Ranjeet Bhartiya 02/12/2021
नहीं रहे सबके प्यारे ‘गजोधर भैया’। राजू श्रीवास्तव ने 58 की उम्र में ली अंतिम सांस। राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से वो 41 दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। उनकी आत्मा को शांति मिले, मुझे विश्वास है कि भगवान ने उसे इस धरती पर रहते हुए जो भी अच्छा काम किया है, उसके लिए खुले हाथों से स्वीकार करेंगे #RajuSrivastav #IndianComedian #Delhi #AIMS Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 13/01/2022 by Sarvan Kumar

बेलदार (Beldar) समाज का इतिहास : बेलदार (Beldar) भारत में पाई जाने वाली एक जाति है. ऐतिहासिक रूप से यह एक खानाबदोश जाति है.पारंपरिक रूप से यह उत्तरी भारत के मूल निवासी हैं, लेकिन अब यह देश के विभिन्न भागों में निवास कर रहे हैं. यह ओड समुदायों के समान है, जो पश्चिमी भारत के मूल निवासी हैं. यह केवट समुदाय के साथ एक वंश का अपने का दावा भी करते हैं, इस तरह से खुद खुद को ओड कहते हैं. यह समुदाय पूरी तरह से भूमिहीन है. पारंपरिक रूप से यह राजमिस्त्री का काम करते हैं. जीवन यापन के लिए यह फल और सब्जी बेचने तथा ईट भट्ठों में भी काम करते हैं. उत्तर प्रदेश में यह अभी भी मुख्य रूप से अपने राजमिस्त्री का काम करते हैं और निर्माण उद्योग (Construction Industry) में कार्यरत हैं. महाराष्ट्र में यह राजमिस्त्री के साथ-साथ काफी संख्या में ईट भट्ठों में ईट बनाने का कार्य करते हैं. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में इन्हें अनुसूचित जाति (Scheduled Caste, SC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. मूल रूप से यह उत्तरी भारत के निवासी हैं. यह उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में निवास करते हैं. यह पूरे उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं. 2011 की जनगणना में, उत्तर प्रदेश में इनकी कुल जनसंख्या 1,89,614 दर्ज की गई थी. महाराष्ट्र में यह मुख्य रूप से औरंगाबाद, नासिक, भीड, पुणे, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, अहमदनगर, सोलापुर, कोल्हापुर, सांगली, सतारा, रत्नागिरी और मुंबई जिलों में पाए जाते हैं. बेलदार समुदाय के लोग यह दावा करते हैं कि लगभग 5 शताब्दी पहले वह राजस्थान से आकर महाराष्ट्र में बस गए. बेलदार समाज अनेक कुलो में विभाजित है, जिनमें प्रमुख हैं-खरोला, गोराला, चपुला, छपावर, जेलवार, जाजुरे, नरौरा, तुसे, दवावर, पन्नेवार, फातारा, महोर, बसनीवार, बहर होरवार और उदयनवार. यह हिंदी, मराठी और बेलदारी भाषा बोलते हैं. आपस में यह बेलदारी भाषा बोलते हैं, जबकि बाहरी लोगों के साथ मराठी और हिंदी भाषा बोलते हैं.

 

 

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