Sarvan Kumar 04/05/2020
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Last Updated on 04/05/2020 by Sarvan Kumar

3 मई (रविवार) को सेना के तीनों अंगों ने कोरोना के खिलाफ दिन-रात युद्ध लड़ रहे डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों, सफाईकर्मियों तथा अग्रिम पंक्ति में लग रहे हैं अन्य कोरोना योद्धाओं के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए पुष्प वर्षा कर के सलामी दी. भारतीय थल सेना, वायु सेना तथा नौसेना ने अपने-अपने तरीके से विभिन्न आयोजनों के द्वारा कोरोना योद्धाओं को के प्रति आभार व्यक्त किया. कहीं फ्लाईपास्ट तो कहीं कोरोना हॉस्पिटल पर पुष्प वर्षा की गई. कहीं युद्ध पोतों को रोशन कर के तो कहीं सेना के बैंड ने विशेष धुन बजाकर कोरोना योद्धाओं तथा अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को सम्मान दिया.

ऐसा इसलिए किया गया ताकि कोरोनावायरस लड़ रहे अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं का मनोबल बढ़ाया जा सके तथा उन्हें इस बात का एहसास कराया जा सके कोरोना के खिलाफ देश की इस लड़ाई में वह अकेले नहीं हैं बल्कि पूरा देश उनके साथ है. जहां देश को एक स्वर में कोरोना योद्धाओं की हौसला अफजाई करनी चाहिए वहीं यहां पर भी विरोध के स्वर सुनाई देने लगे. देश के तथाकथित बुद्धिजीवियों और पत्रकारों ने कोरोना योद्धाओं पर पुष्प वर्षा को नकलचीपन करार दे दिया और यह कहने लगे कि एक तरफ देश जहां कोरोनावायरस में फंसा है वही प्रधानमंत्री लोगों से तालियां और तालियां बजा रहे हैं तथा सेना द्वारा पुष्प वर्षा की नौटंकी पर करोड़ों रुपए बर्बाद करने पर उतारू हैं. भारतीय सेना अब कश्मीर से कन्याकुमारी तथा कटक से भुज तक पुष्प वर्षा करेगी और विराट नौटंकी का हिस्सा बनेगी. क्या सेना का यही काम है? यह भारत में इसीलिए करवाया जा रहा है क्योंकि यही डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में करवा रहे हैं.

दिलचस्प बात यह है कि कोरोना योद्धाओं पर पुष्प वर्षा वर्षा का विरोध करने वाले वही लोग हैं जिन्होंने रामायण के प्रसारण पर भी आपत्ती जताया था. एक व्यक्ति के अंध विरोध में ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवी और पत्रकार इतने अंधे हो चुके हैं कि वह यह भूल गए हैं कि कोरोना को हराने के लिए यह अत्यंत जरूरी है इस जानलेवा वायरस से लड़ रहे कोरोनो योद्धाओं का मनोबल बना रहे. हमारे स्वास्थ्यकर्मी प्रतिकूल परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं. अगर उन पर पुष्प वर्षा करने से उन्हें यह अहसास होता है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरा देश उनके साथ खड़ा है तो उन पर पुष्प वर्षा में परेशानी क्या है? यही बात थाली पीटने पर लागू होती है. अगर थाली पीटने से सारा देश कोरोना से लड़ने के लिए एकजुट होता है तो यह सौदा बहुत सस्ता है.

यह वही पत्रकार हैं जिन्होंने रामायण के प्रसारण का विरोध किया था तथा कहा था कि रामायण के प्रसारण में क्या होना रुक जाएगा जाएगा. इसका मुंहतोड़ जवाब दर्शकों ने इस धारावाहिक को फिर से प्यार देकर करके दिया तथा टीआरपी के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ कर दे दिया है. पूरी दुनिया में 16 अप्रैल को 7.7 करोड़ लेने लोगों ने रामायण देखकर इसे दुनिया का सबसे ज्यादा देखा जाना जाने वाला शो बना दिया. यह इस बात को दर्शाता है कि लॉक डाउन के दौरान लोगों को अपने अपने घरों में रखने में रामायण मददगार साबित हुई है. साथ हीं कोरोना संकट के दौरान रामायण देखने से लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा भी मिली जिससे वह कोरोनावायरस लड़ाई लड़ने के लिए खुद को तैयार किए.

पत्थरबाजों से सहानुभूति रखने वाले तर्क देते हुए कहते हैं कि फूल बरसाने से पेट नहीं भरता, सेना रोटी बरसा देती तो अच्छा था. ऐसे लोग भूल जाते हैं हैं कि देश में जब कभी बाढ़ या कोई अन्य प्रकृति आपदा आती है सेना राहत सामग्री भी बरसाती है.

दरअसल सेना द्वारा कोरोना योद्धाओं पर पुष्प वर्षा को फिजूलखर्ची या नौटंकी बताने वाले चाहते हैं कि भारत कोरोनावायरस से जंग हार जाए. यह वही लोग हैं जो देश में स्वास्थ्यकर्मियों, डॉक्टरों तथा पुलिस पर जब भी हमला होता है, उन पर पत्थरबाजी होती है, मुंह में दही जमा कर मौन समर्थन देते हैं. सच बात यही है स्वास्थ्यकर्मियों पर पत्थर वर्षा करने वालों की तरफदारी करने वाले कोरोना योद्धाओं पर पुष्प वर्षा को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे.

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