संत कबीर नगर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक जिला है. उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में आने वाला यह जिला बस्ती प्रमंडल के अंतर्गत आता है. खलीलाबाद शहर संत कबीर नगर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है. सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक प्रसिद्ध संत कबीर की समाधि जिले के मगहर में स्थित है. जिले में कितने गांव है? कितनी जनसंख्या है? आईये जानते हैं संत कबीर नगर जिले की पूरी जानकारी.
समाज सुधारक, प्रसिद्ध कवि और महान संत कबीर की कार्य स्थली होने के कारण उनके सम्मान में इस जिले का नाम संत कबीर नगर रखा गया.
एक स्वतंत्र जिले के रूप में अस्तित्व में आने से पहले संत कबीर नगर जिला बस्ती जिले का हिस्सा हुआ करता था. 5 सितंबर 1997 को इसे बस्ती जिले से अलग करके एक स्वतंत्र जिला बनाया गया. खलीलाबाद शहर की स्थापना सन 1600 में मुगल बादशाह औरंगजेब के प्रतिनिधि काजी खलील उर रहमान ने किया था. इन्हीं के नाम पर जिला मुख्यालय का नाम खलीलाबाद पड़ा.
बाउंड्री (चौहद्दी)
यह जिला कुल 5 जिलों से घिरा हुआ है.
उत्तर में–सिद्धार्थनगर जिला और महाराजगंज जिला
दक्षिण में-अंबेडकर नगर जिला
पूरब में-गोरखपुर जिला
पश्चिम में-बस्ती जिला
समुद्र तल से ऊंचाई
खलीलाबाद शहर समुद्र तल से लगभग 69 मीटर (226 फीट) की औसत ऊंचाई पर स्थित है.
क्षेत्रफल
जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1646 वर्ग किलोमीटर है.
प्रमुख नदियां: घाघरा, राप्ती, कुआनो और आमी.
घाघरा नदी जिले के दक्षिण से बहती है और संत कबीर नगर तथा अंबेडकर नगर जिले की सीमा निर्धारित करती है.
इस जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन, मछली पालन, वन, खनिज, उद्योग और व्यवसाय पर आधारित है.
संत कबीर नगर जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फसल हैं: धान, मक्का, गेहूं, ज्वार, दलहन (अरहर, उड़द, मसूर, मूंग, चना और मटर), तिलहन (सरसों, तिल और राई), मूंगफली, गन्ना, आलू, प्याज और सब्जियां. जिले में उगाए जाने वाले प्रमुख फल हैं: आम, अमरूद, कटहल, पपीता और केला.
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन जिले के लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण जरिया है. जिले के प्रमुख पशु धन हैं: गाय, बैल, भैंस, सूअर, भेड़, बकरी और पोल्ट्री.
जिले के नदियों, नहरों, तालाबों, टैंको और जलाशयों से प्रचुर मात्रा में विभिन्न प्रकार के मछली का उत्पादन किया जाता है.
जिले में पाए जाने वाले प्रमुख वन उत्पाद हैं: सागौन, हलादु, साल, शीशम, बबूल, आम, महुआ, नीम, बांस और जामुन.
ये जिला खनिज से समृद्ध नहीं है. जिले में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं: बालू, कंकर और रेह.
जिले में लघु उद्योग और कुटीर उद्योग की इकाइयां कार्यरत हैं.
जिले के प्रमुख औद्योगिक उत्पाद हैं- चीनी मिल, पेपर मिल, आयुर्वेदिक कारखाने, थर्माकोल उद्योग, फर्नीचर उद्योग,बेकरी उद्योग, ब्रासवेयर उद्योग और कृषि आधारित उद्योग
संत कबीर नगर जिला जिला कृषि उत्पादों का व्यापार केंद्र है.
प्रमंडल: बस्ती
प्रशासनिक सहूलियत के लिए इस जिले को 3 तहसीलों (अनुमंडल) और 9 विकासखंडो (प्रखंड/ ब्लॉक) में बांटा गया है.
