Ranjeet Bhartiya 16/01/2022
मां के बिना जिंदगी वीरान होती है, तन्हा सफर में हर राह सुनसान होती है, जिंदगी में मां का होना जरूरी है, मां की दुआ से ही हर मुश्किल आसान होती है. Happy Mothers Day 2022 Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 16/01/2022 by Sarvan Kumar

गोलघर (Golghar or Gol Ghar) बिहार की राजधानी पटना में, गांधी मैदान (Gandhi Maidan) के पश्चिम में स्थित, एक ऐतिहासिक और विशाल अन्न भंडार (granary) है. यह पटना का एक ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन स्थल है. वर्ष 1979 में अंग्रेजों द्वारा निर्मित इस ऐतिहासिक स्थल को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था. आइए जानते हैं पटना में गोलघर का निर्माण किस उद्देश्य से हुआ था? गोलघर का निर्माण किस गवर्नर जनरल के समय में हुआ था?

Who made Golghar and Why?

1770 में आई भयानक सूखे के दौरान लगभग एक करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हुए थे. 1770 के अकाल के भयानक प्रभाव के बाद, इससे निबटने के लिए बड़े पैमाने पर अन्न भंडारण के उद्देश्य से गोलघर निर्माण किया गया था. तब के गवर्नर जनरल (Governor General) वारेन हेस्टिंग (Warren Hastings) ने गोलघर के निर्माण की योजना बनाई थी. वारेन हेस्टिंग के आदेश पर ब्रिटिश इंजिनियर कैप्टन जॉन गार्स्टिन (Captain John Garstin)  ने (ब्रिटिश सेना के लिए) अनाज भंडारण के लिए इस  इस गोल ढाँचे का निर्माण 20 जनवरी 1784 को शुरु करवाया था. इसके निर्माण कार्य में ढाई साल लगा और यह 20 जुलाई 1786 में पूरा बनकर तैयार हो गया

गोलघर की ऊंचाई कितनी है?

इस विशाल अन्न भंडार में एक साथ 1,40,000 टन अनाज रखने की क्षमता है. इस ऐतिहासिक इमारत के निर्माण में स्तंभ (pillar) का प्रयोग नहीं किया गया है. स्तंभ रहित इस इमारत का आकार 125 मीटर और ऊँचाई 29 मीटर है. इसकी दीवारें आधार में 3.6 मीटर मोटी हैं, जो इसे मजबूती प्रदान करती है.  गोलघर के शिखर पर, लगभग तीन मीटर तक, ईटों के स्थान पर पत्थरों का प्रयोग किया गया है. शीर्ष पर 2.7 फीट व्यास का छिद्र है जिसके माध्यम से इसके अंदर अनाज डाला जाता था. गोलघर के शीर्ष पर इसके चारों ओर बने घुमावदार सर्पिल सीढ़ी (spiral staircase) के 145 चरणों के माध्यम से चढ़ सकता है. सर्पिल सीढ़ी को उन श्रमिकों के मार्ग की सुविधा के लिए डिज़ाइन किया गया था जो शीर्ष पर एक छेद के माध्यम से इसमें अनाज डालते थे, और दूसरी ओर से नीचे उतरते थे. गोलघर की चोटी से पटना शहर का एक बड़ा हिस्सा देखा जा सकता है. यहां से बगल में बहती गंगा नदी का विहंगम दृश्य भी दिखाई देता है.

Featured Image : Wikimedia Commons कवि कलाकार हिमांशु मान्ने / CC BY-SA 4.0 license ]

Advertisement
Disclaimer: Is content में दी गई जानकारी Internet sources, Digital News papers, Books और विभिन्न धर्म ग्रंथो के आधार पर ली गई है. Content  को अपने बुद्धी विवेक से समझे। jankaritoday.com, content में लिखी सत्यता को प्रमाणित नही करता। अगर आपको कोई आपत्ति है तो हमें लिखें , ताकि हम सुधार कर सके। हमारा Mail ID है jankaritoday@gmail.com. अगर आपको हमारा कंटेंट पसंद आता है तो कमेंट करें, लाइक करें और शेयर करें। धन्यवाद

Leave a Reply