Sarvan Kumar 09/02/2018

 

संसद में रेणुका चौधरी की हंसी और अपने ही जाल में उलझ गयी कांग्रेस . बुधवार को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के दौरान कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी के हंसने पर जो प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री ने दी उस पर राजनीति गर्माने लगी है. यह मामला अब तूल पकड़ने लगा है. कांग्रेस इस मुद्दे पर बीजेपी और प्रधान मंत्री को घेरने की कोशिस कर रही है.

आखिर मामला क्या है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में अपने भाषण के दौरान आधार पर बयान दे रहे थे. इसी दौरान कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगीं. अगर आपने उस वीडियो को देखा होगा तो आप खुद ही समझ जायेंगे की कितने विनम्र है वो लोग जो रेणुका चौधरी की उस “हंसी” को “हंसी” कह रहे हैं!
खैर, पीएम मोदी राज्यसभा में अपना संबोधन दे रहे थे. कुछ ख़बरों की माने तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के कहने पर यह रणनीति बनायीं गयी की प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान नारेबाजी करनी है. मैंने अपना टीवी सेट ज़रा देर से खोला था. राज्यसभा में काफी शोर था. कांग्रेस और विपक्ष के नारो के बीच मोदी अपनी बात रख रहे थे. बात सिर्फ नारों की होती तो और बात थी, विपक्ष की तरफ से तरह-तरह की आवाज़ें निकाली जा रही थी, जो संसद की मर्यादा के हिसाब से कहीं से ठीक नहीं था. खैर लोकतंत्र है, सभी को विरोध करने का अधिकार है!

पीएम मोदी राज्यसभा में अपना संबोधन के दौरान एक ऐसा समय आया जब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता
रेणुका चौधरी ने किसी बात को लेकर जोर-ज़ोर से हसने लगी. ये हंसी इतनी अजीब थी की इस पर राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडु को रेणुका चौधरी से कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए. “आपको क्या हो गया है, अगर आपको समस्या है तो डॉक्टर के पास जाइए.”
सभापति एम वेंकैया नायडू ने कांग्रेस नेताओं से कहा कि रेणुका को इस तरह का व्यवहार नहीं करने के लिए कहा जाए अन्यथा वह उन पर कार्रवाई करेंगे.
इस पर प्रधानमंत्री ने कहा ‘‘रेणुका जी को कुछ मत कहिए क्योंकि रामायण धारावाहिक समाप्त होने के
वेंकैया नायडु रेणुका चौधरी को बीच में टोक ही रहे थे कि मुस्कुराते हुए मोदी बोले, “सभापति जी रेणुका जी को आप कुछ मत कहिए रामायण सीरियल के बाद ऐसी हंसी सुनने का आज सौभाग्य मिला है.”

मोदी का इतना कहना था कि पूरा माहौल ही बदल गया. कांग्रेस शांत होने लगी और उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया कि अब क्या करें.
बाद में रेणुका चौधरी ने पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी मुझ पर व्यक्तिगत टिप्पणी की है, आप उनसे और क्या अपेक्षा कर सकते हैं? मैं उन्हें जवाद देकर अपना स्तर नहीं गिराना चाहती. यह वास्तव में किसी महिला के अपमान वाली स्थिति है.
जानकारी के मुताबिक, बाद में राहुल गाँधी ने कहा कि इस घटना को नारी सम्मान से जोड़कर बीजेपी और मोदी को घेरा जाये.

प्रतिक्रियाएं-

मामला सामने आते ही तरह-तरह कि प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गयीं.
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने प्रधानमंत्री के भाषण का हिस्सा ट्वीट कर लोगों से पूछा कि आपको किस किरदार की याद आई.लोगों ने तारका और शूर्पणखा का नाम लेना शुरू कर दिया!

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मैं वहीं थी. प्रधानमंत्री पर जो अशोभनीय टिप्पणियां वो कर रहीं थीं, मैंने सुनीं.”
“क्या उनकी अशोभनीय टिप्पणियां स्वीकार्य हैं? और जब उन पर प्रधानमंत्री ने व्यंग्यात्मक जवाब दिया तो वो अपने जेंडर को अपना कवच बना रही हैं.”

भाजपा सांसद परेश रावल ने ट्विटर पर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीखे व्यंग्य से संसद में रेणुका चौधरी को किस तरह ध्वस्त किया ये देखना न भूलें. राज्यसभा टीवी देखें

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद रेणुका चौधरी की हंसी को रामायण के चर्चित किरदारों से जोड़ा जा रहा है.केंद्र सरकार में राज्यमंत्री किरण रिजीजू ने फ़ेसबुक पर एक वीडियो शेयर कर रेणुका चौधरी की हंसी की तुलना रामायण के किरदार शूर्पणखा से की है.

