खटिक (खटीक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली एक जाति है. यह जाति दक्षिण एशिया में व्यापक रूप से फैली हुई है. भारत, नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इनकी आबादी है. भारत में यह मुख्य रूप से गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगना, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली, झारखंड, तमिलनाडु और कर्नाटक में निवास करते हैं। यह हिंदू और मुस्लिम दोनों हो सकते हैं. भारत में अधिकांश खटीक हिंदू हैं, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश में ज्यादातर खटिक मुस्लिम हैं. आइए जानते हैैं खटिक जाति का इतिहास, खटिक शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?
आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत इस जाति को भारत के कुछ राज्यों में अनुसूचित जाति (Scheduled Caste), तो कहीं अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. कहीं-कहीं इन्हें सामान्य वर्ग में भी शामिल किया गया है. गुजरात, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इन्हें ओबीसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है. उत्तर प्रदेश हिमाचल प्रदेश राजस्थान पंजाब हरियाणा महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में इन्हें अनुसूचित जाति के में शामिल किया गया है.
सर एच. रिस्ले ने खटिकों को खेती करने वाली और सब्जी बेचने वाली जाति के रूप में वर्णित किया है.आजीविका के आधार पर इन्हें विभिन्न उप समूहों में विभाजित किया गया है. जिसमें से प्रमुख हैं- खेतिहर किसान और मेवाफरोश.खेतिहर किसान खेती-बाड़ी करते हैं. मेवाफरोश फल और मेवा बेचने का काम करते हैं, और इन्हें सोनकर के नाम से भी जाना जाता है. इनके प्रमुख उप विभाजन हैं- मेवाफरोश, सूर्यवंशी, सोनकर, चक, चुंगन और अरेकतिका.
खटिक शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द “खट्टीका” से हुई है, जिसका अर्थ होता है- कसाई या शिकारी. खटिक मूल रूप से वो जाति है जिनका काम प्राचीन काल में याज्ञिक पशु बलि देना होता था. प्राचीन काल में यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों में बकरे की बलि दी जाती थी. यह मंदिरों में भी पशु बलि देने का कार्य करते थे. पुराणों में खटक ब्राह्मणों का उल्लेख का उल्लेख किया गया है. कहा जाता है कि इनके हाथों से दी गई बली ही स्वीकार होती थी.
इस समुदाय के उत्पत्ति के बारे में कई मान्यताएं हैं। यह खुद को इक्ष्वाकु वंश के राजा खतवांग का वंशज मानते हैं. इक्ष्वाकु वंश में ही भगवान राम का जन्म हुआ था. गुजरात में इन्हें ‘खाटकी’ और राजस्थान मे “खटीक” कहा जाता है. यह खटीक राजपूत या क्षत्रिय वंश का होने का दावा करते हैं. इनका मानना है कि पहले यह उच्च कोटि के योद्धा थे. ऐतिहासिक कारणों के कारण इन्हें अन्य व्यवसाय को अपनाना पड़ा.
दूसरी मान्यता अनुसार राजस्थान के खटीक इस बात का दावा करते हैं कि जब भगवान परशुराम क्षत्रियों का संहार करने लगे, तब इन्हें अपनी पहचान छुपाकर अपना पेशा बदलना पड़ा. उन्हीं के वंशज आज खटीक के नाम से जाने जाते हैं.
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