अजमेर शरीफ राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है। इस दरगाह की खास बात यह है कि मुस्लिमों के अलावा अन्य समुदाय के लोगों की भी इस दरगाह में मध्यकाल से ही आस्था रही है। इस दरगाह के प्रति विदेशों में भी आकर्षण है और दुनिया भर से तीर्थ यात्री यहां चादर चढ़ाने आते हैं। लेकिन अब इस दरगाह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विवाद की वजह यह है कि दावा किया जा रहा है कि अजमेर शरीफ दरगाह असल में एक हिंदू मंदिर है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।
आपको बता दें कि भारत में कई धार्मिक स्थलों को लेकर विवादों का एक लंबा इतिहास रहा है। इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि भारत पर इस्लामी आक्रमण और मुस्लिम शासकों के शासनकाल के दौरान कई मंदिरों को ध्वस्त कर वहां मस्जिदें और दरगाहें बनाई गईं।
उदाहरण के तौर पर, अयोध्या का राम मंदिर, जिसके बारे में कहा जाता है कि राम मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी। लंबे संघर्ष के बाद हिंदू समुदाय फिर से राम मंदिर को वापस लेने में कामयाब रहा। लेकिन मंदिर-मस्जिद विवाद सिर्फ राम मंदिर तक ही सीमित नहीं है। मथुरा, कुतुब मीनार, ज्ञानवापी मस्जिद जैसी कई जगहें हैं, जहां दावा किया जा रहा है कि पहले वहां हिंदू मंदिर था, जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। इस बीच अजमेर शरीफ दरगाह को लेकर किए गए दावे ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।
•राजस्थान के अजमेर में स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर एक हिंदू मंदिर होने का दावा किया गया है। दावा करने वाले हैं महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यवर्धन सिंह परमार। वर्ष 2022 में उन्होंने राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर पुरातत्व विभाग से दरगाह का सर्वेक्षण कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में परमार ने दावा किया था कि अजमेर में एक हिंदू मंदिर को तोड़कर दरगाह बनाई गई थी। इसलिए पुरातत्व विभाग से इसका सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए। इसमें मंदिर के अस्तित्व के पुख्ता सबूत सामने आएंगे। अपने पत्र में उन्होंने दावा किया था कि अजमेर शरीफ दरगाह के अंदर कई स्थानों पर हिंदू धार्मिक प्रतीक स्वास्तिक और कमल के फूल पाए गए हैं। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल कलराज मिश्र, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और मीनाक्षी लेखी को भी भेजी थी और चेतावनी भी दी थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वह बड़ा आंदोलन करेंगे।
•केवल महाराणा प्रताप सेना ही नहीं बल्कि हिंदू जागरण मंच ने भी यह दावा किया है कि अजमेर शरीफ दरगाह को हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। हिंदू जागरण मंच के अजय नागर ने दावा किया है कि इस दरगाह का इतिहास 900 साल पुराना है और इसे पृथ्वीराज चौहान द्वारा बनाए गए एक लिंग मंदिर को तोड़कर बनाया गया है।
•अब राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और वहां मुख्यमंत्री भजनलाल के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है। एक बार फिर महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने दावा किया है कि अजमेर दरगाह एक पवित्र हिंदू मंदिर है और इस विषय पर सीएम भजन लाल शर्मा को पत्र लिखा गया है। इस पत्र में परमार ने कहा है कि महाराणा प्रताप सेना लंबे समय से मांग कर रही है कि अजमेर स्थित दरगाह की जांच होनी चाहिए क्योंकि वह दरगाह हमारा पवित्र हिंदू मंदिर है, कोई दरगाह नहीं। पिछली बार भी हमने इस विषय पर कांग्रेस सरकार को पत्र भेजा था लेकिन हिंदू विरोधी कांग्रेस सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
अजमेर शरीफ दरगाह के दीवान जैनुअल आबेदीन ने इस पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का हथकंडा बताया है। उन्होंने कहा है कि अजमेर शरीफ दरगाह का दरबार हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है और इस दरगाह पर सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में हिंदू भी आते हैं। हालाँकि, क्या महाराणा प्रताप सेना और हिंदू जागरण मंच द्वारा किए जा रहे इन दावों में कोई सच्चाई है या यह लाइमलाइट में आने का एक जरिया है, यह तो समय ही बताएगा। यह भी देखना दिलचस्प रहेगा कि अजमेर शरीफ दरगाह की पुरातात्विक जांच होती है या नहीं।
•https://www.jagran.com/rajasthan/jaipur-maharana-pratap-sena-claimed-khwaja-dargah-to-be-hindu-temple-22746445.html
•https://www.livehindustan.com/rajasthan/story-ajmer-dargah-claims-to-be-a-hindu-temple-demands-this-from-cm-bhajan-lal-9252489.html
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