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री के कॉमेंट की आलोचना की.
संजय सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री जी ने रेणुका चौधरी जी की हंसी की तुलना रावण से की, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है की देश के सर्वोच्च सदन में हमारे प्रधान सेवक एक महिला पर ऐसी टिप्पणी करते हैं.”

प्रधानंत्री की टिप्पणी पर गुरुवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ. विपक्ष ने प्रधानमंत्री से माफी की मांग की है. कांग्रेस के अधिकारिक अकाउंट से लिखा गया, “हम राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडु से अपील करते हैं को वो पक्षपात न करें और संसद के सदस्यों के प्रति सम्मान रखें.”

लेकिन सच बोलने कि हिम्मत सिर्फ तहसीन पूनावाला कर पाए. कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने ट्वीट किया, “एक सच्चे कांग्रेस हितैषी के तौर पर ईमानदारी से कहूं तो रणुका चौधरी और मणिशंकर अय्यर जैसे नेता पार्टी के लिए बोझ बन गए हैं. उनके दंभ की क़ीमत कांग्रेस को चुकानी पड़ती है. ये गांधी और नेहरू जैसे महान नेताओं की पार्टी है. संसद के उच्च सदन में गूंजी उस हंसी ने मेरे शरीर में ऐंठन पैदा कर दी.”

सोशल जजमेंट

सोशल मीडिया पर आये प्रतिक्रियाओं कि अगर बात करें तो लोग इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहे. लोगों का मानना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को जितना उछालने कि कोशिश करेगी उसकी उतनी ही फ़ज़ीहत होगी. इस मुद्दे को उछालने से कांग्रेस का अशिष्ट व्यवहार जनता के सामने और बेनकाब होगा. अतः कांग्रेस को इस मुद्दे को एक हास्य- व्यंग्य के तौर पे लेना चाहिए; इसे निजी टिप्पणी और महिलाओं की सामाजिक स्थिति की निंदा है कि दृष्टि से नहीं देखना चाहिए.

आइये अब बात करते हैं रेणुका चौधरी के शिष्टाचार और नारी सम्मान के प्रति सोच की

शिष्टाचार की बात-

शिष्टाचार की दुहाई देने वाली रेणुका चौधरी का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमे वो प्रधानमंत्री मोदी के लिए बोल रहीं हैं’ “तेरा (मोदी) कभी दामाद हो तो दुसरों के दामाद (सोनिया गाँधी के दामाद) के बारे में बात करे. तुमको क्या मालूम परिवार के साथ कैसे रहना क्या करना?”
इससे आपको पता ही चल गया होगा की रेणुका चौधरी ने सार्वजनिक जीवन में शिष्टाचार के
कितने ऊँचे मानक स्थापित किये हैं !

बलात्कार पर असंवेदनशील राय-
रेणुका चौधरी ने बलात्कार पीड़ित महिलाओं का मजाक उड़ाते हुए कहा की, बलात्कार हो गया तो क्या हुआ, बलात्कार तो चलते रहते है, ये कौन सी बड़ी चीज है!
इससे रेणुका चौधरी के नारी सम्मान और शसक्तीकरण पर क्या विचार हैं, आप समझ सकते हैं.

मानव मूल्य-
शिष्टाचार और नारी सम्मान के बाद अब बात करते है रेणुका चौधरी के मानव मूल्यों की
रेणुका चौधरी रेस्टोरेंट में खाने जाती हैं. अपने डोमेस्टिक हेल्प को भी साथ लेकर जाती हैं. वो अपने डोमेस्टिक हेल्प को रेस्त्रां में टेबल के सामने खड़ा कर देती है. वो बस खाना देके, उसकी सुगंध ले, उसे बैठने तक नहीं देती, ये तो इनका महिला शसक्तीकरण है.
इससे पता चलता है की रेणुका चौधरी कितनी दरियादिल हैं ! महिला सशक्तिकरण और मानव मूल्यों के लिए कितनी समर्पित हैं!

मुद्दे की बात

आज जनता बहोत समझदार हो गयी है. जनता के पास जानकारी हासिल करने का अधिकार भी है और स्रोत भी मौजूद हैं. जनता अब खुद हर मुद्दे की जाँच करती है. जनता बातों को रिकॉर्ड करती है और सोशल मीडिया के इस नए दौड़ में किसी भी आइना दिखाने का ताक़त रखती है. इसलिए जनप्रतिनिधियो को समझना होगा की वो अपने व्यवहार में परिवर्तन लाएं और ज़िम्मेदारी से पेश आएं.
निदा फ़ाज़ली का एक शेर याद गयी जो हमारे नेताओं और जनप्रतिनिधियो को समर्पित है-
अपना चेहरा ना बदला गया , आईने से खफा हो गए !!

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