प्राचीन भारत और आधुनिक भारत के बीच के काल को मध्यकालीन भारत कहा जाता है. इस काल में भारत कई छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था. इस अवधि में कई महत्वपूर्ण राजवंशों का उदय हुआ जैसे राष्ट्रकूट वंश, गुर्जर-परिहार वंश, पल्लव वंश, पाल वंश, चोल वंश और सेन वंश आदि. आइए इसी क्रम में जानते हैं कि सेन वंश का संस्थापक कौन थे.
सेन राजवंश एक हिंदू राजवंश था जिसने 10वीं से 12वीं शताब्दी तक बंगाल क्षेत्र पर शासन किया था. यह मूल रूप से मध्यकालीन भारत के उत्तर-पूर्वी भाग पर शासन करता था. अपने चरम पर, भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश उत्तर-पूर्वी क्षेत्र पर इस राजवंश का शासन था. सेन साम्राज्य वर्तमान पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और आधुनिक नेपाल के कुछ हिस्सों में फैला हुआ था.
सेन वंश के शासन के दौरान कला, साहित्य, संस्कृति और वास्तुकला का उल्लेखनीय विकास हुआ. इस वंश के राजाओं ने हिन्दू धर्म के संरक्षण और पुनरुत्थान पर विशेष ध्यान दिया. इस वंश के राजाओं ने अनेक महत्वपूर्ण मंदिरों का निर्माण करवाया जिसमें बांग्लादेश के ढाका में स्थित प्रसिद्ध “ढाकेश्वरी मंदिर” का निर्माण 12वीं शताब्दी में सेन वंश के राजा बल्लाल सेन ने करवाया था. यह मंदिर बांग्लादेश में हिंदू संस्कृति और आस्था का प्रमुख केंद्र है. सेन राजाओं के शासनकाल में बंगाली साहित्य का उल्लेखनीय विकास हुआ.
आइए अब इस लेख के मुख्य विषय पर आते हैं और जानते हैं कि सेन वंश के संस्थापक (Founder of sen dynasty) कौन थे. सेन वंश के संस्थापक सामंत सेन (Samanta Sena) थे. पाल वंश के पतन के बाद सामंत सेन के नेतृत्व में सेन वंश का उदय हुआ था.सामंत सेन के बाद इस वंश के अन्य शासकों ने शासन किया, जिनमें हेमंत सेन, विजय सेन, लक्ष्मण सेन आदि प्रमुख सेन राजा थे. इतिहासकारों का मानना है कि सेन वंश के पूर्वज मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले थे.
References:
•The History of the Bengali Language by Bijay Chandra Mazumdar, p. 50.
•For a map of their territory, see: Schwartzberg, Joseph E. (1978). A Historical atlas of South Asia. Chicago: University of Chicago Press. p. 147, map XIV.3 (f). ISBN 0226742210.
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