तहसील (अनुमंडल):
जिले को कुल 3 तहसीलों में बांटा गया है: धनघटा, खलीलाबाद और मेंहदावल.
विकासखंड (प्रखंड):
संत कबीर नगर जिले को कुल 9 विकासखंडों (प्रखंडों) में बांटा गया है-हैसर बाजार, पौली, नाथनगर, खलीलाबाद, सेमरियाव, बघौली, बेलहर, मेहदावल और सांथा.
पुलिस थानों की संख्या: 8
नगर परिषद की संख्या: 1
नगर पंचायतों की संख्या: 3
न्याय पंचायतों की संख्या: 85
ग्राम पंचायतों की संख्या: 794
कुल गांवों की संख्या: 1727
निर्वाचन क्षेत्र
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र: 1, संत कबीर नगर
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र: 3
जिले के अंतर्गत कुल 3 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं: मेंहदावल, खलीलाबाद और धनघटा.
2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, इस जिले की जनसांख्यिकी इस प्रकार है-
कुल जनसंख्या: 17.15 लाख
पुरुष: 8.69 लाख
महिला: 8.45 लाख
जनसंख्या वृद्धि (दशकीय): 20.77%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 1042
उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में अनुपात: 0.86%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष): 972
औसत साक्षरता: 66.72%
पुरुष साक्षरता: 78.39%
महिला साक्षरता: 54.80%
शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या: 7.49%
ग्रामीण जनसंख्या: 92.51%
2011 के आधिकारिक जनगणना के अनुसार, यह नगर एक हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 75.83% है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 23.58% है.अन्य धर्मों की बात करें तो जिले में ईसाई 0.10%, सिख 0.03%, बौद्ध 0.26% और जैन 0.01% हैं.
भाषाएं
जिले में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं: हिंदी, उर्दू और भोजपुरी.
इस जिले में पौराणिक, धार्मिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कई दर्शनीय स्थल हैं. जिले में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में संक्षिप्त विवरण:
खलीलाबाद से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण पश्चिम में, गोरखपुर-फैजाबाद रोड पर स्थित मगहर हिंदुओं और मुसलमानों के लिए एक पवित्र तीर्थस्थल है. ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर संत कबीर की मृत्यु हुई थी.
भगवान शिव को समर्पित यह प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर खलीलाबाद से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण में तामा ग्राम पंचायत में स्थित है. ऐसी मान्यता है कि पांडवों की माता कुंती ने इस मंदिर में पहली बार भगवान शिव की पूजा की थी.
आस्था का केंद्र यह प्राचीन मंदिर खलीलाबाद शहर में स्थित है.
हवाई मार्ग
इस जिले का अपना हवाई अड्डा नहीं है. यहां के लिए डायरेक्ट हवाई सेवा उपलब्ध नहीं है.निकटतम हवाई अड्डा: महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट, गोरखपुर (Code: GOP).
यह हवाई अड्डा खलीलाबाद से लगभग 39 किलोमीटर की दूरी पर गोरखपुर में स्थित है.
रेल मार्ग
यह जिला रेल मार्ग से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तथा देश के विभिन्न भागों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. निकटतम रेलवे स्टेशन: खलीलाबाद रेलवे स्टेशन (Code: KLD).
संत कबीर नगर सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यहां के लिए नियमित सरकारी और प्राइवेट बस सेवाएं उपलब्ध है. आप यहां अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी आ सकते हैं. नेशनल हाईवे 27 (NH 27) और नेशनल हाईवे 28A (NH 28A) खलीलाबाद होकर गुजरती है.
2011 के जनगणना के अनुसार,
1. जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में 56वां स्थान है.
2. लिंगानुपात के मामले में उत्तर प्रदेश में 9वां स्थान है.
3. साक्षरता के मामले में उत्तर प्रदेश में 45वां स्थान है.
4. सबसे ज्यादा बसे गांव वाला तहसील: खलीलाबाद (594).
5. सबसे कम बसे गांव वाला तहसील: मेंहदावल (454)
6. जिले में कुल निर्जन गांवों की संख्या: 144.
Last updated: 25/09/2019 1:49 pm
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