ब्राह्मण समुदाय भारत में प्रमुख सामाजिक समूहों में से एक है, जो पारंपरिक रूप से पुरोहित और विद्वानों के व्यवसायों से जुड़ा हुआ है. ब्राह्मण समुदाय के भीतर, क्षेत्रीय, भाषाई और सांस्कृतिक कारकों के आधार पर विभिन्न उपसमूह या विभाजन हैं. प्रत्येक उपसमूह की अपनी अनूठी सांस्कृतिक प्रथाएं, अनुष्ठान और परंपराएं होती हैं, जो समय के साथ ऐतिहासिक, भौगोलिक और सामाजिक कारकों द्वारा आकार लेती हैं. इसी क्रम में आइए जानते हैं कि महापात्र ब्राह्मण की उत्पत्ति कैसे हुई.
महापात्र ब्राह्मण (Mahapatra Brahmin) ब्राह्मण समुदाय के भीतर एक विशिष्ट उपसमूह है. यह संस्कृत शब्द “महा+पात्र” से लिया गया है, “महा” का अर्थ है महान, और “पात्र”, जिसका अर्थ है महान गुणों का धारक या रक्षक. इन्हें महा ब्राह्मण या कट्टहा ब्राह्मण भी कहा जाता है. ये मुख्य रूप से भारत के उड़ीसा राज्य में पाए जाते हैं. उड़ीसा के अलावा पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा राजस्थान और उत्तराखंड में भी इनकी आबादी है.
हिन्दूओं में कई प्रकार के पूजा-पाठ, कर्मकांड और संस्कारों का प्रावधान है और इसके आधार पर भी ब्राह्मणों में विभाजन पाया जाता है. महापात्र ब्राह्मण मृत्यु के पश्चात किए जाने वाले अनुष्ठानों के विशेषज्ञ माने जाते हैं, जिसे अंतिम संस्कार भी कहा जाता है. उनकी पहचान अंत्येष्टि पुजारी या मृतक का दाह कर्म कराने वाले ब्राह्मण के रूप में है. आपको बता दें कि हिंदू धर्म में बताए गए 16 संस्कारों में अंतिम संस्कार को अंतिम संस्कार माना जाता है. यह संस्कार व्यक्ति , की मृत्यु के बाद उसके परिजनों द्वारा किया जाता है, जिसमें महापात्र ब्राह्मणों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
आमतौर पर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार के इलाकों में ऐसा देखा गया है कि अंतिम संस्कार और श्राद्ध क्रिया कराने के कारण महापात्र ब्राह्मणों को अन्य ब्राह्मणों की तुलना में निम्न स्तर का समझा जाता है. जबकि पूजापाठ, जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार, विवाह और सत्यनारायण कथा आदि सभी कर्मकांड करवाने वाला ब्राह्मण अपेक्षाकृत श्रेष्ठ माना जाता है. ऐसा देखने में आया है कि मृतक के श्राद्ध कर्म तक यजमान का व्यवहार महापात्र ब्राह्मणों के प्रति अत्यंत आदरपूर्ण होता है, परन्तु श्राद्ध कर्म के बाद उनका व्यवहार बदल जाता है। और अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म करने वाले ब्राह्मणों को आम तौर पर शुभ अवसरों पर आमंत्रित नहीं किया जाता है.
जहां तक महापात्र ब्राह्मणों की उत्पत्ति का प्रश्न है, इनकी उत्पत्ति के बारे में कोई निश्चित इतिहासिक प्रमाण नहीं है. लेकिन माना जाता है कि वे उड़ीसा में व्यापक ब्राह्मण समुदाय से विकसित हुए हैं. अन्य ब्राह्मणों की तरह, महापात्र ब्राह्मणों को भी पारंपरिक रूप से हिंदू सामाजिक पदानुक्रम में पुजारी और विद्वान वर्ग माना जाता है. कई जानकारों का मत है कि महापात्र ब्राह्मण ब्राह्मणों के भीतर एक अलग उप-समूह नहीं है, बल्कि यह ब्राह्मणों में पाया जाने वाला एक उपनाम है जो ब्राह्मणों के विभिन्न उप-समूहों द्वारा उपयोग किया जाता है.
References:
•After Death
•How People Around the World Map the Journey After Life
By Sukie Miller, Suzanne Lipsett ·
•Bharatiya Dalit Sahitya: Pariprekshya
•https://hindi.newslaundry.com/amp/story/2019%2F03%2F04%2Fdalit-brahman-hindu-religion-bihar-caste-system-casteism
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