ब्राह्मण क्षेत्रीय, भाषाई और सांस्कृतिक स्तरों पर व्यापक विविधताओं वाला एक विविध समुदाय है. ब्राह्मण, किसी भी अन्य समुदाय की तरह, भारत के विभिन्न हिस्सों और विभिन्न पृष्ठभूमि से आते हैं. ब्राह्मणों की शारीरिक बनावट और रंग-रूप में भी कई प्रकार की विविधताएं देखी जाती हैं. ब्राह्मणों के रंग को लेकर आम लोगों की यह धारणा है कि सभी ब्राह्मण गोरे होते हैं. इसी क्रम में यहां हम जानेंगे कि क्या ब्राह्मण गोरे होते हैं.
इस लेख की विषयवस्तु को देखते हुए वर्ण व्यवस्था के रंग सिद्धांत का उल्लेख करना आवश्यक है. वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति के संबंध में कई सिद्धांत हैं जैसे गुण सिद्धांत, कर्म और धर्म सिद्धांत और रंग सिद्धांत आदि. भृगु ऋषि ने महाभारत में भारद्वाज मुनि को बताया कि वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति मानव त्वचा के विभिन्न रंगों के आधार पर हुई है. इस सिद्धांत के अनुसार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र वर्ण के लोगों का रंग क्रमशः गोरा (श्वेत), लाल, पीला और काला होता है. वर्ण व्यवस्था की इसी व्याख्या के आधार पर शायद लोगों के मन में यह धारणा बन गई है कि सभी ब्राह्मणों का रंग गोरा होता है. लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.
ब्राह्मण एक विविध समूह है, और ब्राह्मण समुदाय के सदस्य अलग-अलग भागों में निवास करते हैं, जैसे कि उत्तर भारत, पश्चिमी भारत, दक्षिणी भारत आदि.
अन्य लोगों की तरह, ब्राह्मणों की शारीरिक बनावट और त्वचा का रंग वंश, क्षेत्रीय मूल, भौगोलिक स्थिति, आनुवंशिकी और व्यक्तिगत विशेषताओं जैसे कारकों पर निर्भर करता है. जहां तक ब्राह्मणों की त्वचा के रंग का संबंध है, उनकी त्वचा का रंग गोरा से लेकर काला तक हो सकता है.
यहां यह उल्लेखनीय है कि जाति और रंग के बीच कोई सीधा संबंध नहीं होता है. ब्राह्मणों या किसी व्यक्ति या समूह की त्वचा का रंग उनकी जाति से निर्धारित नहीं होता है. त्वचा का रंग विभिन्न कारकों का परिणाम है. यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि जाति और त्वचा का रंग अलग-अलग पहलू हैं और इन्हें एक साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए. एक ब्राह्मण होने और त्वचा का एक विशिष्ट रंग होने के बीच कोई अंतर्निहित संबंध नहीं है.हमें एक समुदाय के भीतर मौजूद विविधताओं की सराहना करनी चाहिए और ऐसे मामलों में सामान्यीकरण से बचना चाहिए.
References:
•Manusmriti Punarmoolyankan (Urf Muft Hue Badnam)
By Dr. Shyam Sakha ‘Shyam’ · 2022
•Bharat Mein Pichda Varg Aandolan Aur Parivartan Ka Naya Samajshastra
By Harinārāyaṇa Ṭhākura · 2009
•आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन
By डाँ. जे. पी. सिंह, · 2016
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