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भारत में ब्राह्मणों की आर्थिक स्थिति,भारत में आर्थिक असमानता के कई कारण है

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हम तरक्की के कितने ही दावे करें, बढ़ती हुई जीडीपी का कितना भी ढिंढोरा पीट लें, लेकिन आर्थिक असमानता भारत की हकीकत है. आर्थिक असमानता किसी देश के नागरिकों के बीच धन और आय के असमान वितरण को संदर्भित करती है. भारत में आर्थिक असमानता के कई कारण हैं जिसमें जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता जैसी सामाजिक कुरीतियाँ और श्रम बाजार में जातिगत भेदभाव भी महत्वपूर्ण कारण हैं. भारत में रहने वाली जातियाँ और सामाजिक समूह आर्थिक हैसियत के मामले में अलग-अलग पायदान पर खड़े हैं. इसी क्रम में यहां हम भारत में ब्राह्मणों की आर्थिक स्थिति के बारे में जानेंगे.

भारत में ब्राह्मणों की आर्थिक स्थिति

वैश्विक गरीबी उन्मूलन के लिए काम करने वाली ब्रिटिश संस्था ऑक्सफैम (Oxfam) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में भारत के शीर्ष 1% लोगों के पास कुल संपत्ति का 40.5% से अधिक का स्वामित्व था. इस रिपोर्ट में भारत में धन वितरण में बड़ी असमानता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया है कि 2012 से 2021 तक देश में बनाई गई 40% से अधिक संपत्ति केवल 1% आबादी के पास गई थी, जबकि केवल 3% निचले 50% आबादी तक पहुंच पाई. भारत में, आर्थिक स्थिति का जाति व्यवस्था से गहरा संबंध है. आधुनिक भारत में, स्वतंत्रता-पूर्व भारत की तरह, गरीब ज्यादातर ‘निम्न जाति’ हैं जबकि अमीर ‘उच्च जाति’ हैं. भारत में उच्च जाति अगड़ी जाति या सामान्य जाति भी कहा जाता है. अगड़ी जातियां को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों या अन्य पिछड़े वर्गों के अंतर्गत आने वाली अन्य जातियों की तुलना में औसतन आर्थिक और शैक्षिक रूप से ज्यादा सशक्त माना जाता है. अगड़ी जातियों में कई जातियां शामिल हैं जिसमें ब्राह्मण भी एक है.

किसी भी जाति के सभी लोग अमीर नहीं हो सकते या सभी लोग गरीब  नहीं हो सकते हैं. इसलिए ब्राह्मणों की आर्थिक स्थिति को गहराई से समझने के लिए हमें अंतर्जातीय असमानताओं को भी समझना होगा. परंपरागत रूप से शिक्षित समुदाय होने के नाते ब्राह्मणों के एक वर्ग की सभी क्षेत्रों में जबरदस्त भागीदारी है. ब्राह्मणों के इस वर्ग के कारण इस समुदाय का वर्चस्व सभी क्षेत्रों में कायम है.

लेकिन ब्राह्मण समुदाय का एक दूसरा ध्रुव भी है जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है. फ्रांसीसी पत्रकार फ्रेंकोइस गौटियर (Francois Gautier) ने अपने लेख “Are Brahmins the Dalits of today?” ब्राह्मणों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातों का खुलासा किया है. गौटियर ने एससी/एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण को गलत धारणाओं पर आधारित एक पूर्वाग्रहपूर्ण प्रवृत्ति माना है और रिजर्वेशन को तुष्टीकरण कि नीति बताया है. एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि ब्राह्मणों की अच्छी खासी आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है. ज्यादातर पुरोहित गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैं. उनके अनुसार आज के ब्राह्मणों को आसानी से सार्वजनिक शौचालयों की सफाई करते देखा जा सकता है. दिल्ली के पटेल नगर में 50 फीसदी रिक्शा चालक ब्राह्मण हैं. बनारस में ज्यादातर रिक्शा चालक ब्राह्मण हैं. आंध्र प्रदेश में पचहत्तर प्रतिशत घरेलू नौकर और रसोइया ब्राह्मण हैं. कश्मीरी ब्राह्मण अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रह रहे हैं. ब्राह्मण छात्रों का उच्च प्रतिशत आर्थिक कारणों से इंटरमीडिएट स्तर पर पढ़ाई छोड़ देता है.


References:
•https://www.hindustantimes.com/india/are-brahmins-today-s-dalits-in-india/story-GUMXtPlPb3v9XYXcEXPGHP.html

•https://www.bbc.com/news/world-asia-india-64286673

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