बहराइच, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक जिला है. भारत-नेपाल सीमा पर स्थित यह जिला उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है. देवीपाटन प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले इस जिले का प्रशासनिक मुख्यालय बहराइच शहर है. ये जिला सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक सूफी संत सैयद सालार मसूद गाजी के दरगाह के लिए प्रसिद्ध है. जिले में कितने गांव हैं? कितनी जनसंख्या है? आईये जानते हैं बहराइच जिले की पूरीजानकारी.
इस जिले का इतिहास अत्यंत ही प्राचीन है. ऐसी मान्यता है कि ये सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा के राजधानी के रूप में प्रसिद्ध था. इसे “ब्रह्मइच” के नाम से जाना जाता था जो कालांतर में “बहराइच” के नाम से जाना जाने लगा. जिले के नामकरण के बारे में इतिहासकारों का मत है कि मध्यकाल में “भर/राजभर” राजवंश की राजधानी होने के कारण इस स्थान का नाम बहराइच पड़ा.
बाउंड्री (चौहद्दी)
जिले की सीमा नेपाल से लगती है.
उत्तर में-नेपाल
दक्षिण में-बाराबंकी और गोंडा जिला
पूरब में-श्रावस्ती जिला और गोंडा जिला
पश्चिम में-लखीमपुर खेरी जिला, सीतापुर जिला और बाराबंकी जिला
समुद्र तल से ऊंचाई
बहराइच शहर समुद्र तल से लगभग 126 मीटर (413 फीट) की औसत ऊंचाई पर स्थित है.
क्षेत्रफल
इस जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 5237 वर्ग किलोमीटर है.
प्रमुख नदियां:
घाघरा नदी इस जिले के पश्चिमी सीमा का निर्माण करती है. जिले की प्रमुख नदियां हैं- घाघरा, सरयू, शारदा, सोती,
कुआनो और कौड़ियाला.
जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन, मछली पालन, वन, उद्योग और व्यवसाय पर आधारित है.
इस जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फसल हैं:धान, मक्का, गेहूं, ज्वार, बाजरा, दलहन (मसूर, चना, मूंग उरद, अरहर और मटर), तिलहन (मूंगफली, सरसों और तिल), गन्ना, हल्दी आलू, और सब्जियां. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फल हैं: आम, अमरूद, नींबू, कटहल, पपीता और केला.
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन जिले के लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण जरिया है. जिले के प्रमुख पशु धन हैं: गाय, बैल, भैंस, सूअर, भेड़, बकरी और पोल्ट्री.
जिले के नदियों, नहरों, तालाबों, टैंको और जलाशयों से विभिन्न प्रकार के मछली का उत्पादन किया जाता है.
जिले में पाए जाने वाले प्रमुख वन उत्पाद हैं: साल, महुआ, बरगद, तेंदू, बेल,टीक, शीशम और खैर
बहराइच जिले में बड़े उद्योग का अभाव है. जिले में कृषि आधारित लघु औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं. जिले में स्थित प्रमुख उद्योग हैं: चीनी मिल, राइस मिल, तेल मिल, दाल मिल, फर्नीचर उद्योग, बेकरी और तंबाकू आधारित उद्योग.
ये जिला वन उत्पादों, कृषि उत्पादों और अनाज का व्यापार केंद्र है.
प्रमंडल: देवीपाटन
प्रशासनिक सहूलियत के लिए इस जिले को 6 तहसीलों (अनुमंडल) और 14 विकासखंडो (प्रखंड/ ब्लॉक) में बांटा गया है.
तहसील (अनुमंडल):
इस जिले को कुल 6 तहसीलों में बांटा गया है: मोतीपुर (महींपुरवा), नानपारा, पयागपुर, महसी, बहराइच और कैसरगंज.
विकासखंड (प्रखंड):
जिले को 14 विकासखंडों (प्रखंडों) में बांटा गया है-
महींपुरवा, बलहा, नवाबगंज, शिवपुर, रिसिया, चित्तौरा, महसी, तेजवापुर, फखरपुर, हुजूरपुर, पयागपुर, विशेश्वरगंज, कैसरगंज और जरवल.
