गए. जब कपड़े की सिलाई हो गयी तो बूढ़े टेलर साहब घर आये और कपड़े देकर बिना रुके चले गए.मां ने बालक भगत से पूछा-“वो कौन था जो कपड़े देकर चला गया ?”
बालक भगत सिंह ने सहजता से जबाब दिया-“वो मेरा दोस्त है!”
वो दर्ज़ी बूढ़े थे और भगत अभी भी बालक ही थे. दोनों के उम्र में काफी अंतर था.मां विद्यावती ने अचरज से पूछा- “क्या? वो दर्ज़ी भी तुम्हारा दोस्त है ?”बालक भगत ने जबाब दिया- ” हाँ, इस गाँव का प्रत्येक व्यक्ति मेरा दोस्त है!”

 स्कूल डेज

जब बालक भगत थोड़े बड़े हुए तो दाखिला प्राइमरी स्कूल में कराया गया. कम दिनों में ही बालक भगत अपने शिक्षकों के प्रिय और कृपापात्र छात्र बन गए. इसके  तीन कारण  थे- पढाई-लिखाई में गहरी रूचि होना, मेधावी होना और लिखावट का बहुत सुन्दर होना.स्कूल में अपने सहपाठीयों के बीच लोकप्रिय होने के साथ- साथ बालक भगत अपने से बड़े उम्र के छात्रों के भी प्रिय बन गए. स्कूल के बड़े लड़के बालक भगत को अपने कंधों पर बिठाकर स्कूल ले जाते थे और इसी तरह स्कूल से घर छोड़ देते थे.

चाची मत रोओ , मैं बड़ा होकर अंग्रेज़ों को भगाकर चाचा को वापस लाऊंगा !

भगत सिंह का परिवार क्रांतिकारियों का था . भगत सिंह के पिता और चाचा सब क्रांतिकारी थे. अंग्रेज़ उनके पिता और चाचाओं को जेल में डाल दिया करते थे. जेल का जीवन बहुत ही कष्टदायक था जहाँ कई तरह की यातनायें दीं जाती थीं. एक बार जेल में उनके चाचा स्वर्ण सिंह बीमार पड़ गये और ठीक नहीं हो पाए जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गयी. जेल में अपने पति पर हुए अत्याचारों को याद करके उनकी चाचियां रोने लगती थीं.

यह सब देखकर बालक भगत अपनी चाचियों को दिलासा देते हुए कहते थे- ” चाची मत रोओ. मैं बड़ा होकर अंग्रेज़ों से बदला लूंगा , जिनकी वजह से चाचा बीमार हो गये. मैं अंग्रेज़ों को देश से भगाकर चाचा को वापस ले आऊंगा.”उनकी भोली बातों को सुनकर उनकी चाचियां मुस्कुराने लगतीं थीं और कुछ देर के लिए ही सही अपना दुःख-दर्द भूल जाती थीं.

बड़ा होकर अंग्रेज़ों को देश से खदेड़ दूंगा!

यह बात तब की है जब भगत सिंह चौथी क्लास में पढ़ते थे. उन्होंने अपने सहपाठियों से पुछा-” बताओ, बड़े होकर तुमलोग क्या बनना चाहते हो?”बच्चों ने अपने -अपने तरह से अलग-अलग जबाब दिया. किसी ने कहा -“मैं डॉक्टर बनूँगा, मैं इंजीनियर बनूँगा, मैं वकील बनूँगा , मैं सरकारी अफसर बनूँगा.”
एक बच्चा बोला- ” मैं बड़ा होकर शादी करूँगा!”
इस पर चौथी कक्षा में में पढ़ने वाले बालक भगत सिंह ने कहा,- ” शादी करना भी कोई सफलता है क्या? शादी तो कोई भी कर सकता है. मैं बड़ा होकर अंग्रेज़ों को देश से खदेड़ दूंगा! “

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