Ranjeet Bhartiya 19/03/2020

बिहार के मोतिहारी में आयोजित  NPR, CAA और NRC  के खिलाफ संविधान बचाओ संघर्ष समिति द्वारा आयोजित अनिश्चितकालीन धरने के 56वें दिन पर जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और RLSP सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार पर जमकर निशाना साधा.

जनसभा को संबोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा CAA, NRC और NPR जैसे मुद्दों को जानबूझकर लाकर देश की स्थिति खराब की जा रही है. हमें मिलकर इस संकट से देश को उबारने का काम करना है.
शिक्षा का मुद्दा उठाते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हमने शिक्षा के लिए आंदोलन करने का काम किया है. चाहे प्रदेश की नीतीश कुमार सरकार हो या केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इन लोगों का काम था गरीब बच्चों के लिए शिक्षा, नौजवानों के लिए रोजगार और गरीब लोगों के लिए इलाज का इंतजाम करना. लेकिन दोनों सरकारों ने ना शिक्षा देने का काम किया, ना युवाओं को रोजगार देने का काम किया और ना हीं गरीबों के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था ही ठीक किया. इसीलिए उन्होंने जानबूझकर CAA, NRC और NPR जैसे मुद्दों को उछाला है जिसमें उलझ कर जनता शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे असली मुद्दों को भूल जाए.

बिहार सरकार पर हमलावर होते हुए कुशवाहा ने कहा कि हमारे आदरणीय भाई नीतीश कुमार ने 15 साल बिहार पर राज किया. लेकिन इन 15 सालों में गांव के स्कूलों की जो दुर्दशा है वह हम सबको मालूम है. अस्पतालों में डॉक्टर नहीं है स्कूलों में टीचर नहीं है और किसान भी परेशान हैं.

उन्होंने नीतीश कुमार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जब वह वोट के लिए जनता के बीच जाएंगे तो जनता उनसे पूछेगी कि आपने हमारे बच्चों और नौजवानों के लिए क्या किया. उनके पास कोई जवाब नहीं होगा. उन्हें भी पता है जब वह जनता को जवाब नहीं देंगे तो जनता उनका हिसाब-किताब ठीक कर देगी . जनता को जवाब देने से बचने के लिए नीतीश बीजेपी के साथ चले गए हैं. बीजेपी बिना कुछ किए हुए ऐसे मुद्दों पर वोट लेने में माहिर हैं जिसके सहारे नीतीश चुनावी वैतरणी पार करना चाहते हैं. कुशवाहा ने उपस्थित जनसमूह को से आग्रह किया कि आप भारतीय जनता पार्टी और नीतीश कुमार के मंसूबों को सफल नहीं होने दें नहीं तो जो दुर्दशा हो रही है वहीं जारी रहेगी.

बिहार के आंदोलनकारी शिक्षकों को समर्थन

बिहार के आंदोलनकारी शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए कुशवाहा ने कहा कि किसी शिक्षक को 6000 और किसी को 56000 दिया जा रहा यह ठीक नहीं है. शिक्षकों की समान काम के लिए समान वेतन की मांग बिल्कुल जायज है जिसका हम समर्थन करते हैं. उन्होंने आंदोलनकारी शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि अगर आप अभी इस सरकार से कोई उम्मीद लगाए बैठे हैं तो यह उम्मीद छोड़ दीजिए. आने वाले दिनों में जब हमारी सरकार बनेगी तो आपकी समस्या का निदान किया जाएगा.

केंद्र और राज्य सरकार पर आक्रमक होते हुए कुशवाहा ने कहा कि दोनों सरकारें हर वह काम कर रही है जो उन्हें नहीं करना चाहिए. उनकी मंशा लोगों को उलझा कर रखने की है. अब हमें उनसे निजात पाने का काम करना है. दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की जीत का हवाला देते हुए कुशवाहा ने कहा कि दिल्ली के लोगों ने संदेश दे दिया है कि अनर्गल बात करके और केवल भावनात्मक मुद्दों को उछाल करके नहीं रहा जा सकता. जिनको भी सरकार में रहना है जनता का काम करना पड़ेगा. सरकार में रहने वालों को शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार का इंतजाम करना पड़ेगा. बिहार से भी इसी तरह के संदेश देने की जरूरत है.

CAA, NRC और NPR असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बीजेपी की साजिश

CAA के विरोध में कार्यक्रम आयोजित करने वाले आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कुशवाहा ने कहा कि मेरा आप सब से आग्रह किया कि CAA, NRC और NPR के खिलाफ चल रहे आंदोलन को विस्तार देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि CAA, NRC और NPR बीजेपी की साजिश है जिसमें वह जनता को उलझा कर रखना चाहती ताकि उनसे कोई शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार के लिए सवाल ना पूछे. हमें जोरदार तरीके से कहना चाहिए CAA नहीं गरीब बच्चों के लिए शिक्षा चाहिए, NRC नहीं नौजवानों के लिए रोजगार चाहिए तथा NPR नहीं गरीब लोगों के लिए अच्छा स्वास्थ्य सुविधा चाहिए.

लोगों से NPR के दौरान कागजात न दिखाने की अपील

कुशवाहा ने NPR पर बात रखते हुए कहा कि हमें नहीं पता कि बिहार के नीतीश सरकार एनपीआर वापस लेंगे की नहीं. लेकिन हम आपसे कहना चाहते हैं कि कोई आपको एनपीआर के तहत जानकारी लेने आए तो आपको जानकारी देने की जरूरत नहीं है. कोई कागज दिखाने के लिए कहेगा तो हमने फैसला लिया है कागज नहीं दिखाएंगे. हम सब मिलकर के आगे बढ़ेंगे. जब आप कागज नहीं दिखाएंगे तो उपेंद्र कुशवाहा भी कागज नहीं दिखाएगा. आप जानकारी नहीं दीजिएगा तो हम भी जानकारी नहीं देंगे. CAA और NRC के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म विशेष की लड़ाई नहीं है. यह देश बचाने की लड़ाई है. इस लड़ाई में हम सब साथ हैं.

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