हलबा या हल्बी (Halba or Halbi) भारत में निवास करने वाला एक आदिवासी जातीय समुदाय है. यह छत्तीसगढ़ में बहुतायत में पाए जाने वाली एक जनजाति है. यह जनजाति समूह 17वीं शताब्दी में बस्तर राज्य के प्रमुख और सबसे प्रभावशाली जनजातीय समूहों में से एक थी, और राजनीति और सेना में सक्रिय थी. इस जनजाति के लोग जीवन यापन के लिए मुख्य रूप से खेती और जंगलों पर निर्भर हैं. हालांकि यह अब रोटी के लिए अलग-अलग व्यवसाययों को भी अपनाने लगे हैं. भारत में इन की कुल जनसंख्या 7.5 लाख के करीब है. यह जनजाति छत्तीसगढ़ के बस्तर से महाराष्ट्र के विदर्भ तक फैला हुआ है. यह मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, गुजरात तेलंगना, आंध्र प्रदेश, आदि राज्यों में जाते हैं. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर और बस्तर जिलों में इनकी बहुतायत आबादी है. यह हिंदू धर्म तथा स्थानीय लोग धर्म का अनुसरण करते हैं. यह मां दंतेश्वरी देवी,मैलिमाता, गुसाईं-पुसाई, बुड़ादेव कुंवर देव आदि की पूजा करते हैं. यह मुख्य रूप से हल्बी, हिंदी, उड़िया और मराठी भाषा बोलते हैं. हल्बी भाषा उड़िया भाषा और मराठी का मिश्रित रूप है। आइए जानते हैं, हलबा समाज का इतिहास, हलबा शब्द की उत्पति कैसे हुई?
यह अलग-अलग नामों से जाने जाते हैं. इनके प्रचलित उपनाम हैं-नाइक, राउत, भोयार, नाइक, नादगे, कोठवर, घरैत, चूड़ी, पाखले, गवाद, हेडू, मेडके,येले, मानकर, चुलकर, शेरकर, मारगय, चंद्रपुर, भंडारा और भंडारी आदि. 1774 में विद्रोह में हार के बाद बस्तर से पलायन करके यह देश के विभिन्न हिस्सों में बस गए. देश के विभिन्न हिस्सों में बसने के बाद इन्होंने जीवन निर्वाह के लिए अलग-अलग व्यवसाय को अपना लिया.
हलबा मुख्य रूप से 4 उप समूहों में विभाजित है- पिंटिया हलबा, बुनकर हलबा, तेलिया हलबा और जादी/जादिया हलबा. पिंटिया हलबा– जो पलायन करके उड़ीसा में चले गए.
बुनकर हलबा– जो पलायन करके मध्य भारत के राज्यों में चले गए. अब यह मुख्य रूप से महाराष्ट्र में निवास करते हैं. यह 18वीं शताब्दी में पलायन करके महाराष्ट्र के नासिक, अहमदनगर, पुणे, मुंबई, भिवंडी आदि शहरों में आकर बस गए और जीविका चलाने के लिए बुनाई का पेशा अपना लिया. वर्तमान में केवल येवला, भिवंडी और भिंगर निवास करने वाले हलबा समुदाय के लोग बुनाई का काम करते हैं. तेलिया हलबा-यह छत्तीसगढ़ में निवास करते हैं.
हलबा शब्द की उत्पत्ति “हल” से हुई है. इस जनजाति के लोग हलवाहक (हल चलाने का काम) का काम किया करते थे. इसीलिए कालांतर में यह हलबा या हल्बी के नाम से जाने जाने लगे.
Last updated: 14/01/2022 11:11 pm
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