Religion

Ranjeet Bhartiya 08/09/2022

कहावतें या लोकोक्तियां विश्व की हर भाषा में पाईं जाती हैं. इनके प्रयोग से भाषा में संजीवता और स्फूर्ति आती है, इसीलिए इन्हें “भाषा का श्रृंगार” कहा जाता है. कहावतों और लोकोक्तियों का रूढ़ अर्थ होता है. कहावतें प्रायः सांकेतिक रूप में होती हैं‌ और बेहद कम शब्दों में जीवन के दीर्घकाल के अनुभव को […]

Ranjeet Bhartiya 07/09/2022

हिन्दू वर्ण व्यवस्था के अनुसार भारतीय समाज को कार्यात्मक रूप से चार वर्णों में विभाजित किया गया है-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र. वर्ण व्यवस्था के पदानुक्रम में वैश्यों (बनिया) को तीसरे स्थान पर रखा गया है और इनके व्यवसाय में मुख्य रूप से कृषि, मवेशियों की देखभाल, व्यापार और अन्य व्यवसाय शामिल हैं. वैश्य वर्ण […]

Ranjeet Bhartiya 07/09/2022

जयसवाल (Jaiswal) एक उपनाम (surname) है जो कलवार, जैन और राजपूत सहित कई हिंदू समुदायों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यहां हम जायसवाल बनिया जाति के बारे में बात कर रहे हैं. जायसवाल बनिया एक हिंदू समुदाय है जो पूरे भारत में पाया जाता है. जायसवाल कलवार जाति से संबंधित हैं, जोकि पिछड़ी जाति […]

Ranjeet Bhartiya 05/09/2022

बनिया समुदाय अनेक उपजातियों/उपवर्गों में विभाजित है. इन सभी उप जातियों में आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीति में भागीदारी आदि पहलुओं पर भिन्नता देखी गई है. यहां एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि बनिया किस कैटेगरी में आते हैं. तो आइए जानते हैं. बनिया किस कैटेगरी में आते हैं आरक्षण एक प्रकार की व्यवस्था है […]

Ranjeet Bhartiya 04/09/2022

“बनिया” शब्द का एक लाक्षणिक अर्थ होता है- “स्वार्थी व्यक्ति”. तो क्या सच में वैश्य/बनिया समुदाय के लोग स्वार्थी होते हैं? आइए विस्तार से जानते हैं. क्या बनिया स्वार्थी होते हैं? इस आर्टिकल के मूल विषय को समझने के लिए हमें दो बातों के बारे में विस्तार से जानना होगा- शब्दों के लाक्षणिक अर्थ तथा […]