Ranjeet Bhartiya 28/11/2022

भूमिहार भारत में रहने वाली एक बहुत प्रभावशाली जाति है. इनके प्रभाव के पीछे कई कारण हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि इस जाति के लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में, और देश की आजादी के बाद राजनीति, सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों, समाज सुधार और साहित्य के […]

Ranjeet Bhartiya 27/11/2022

बिहार में जाति आधारित हिंसा (Caste based violence) का एक लंबा इतिहास रहा है. यह जाति संघर्ष मुख्य रूप से गरीब और भूमिहीन निचली जातियों (Lower Castes) तथा अगड़ी जातियों  (Forward Castes) के बीच होता आया है, जिनका परंपरागत रूप से भूमि के विशाल हिस्से पर नियंत्रण रहा है. लेकिन ऐसे कई मौके भी आए […]

Ranjeet Bhartiya 26/11/2022

स्वतंत्र लेखक प्रसन्न चौधरी और पत्रकार श्रीकांत की किताब ‘बिहार सामाजिक परिवर्तन के कुछ आयाम’ में इस घटना का विस्तार से जिक्र है। साल था 1925। बिहार में निचली समझी जाने वाली जातियां एक जगह जुटती थीं और सभी एक साथ जनेऊ धारण करते थे। इसे बिहार में ऊंची समझी जाने वाली जातियों ने खुद […]

Ranjeet Bhartiya 25/11/2022

भारत में जाति आधारित हिंसा का पुराना इतिहास रहा है. जातिगत हिंसा ज्यादातर बिहार, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और बंगाल के ग्रामीण इलाकों में हुई है. तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित जाति संघर्ष देखे गए हैं. जातिगत हिंसा के कई सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक कारण रहे हैं. अंतर्जातीय हिंसा के […]

Ranjeet Bhartiya 24/11/2022

वैसे तो दबंग शब्द के कई अर्थ हैं लेकिन इसका मूल अर्थ होता है-प्रभावशाली. आम तौर पर, जाति जो परंपरागत रूप से जाति पदानुक्रम में उच्च होती है, समाज में प्रभुत्व की स्थिति रखती है. भारतीय संदर्भ में, ब्राह्मणों और राजपूतों का पारंपरिक रूप से वर्चस्व रहा है. सांस्कृतिक पहचान देने में धर्म एक व्यक्ति […]