Religion

भिश्ती (Bhishti) जनजाति का इतिहास, भिश्ती शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

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भिश्ती (Bhishti) भारत और पाकिस्तान में निवास करने वाली एक मुस्लिम जनजाति है. पारंपरिक रूप से यह जलवाहक यानी कि पानी की आपूर्ति करने का काम करते हैं. वर्तमान में भी यह इसी प्रकार के अन्य घरेलू सेवाओं में लगे हुए हैं. स्वभाव से यह मेहनती और वफादार होते हैं. बदलते वक्त के साथ अन्य व्यवसायिक जातियों की तरह यह भी अपना पारंपरिक व्यवसाय खो रहे हैं. जीवन यापन के लिए यह अन्य व्यवसाय और रोजगार को अपनाने लगे हैं. यह एक भूमिहीन समुदाय है. यह त्योहारों, शादी-विवाह और अन्य सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में पानी पिलाने का काम करते हैं. साथ हीं यह जीवन निर्वाह के लिए मजदूरी का काम करते हैं. यह रिक्शा चालक, बीड़ी सिगरेट बनाने सड़कें और मकान धोने का काम ही करते हैं. भारत में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं. महाराष्ट्र में यह सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर पुणे जिलों में निवास करते हैं. यह सुन्नी इस्लाम धर्म का पालन करते हैं. इनमें से कई हिंदू धर्म से हिंदू धर्म से धर्मांतरित हैं. इसीलिए इनके परंपराओं और प्रथाओं पर हिंदू और मुस्लिम धर्म का मिश्रित प्रभाव है. भिश्ती समाज अनेक गोत्रों में विभाजित है, जिनके नाम उनके सदस्यों के हिंदू मूल को दर्शाते हैं जैसे- हुसैनी ब्राह्मण, सामरी चौहान और बहमनगौर आदि. यह अपने चमड़े के थैले (मशक) की पूजा एक बुत के रूप में करते हैं, और शुक्रवार को उसके सामने धूप अगरबत्ती जलाते हैं. कहा जाता है कि भिश्ती शब्द की उत्पत्ति फारसी के शब्द “बिहिश्त” से हुई है, जिसका अर्थ होता है- “स्वर्ग”. भिश्ती का अर्थ होता है-स्वर्ग का निवासी. संभवत: युद्ध के मैदान में दया के दूत के रूप में घायलों को राहत पहुंचाने, उनकी सेवा करने और प्यासे सैनिकों को पानी पिलाने के कारण इनका नाम भिश्ती पड़ा. बकरे की खाल से बनने वाला चमड़े का थैला, जिसे मशकी आ जाता है, इनका एक विशिष्ट चिन्ह है. यह मशकी में पानी भरकर लोगों को पिलाते थे. इसीलिए इन्हें मशकी या पखाली भी कहा जाता है. इनके बारे में एक दिलचस्प किवदंती है. कहा जाता है कि चौसा के युद्ध में इन्होंने सम्राट मुगल सम्राट हुमायूं का जान बचाया था. इससे प्रसन्न होकर बादशाह हुमायूं ने इन्हें आधे दिन के लिए बादशाह बनाया था.

 

 

Last updated: 02/12/2021 11:37 am

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