Upendra Kushwaha
केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कॉलेजियम सिस्टम के द्वारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में किये जाने वाले जजों की नियुक्ति की आलोचना की है. कॉलेजियम सिस्टम पर सनसनीखेज खुलासा करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि देश में केवल 400 परिवारों के लोग ही हैं जज.
कॉलेजियम सिस्टम की वर्तमान व्यवस्था में जज दूसरे जजों की नियुक्ति नहीं करते बल्कि अपने उत्तराधिकारियों का चुनाव करते हैं. कॉलेजियम सिस्टम से जजों की नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं होती ,यह देश की लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है. जजों की नियुक्ति पारदर्शी और लोकतान्त्रिक तरीके से होनी चाहिए.
उपेंद्र कुशवाहा ने यह बात पटना के राजेंद्रभवन में आयोजित दलित, महादलित, अति पिछड़ा अधिकार सम्मेलन में कही. कुशवाहा ने आगे बोलते हुए कहा कि कॉलेजियम सिस्टम के कारण देश के
हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 400 परिवार के लोग ही जजों के पद पर आसीन हैं. कॉलेजियम सिस्टम से जजों के अपने उत्तराधिकारियों का चुनाव करने के कारण दलित, महादलित और अति पिछड़ा और सवर्ण समाज समेत अन्य वर्ग के गरीब लोगों के लिए जज बनने के दरवाजे बंद हैं. इस बंद दरवाजे को खोलने के लिए हम संघर्ष कर रहे हैं.
उपेंद्र कुशवाहा ने कॉलेजियम सिस्टम की तुलना रिजर्वेशन से करते हुए कहा कि लोग आरक्षण का विरोध करते हैं और कहते हैं कि इसमें मेरिट और योग्यता को नजरअंदाज किया जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति कलाम का सन्दर्भ देते हुए कुशवाहा ने कहा आज एक चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है, मछुआरे का बेटा वैज्ञानिक बन सकता है और फिर देश का राष्ट्रपति हो सकता है. लेकिन क्या किसी नौकरानी का बेटा जज बन सकता है?
कुशवाहा ने आगे कहा कि भारतीय न्यायपालिका में एसटी, एसटी और ओबीसी समुदायों, महिलाओं और अन्य वंचित समूह के लोगों के कम प्रतिनिधित्व लोगों का न्यायतंत्र पर कम भरोसा होने का कारण बनता है. यह किसी संस्थान के लिए अच्छी बात नहीं है. जजों की नियुक्ति कि प्रक्रिया को समावेशी बनाने कि ज़रूरत है.
जानकारी के लिए आपको बता दें केंद्र की मोदी सरकार ने कॉलेजियम सिस्टम द्वारा जजों की नियुक्ति की व्यवस्था को बदलने के लिए एक न्यायिक नियुक्ति आयोग (National Judicial Appointments Commission ,NJAC) के गठन का प्रस्ताव रखा था. न्यायिक नियुक्ति आयोग ऐक्ट को संसद और देश की 20 विधानसभाओं से पारित करने के बाद सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया था. वर्तमान में जजों की नियुक्ति एक बार फिर से कॉलेजियमti सिस्टम के द्वारा ही की जा रही है.
Last updated: 29/08/2020 8:09 am
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