पहले भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर थे, जिन्होंने 1913 में साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीता था। सबसे हालिया भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी हैं, जिन्होंने 2019 में अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीता था। भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने साहित्य, भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, शांति और अर्थशास्त्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके काम ने इन क्षेत्रों में ज्ञान और समझ को आगे बढ़ाने में मदद की है और दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यहां नोबेल पुरस्कार विजेताओं की सूची दी गई है:
गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर इस पुरस्कार को जीतने वाले पहले भारतीय थे. उन्हें साल 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार मिला. बंगाली में लिखने वाले टैगोर को दुनिया भर के लोगों ने पढ़ा और सराहा. साल 1861 में कलकत्ता में जन्मे टैगोर ने जीवन, विचार, दर्शन, आलोचना और सामाजिक मुद्दों पर लिखा. साल 1941 में 80 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया.
सर चंद्रशेखर वेंकट रमन
रौशनी यानी लाइट के कणों के बिखराव का विस्तृत वर्णन और वजह बताने के लिए सर सीवी रमन को नोबेल पुरस्कार मिला. साल 1888 में तिरुचिरापल्ली में जन्मे इस वैज्ञानिक ने रौशनी और ऊर्जा के संबंध को करीब से समझाया. 82 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.
हर गोबिंद खुराना
साल 1968 में नोबेल जीतने वाले हर गोबिंद खुराना ने इलेक्ट्रॉन पर काम किया था. उन्हें जेनेटिक कोड और उसके प्रोटीन सिंथेसिस में भूमिका के लिए नोबेल मिला था. साल 1922 में रायपुर में जन्मे खुराना ने मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय के साथ काफी वक्त गुजारा. साल 2011 में उनकी मृत्यु हो गई.
मदर टेरेसा का जन्म मेसिडोनिया में हुआ था. उनके माता-पिता अल्बानिया से ताल्लुक रखते थे, मगर उन्होंने कलकत्ता आकर अपना पूरा जीवन मानव सेवा के नाम कर दिया. उन्होंने गरीबी हटाने के लिए मिशनरीज ऑफ चौरिटी की स्थापना की, जिसमें अनाथ, बुजुर्गों, रोगियों और गरीबों को मदद दी जाती थी.
सुब्रमण्यन चंद्रशेखर
साल 1983 में एस चंद्रशेखर को भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार मिला. उन्होंने सितारों के विकास और संरचना पर अपने विचार रखे थे. लाहौर में जन्मे चंद्रशेखर भारत आए और शिकागो विश्वविद्यालय के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे.
अमर्त्य सेन
साल 1998 में अमर्त्य सेन पहले अर्थशास्त्री बने जिन्हें लोक कल्याण अर्थशास्त्र के लिए यह पुरस्कार दिया गया था. ब्रिटेन के ट्रिनिटी कॉलेज के साथ बिताए समय के दौरान उन्होंने लोकल्याण अर्थशास्त्र की कठिनाइयों, संसाधनों और समुदाय में उनके बंटवारे की दिक्कतों पर प्रकाश डाला.
सर विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल
लेखक वीएस नायपॉल को साल 2001 में नोबेल पुरस्कार दिया गया. उनका जन्म साल 1932 में त्रिनिदाद में हुआ था, मगर मूल रूप से वह भारतीय थे. बाद में वह ब्रिटेन चले गए और वहीं के नागरिक बन गए. इससे पहले 1971 में उन्हें बुकर प्राइज भी मिला. साल 1990 में ब्रिटेन सरकार ने उन्हें नाइटहुड दिया.
वेंकटरमण रामकृष्णन
तमिलनाडु में पैदा हुए वेंकटरमण रामकृष्ण को साल 2009 में रसायन विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार मिला. उन्हें यह सम्मान राइबोसोम की संरचना और इसके काम करने की जानकारी देने के लिए मिला. साल 1952 में जन्मे रामकृष्ण शिक्षाविदों के परिवार से आते हैं.
कैलाश सत्यार्थी
साल 2014 में कैलाश सत्यार्थी को बाल मजदूर उन्मूलन और शिक्षा में उनके अधिकार के लिए यह पुरस्कार मिला. साल 1954 में जन्मे सत्यार्थी ने विदिशा में बच्चों को पढ़ाया. इंजीनियरिंग करने के बाद वह शिक्षा से जुड़ गए और फिर ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के लिए टीचिंग को भी छोड़ दिया
अभिजीत विनायक बनर्जी
मुबंई में पैदा हुए अभिजीत बनर्जी 10वें भारतीय बने, जिन्हें गरीबी हटाने की दिशा में काम करने के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है. उनके साथ उनकी पत्नी को भी यह खिताब दिया गया है. साल 1961 में पैदा हुए बनर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और फिर जेएनयू गए. उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से साल 1988 में पीएचडी की.
अब आपको एक जानकारी देना चाहेंगे जिससे आप चौंक जायेंगे. इन 10 भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेताओं में से सात ब्राह्मण हैं. वास्तव में कुल मिलाकर 10 नोबेल पुरस्कार विजेता हैं, या तो भारतीय जो इस देश में रहते थे या वे जो अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के थे.
ब्राह्मण देवता शब्द ऐसे ही नहीं आया है,
बुद्धिजीवी, महान राजनेता, संगीतकार, कलाकार, जुडिशरी ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां ब्राह्मणों ने महारत हासिल ना कि हो.
मदर टेरेसा, हर गोबिंद खुराना और अमर्त्य सेन को छोड़कर बांकी सभी ब्राह्मण हैं.
जहां , हर गोबिंद खुराना खत्री जाति से संबंधित है वहीं अमर्त्य सेन वैद्य समाज से हैं.
Last updated: 09/11/2023 7:34 am
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