डबला, डूबला (Dubla) या हलपति (Halpati) भारत में पाई जाने वाली एक जनजाति है. इन्हें तल्विया (Talvia) या तल्वी राठौड़ (Talvi Rathode) के नाम से भी जाना जाता है. इनका प्राथमिक व्यवसाय कृषि है.हलपति मुख्य रूप से छोटे जमींदार, सीमांत कृषक और भूमिहीन खेतिहर मजदूर हैं. पशुपालन इनका सहायक व्यवसाय है. यह गाय, भैंस और बकरियां पालते हैं और दूध बेचते हैं. इनमें से कई छोटे व्यापारी हैं, जो गांव में दुकानदारी का काम करते हैं. रोजी रोटी और बेहतर अवसर की तलाश में कुछ हलपति सूरत और अहमदाबाद भी चले गए हैं, जहां वे हीरा काटने के उद्योगों में कार्यरत हैं.आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत इन्हें गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, दादर और नगर हवेली तथा दमन और दीव में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe, ST) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.यह हिंदू धर्म का पालन करते हैं.यह मुख्य रूप से गुजराती बोलते हैं.आइए जानते हैं डबला जनजाति का इतिहास, डबला जनजाति की उत्पत्ति कैसे हुई?
यह मुख्य रूप से गुजरात में पाए जाते हैं.कम संख्या में यह गुजरात के आसपास के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी पाए जाते हैं, जैसे-महाराष्ट्र, दमन और दीव, दादर और नगर हवेली, कर्नाटक और गोवा. गुजरात में यह मुख्य रूप से सूरत, वलसाड, भरूच और वडोदरा जिलों में पाए जाते हैं. महाराष्ट्र में यह मुख्य रूप से ठाणे जिला में निवास करते हैं.
गुजरात में यह समुदाय कई उप समूहों में विभाजित है, जिनमें प्रमुख हैं-तलाविया, राठोरिया, वोहरिया, दमरिया, वलसाडिया, ओलपाडिया, मंडाविया, अंबरिया, घंघोडिया, खोडिया, चोरिया, उखरिया, बारामिया, बरिया, नारदा, हेविया, ठाकुर, करचा, वाटल, पारसी हलपाती और लालदतवाला हलपति. महाराष्ट्र में हलपति समाज में कई उप समूहों में विभाजित हैं, जिनमें प्रमुख हैं- भमनिया, गरासिया, करचा, मांडविया, रतजोद, राजपूत और तराविया.
डूबला का अर्थ होता है- गरीब किसान. आधुनिक भारत के क्रांति के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इनका नाम बदल दिया और इन्हें एक नया नाम दिया-“हलपति”. हलपति दावा करते हैं कि वह राठौर राजपूत है, जो खेती करने के कारण अपने वर्तमान नाम के कारण जाने जाते हैं. हलपति का गुजराती में अर्थ होता है -किसान.
Last updated: 20/12/2021 6:41 am
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