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भोटिया या भोट (Bhotiya or Bhot) जनजाति का इतिहास,भोटिया की उत्पति कैसे हुई?

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भोटिया या भोट (Bhotiya or Bhot) भारत और नेपाल में पाई जाने वाली एक प्रमुख जनजाति है. इस जनजाति के लोग हिमालयी बेल्ट के मूल निवासी हैं. यह मूल रूप से पारहिमालय क्षेत्र (Transhimalayan Region) में निवास करने वाले जातीय-भाषाई रूप से संबंधित तिब्बती लोगों का समूह है. बता दें कि पारहिमालय (Transhimalaya) तिब्बत में हिमालय से समांतर चलने वाली एक पर्वतमाला है, जो भारत को तिब्बत से विभाजित करती है. उत्तराखंड में, विशेष रूप से चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में, भोटिया खानाबदोश, प्रवासी चरवाहे हैं, जो भारत और तिब्बत के बीच की सीमा पर विचरण करते हैं. यह हिमालय में अनाज, ऊन, पत्थरों, रत्नों, जड़ी बूटियों और नमक जैसे उत्पादों के व्यापारी भी हैं.
अब इनमें से कुछ खेती करने लगे हैं और किसान बन गए हैं. कुछ भोटिया पौधों के औषधीय गुणों के बारे में जानकार हैं. इनमें से कई कुटीर ऊन उद्योग में कार्यरत है. भोटिया लोगों की भाषा को “भोटी” या “भोटिया” कहा जाता है. इसके अलावा यह कई भाषाएं बोलते हैं, जिनमें प्रमुख हैं-लद्दाखी, शेरपा, तिब्बती, नेपाली और हिंदी. आइए जानते हैं भोटिया या भोट (Bhotiya or Bhot) जनजाति का इतिहास, भोटिया की उत्पति कैसे हुई?

भोटिया किस कैटेगरी में आते हैं?

भारत सरकार की सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था आरक्षण के अंतर्गत इन्हें जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribe, ST) का दर्जा प्राप्त है.

भोटिया कहां पाए जाते हैं?

भारत में यह मुख्य रूप से जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में पाए जाते हैं. उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से बहराइच, गोंडा, लखीमपुर, लखनऊ, बाराबंकी, कानपुर नगर , कानपुर देहात जिलों में पाए जाते हैं. नेपाल में यह मुख्य रूप से उत्तरी और पूर्वी नेपाल में निवास करते हैं. यह मुख्य रूप से हिमालय के गांव में रहते हैं और नेपाल की जनसंख्या का लगभग 0.1 प्रतिशत है.

भोटिया किस धर्म को मानते हैं?

धार्मिक आस्था से यह हिंदू, बौद्ध या बोन (Bon) धर्म
के अनुयाई हो सकते हैं. बता दें कि बोन धर्म को तिब्बत का मूल पूर्व-बौद्ध धार्मिक परंपरा माना जाता है. अधिकांश भोटिया बौद्ध धर्म के अनुयाई हैं. हालांकि इनमें से ज्यादातर धार्मिक रूप से तिब्बती बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के संयोजन का अभ्यास करते हैं. इनमें पूर्वजों की पूजा का भी प्रचलन है.

भोटिया का उप विभाजन

भोटिया समुदाय मुख्य रूप से 6 उप समूहों में विभाजित है-भोट, भोटिया, सिक्किम के भूटिया, तिब्बती (सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के), भूट, खिमलिंग (Khimling) के ग्याकर खंपा (Gyakar Khampa) और उत्तराखंड के उत्तराखंड का भिडांग (Bhidang) भोटिया कई अन्य जातीय समूहों से निकटता से जुड़े हुए हैं, इनमें प्रमुख हैं-भूटिया (Bhutia),
उत्तराखंड भोटिया (Uttarakhand Bhotiya) और
नगालोप (Ngalop).

भोटिया जनजाति की उत्पत्ति कैसे हुई?

भोटिया शब्द की उत्पत्ति तिब्बती भाषा के शब्द “बोड”
(Bod) से हुई है. बता दें कि शास्त्रीय तिब्बती में तिब्बत का प्राचीन नाम बोड है. ब्रिटिश प्राच्यविद् (orientalist) और अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भारतीय सिविल सेवा में अधिकारी रहे विलियम क्रुक ने अपनी पुस्तक “The Tribes and Castes of the North-western Provinces and Oudh” (1896) ने उल्लेख किया है कि भोटिया रघुवंशी राजपूत होने का दावा करते हैं. यह खुद को रघुवंशी राजपूत के रूप में पहचान करते हैं और इन्हें ठाकुर या राजवंशी कहलाना पसंद है. क्रुक के अनुसार, भोटिया नवाब आसफ-उद-दौला (1775-1797) के शासनकाल के दौरान उत्तर अवध के मूल अप्रवासी हो सकते हैं.

Last updated: 04/01/2022 11:59 am

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