पुलिस थानों की संख्या: 22
नगर पालिकाओं की संख्या: 2
नगर पंचायतों की संख्या: 2
ग्राम पंचायतों की संख्या: 903
गांवों की संख्या: 1395
निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र: 2, बहराइच और कैसरगंज
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र: 7
बहराइच जिले के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं: पयागपुर, मटेरा, बलहा, नानपारा, मटेरा, महसी और बहराइच.
2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, इस जिले की जनसांख्यिकी इस प्रकार है-
कुल जनसंख्या: 34.88 लाख
पुरुष: 18.43 लाख
महिला: 16.43 लाख
जनसंख्या वृद्धि (दशकीय): 46.48%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 666
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में अनुपात: 1.75%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष): 892
औसत साक्षरता: 49.36%
पुरुष साक्षरता: 58.34%
महिला साक्षरता: 39.18%
शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या: 8.14%
ग्रामीण जनसंख्या: 91.86%
2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, ये एक हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 65.71% है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 33.53% है. अन्य धर्मों की बात करें तो जिले में ईसाई 0.18%, सिख 0.24%, बौद्ध 0.08% और जैन 0.03% हैं.
भाषाएं
बहराइच जिले में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं: हिंदी, अवधि और उर्दू.
इस जिले में पौराणिक, धार्मिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कई दर्शनीय स्थल हैं. जिले में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में संक्षिप्त विवरण:
सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक सूफी संत सैयद सालार मसूद गाजी का यह ऐतिहासिक दरगाह जिला मुख्यालय से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस भव्य दरगाह का निर्माण 1034 ईस्वी में फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था.
भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर जिले के नानपारा तहसील के मटेरा में स्थित है.
भगवान शिव को समर्पित यह प्रसिद्ध मंदिर बहराइच शहर के घंटाघर के पास स्थित है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार
महाभारत कालीन इस मंदिर में मौजूद शिवलिंग की स्थापना अज्ञातवास के दौरान धर्मराज युधिष्ठिर ने किया था.
आस्था का केंद्र शक्तिपीठ बहराइच शहर के उत्तरी छोर पर बहराइच-लखनऊ हाईवे के पास पवित्र सरयू नदी के तट पर स्थित है.
देवी महाकाली को समर्पित यह प्रसिद्ध मंदिर डिगिहा चौराहे पर स्थित है.
लगभग 400 वर्ग किलोमीटर में फैला यह वन्य जीव अभ्यारण्य भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है. यहां आप घड़ियाल, बाघ, गेंडे, डॉल्फिन, हिरण इत्यादि को देख सकते हैं.
हवाई मार्ग
बहराइच जिले का अपना हवाई अड्डा नहीं है. यहां के लिए डायरेक्ट हवाई सेवा उपलब्ध नहीं है.
निकटतम हवाई अड्डा: चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट, लखनऊ (Code: LKO). यह हवाई अड्डा बहराइच से लगभग 143 किलोमीटर की दूरी पर लखनऊ में स्थित है.
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन: बहराइच रेलवे स्टेशन (Code: BRK) और गोंडा जंक्शन रेलवे स्टेशन (Code: GD).
सड़क मार्ग
बहराइच सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यहां के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध है. आप यहां अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी आ सकते हैं.
2011 के जनगणना के अनुसार,
1. जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में 23वां स्थान है.
2. लिंगानुपात के मामले में उत्तर प्रदेश में 39वां स्थान है.
3. साक्षरता के मामले में उत्तर प्रदेश में 70वां स्थान है.
4. सबसे ज्यादा बसे गांव वाला तहसील: कैसरगंज (432).
5. सबसे कम बसे गांव वाला तहसील: महसी (225)
6. जिले में कुल निर्जन गांवों की संख्या: 31.
Last updated: 07/09/2020 8:18 am
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Nice