Sarvan Kumar 01/07/2018

MADSAUR RAPE: RAPE OF JOURNALISM BY JOURNALISTS

मध्यप्रदेश के मंदसौर से हैवानियत की हदें पार कर देनेवाला रेप का मामला सामने आया है. मानवता को शर्मसार कर देनेवाले इस रेपकांड की शिकार हुयी है सात साल की मासूम की मासूम बच्ची. तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली इस बच्ची के साथ इरफ़ान और आसिफ नाम के दो दरिंदों ने न केवल बलात्कार किया , बल्कि जान से मारने के इरादे से बच्ची के गुप्तांग में लोहे का छड़ डाल दिया. हवस के अंधे इन दानवों ने बच्ची को दांतों से जगह-जगह काटा और चेहरे पर गंभीर जख्म कर दिए.आरोपी आसिफ ने कबूल किया है कि इरफ़ान और उसने बच्ची को लड्डू खिलाने का लालच देकर सुनसान जगह पर ले जाकर दोनों ने मिलकर बच्ची के साथ बलात्कार किया.

जानकारी के मुताबिक पीड़ित बच्ची मंदसौर के एक प्राइवेट स्कूल की कक्षा तीसरी की बच्ची मंगलवार (26 जून 2018) शाम से लापता थी. काफी खोजबीन करने पर भी जब बच्ची नहीं मिली तो रात को कोतवाली पुलिस को खबर की गई. अगले सुबह साढ़े 11 बजे बच्ची को एक नाले के पास झाड़ियों से बाहर निकलते देखा गया. बच्ची के शरीर पर कई घाव थे और वो लहूलुहान थी. गहरे ज़ख़्म होने के कारण बच्ची वह ठीक से चल नहीं पा रही थी. पुलिस ने बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन गंभीर और गहरे ज़ख़्म होने के कारण बच्ची को इंदौर के सरकारी एमवाई अस्पताल रेफर कर दिया गया.

बच्ची की हालत गंभीर: “मां मुझे ठीक कर दो या मार डालो”
पीड़ित बच्ची की हालत गंभी बनी हुयी है. डॉक्टर्स ने उसके कई ऑपरेशन किये हैं. मासूम बच्ची अपने साथ हुए दरिंदगी से सहमी हुयी है. जब भी कोई उसे इंजेक्शन लगाने या छूने जाता हैं बच्ची डर जाती है. बच्ची इतने दर्द में है की उसके शब्द सुनकर किसी का भी दिल भर जायेगा. बच्ची अपने मां से बारबार कह रही, “मां मुझे ठीक कर दो या मार डालो”

दिखा नेताओं का असंवेदनशील चेहरा –

मंदसौर के बीजेपी सांसद सुधीर गुप्ता अस्पताल में पीड़ित बच्ची का हाल जानने पहुंचे.अस्पताल में सांसद साहब को बीजेपी भाजपा विधायक सुदर्शन गुप्ता के साथ हंसी मजाक करते देखा गया. असंवेदनशीलता की हद तो तब हो गयी जब विधायक सुदर्शन गुप्ता के बच्ची के माता-पिता से कहा, “सांसद जी आपसे मिलने आए हैं, इनका धन्यवाद करो”

वही रेप पीड़िता बच्ची के दर्द को भूलकर कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया ने कहा कि भाजपा इस कांड को सांप्रदायिक रंग दे रही है.

मंदसौर रेप कांड ने फिर से खड़ा कर दिया है मीडिया और तथाकथित बुद्धिजीवियों पर सवाल-
१. मासूम बच्ची के साथ 26 जून की हुआ बलात्कार लेकिन 27 जून तक मीडिया सोता रहा. 28 जून को सोशल मीडिया पर जब ये मामला वायरल हुआ तो मीडिया जागा.
२. जब मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा तो फिर नेताओं और पत्रकारों का ज़मीर जागा . या यूँ कहें की लीपापोती शुरु आत हुयी. लगे हाँथ राहुल गाँधी ने भी एक ट्वीट करके अपना पल्ला झाड़ लिया. लेकिन कांग्रेस के नेता पुराणी घिसी पिटी बातें बोलते रहे की बीजेपी इस मामले को सांप्रदायिक रंग दे रही.
३. पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने फिर अपना दोगलापन दिखाया और कहा बलात्कारियों का कोई धर्म नहीं होता मंदसौर को लेकर अजेंडा चलाया जा रही है. राजदीप सरदेसाई वही पत्रकार हैं जिन्होंने
कठुवा मामले को हिन्दू और मंदिर से जोड़कर अजेंडा चलाया था. सही है रेप का कोई धर्म नहीं होता पर मंदसौर और कठुआ मामले में इन पत्रकारों का रवैया एक सा क्यों नहीं है?
४. अगर रेप इरफ़ान और आसिफ करेगा तो लोग कैसे कह दें की रेप रमेश और सुरेश ने किया. लेकिन अगर ये सच बोल देंगे की बलात्कार इरफ़ान और आसिफ तो आपको कम्युनल घोषित कर दिया जायेगा.
५. कठुआ कांड पर शर्मिंदा होने वाले मंदसौर पर जुबान पर ताला लगा के क्यों बैठे हैं? आक्रोश में भी भेदभाव है. बॉलवुड में अब तक कोई तख्ती नहीं लटका रहा, ना विदेशी अख़बार में भारत को बदनाम करने वाले लेख लिखे जा रहे. आँखों में खून लेकर कठुआ कांड पर रोने वाले मंदसौर की बच्ची पर चुप क्यों हैं? बच्चियों में भी भेदभाव का दोहरा मापदंड सिर्फ सेक्युलर ही कर सकते हैं.

दोहरे मापदंड वाले ये पत्रकार स्टूडियो में बैठ कर समाचार सुनाने का नैतिक हक़ खो चुके हैं. देश की जनता को ऐसे मिडिया हाउस और पत्रकारों से सावधान रहने की ज़रूरत है.

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