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सैनी समाज की कुलदेवी, जातियों के अलग-अलग या समान कुलदेवी और कुलदेवता होते हैं

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प्रत्येक व्यक्ति किसी विशेष जाति या वंश में जन्म लेता है. उसके मन, बुद्धि और व्यक्तित्व का निर्माण उस परिवार के वातावरण, शिक्षा और संस्कारों से होता है और वह व्यक्ति उस परिवार की कुल-परंपराओं से बंध जाता है. लोग अपनी जाति के साथ-साथ अपने पूर्वज, कुल, गोत्र, कुलदेवता और कुलदेवी के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं. आइए इसी क्रम में जानते हैं सैनी समाज की कुलदेवी के बारे में.

सैनी समाज की कुलदेवी

उत्तर-पश्चिमी भारत में सैनी समाज का बहुत ही उज्ज्वल और स्वर्णिम इतिहास रहा है. यह मूल रूप से एक किसान-जमींदार समुदाय है जिसकी उत्तर भारत के कई राज्यों में उपस्थिति है. इनकी उत्पत्ति के संदर्भ में अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जो इनके गौरवशाली इतिहास को दर्शाती हैं. इस समुदाय के कुछ लोग ब्राह्मण वंश से अपनी उत्पत्ति का दावा करते हैं. जबकि अधिकांश लोग अपने को क्षत्रिय मानते हैं. माना जाता है कि प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इन्होंने अपनी आजीविका के लिए कृषि और बागवानी को अपना लिया. भारत के हिंदू हजारों वर्षों से अपनी कुलदेवी और देवता की पूजा करते आ रहे हैं. माना जाता है कि कुलदेवी के नाराज होने से परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. जन्म, विवाह आदि शुभ कार्यों में कुलदेवी या देवताओं के स्थान पर जाकर उनके नाम से उनकी पूजा या स्तुति करना अनिवार्य माना गया है.

अलग-अलग जातियों के अलग-अलग या समान कुलदेवी और कुलदेवता होते हैं. उदाहरण के लिए विभिन्न कुलों के क्षत्रिय राजपूत अपनी कुलदेवी के रूप में अलग-अलग देवियों की पूजा करते हैं, जैसे भाटी वंश की माता स्वागिया, चौहान वंश की माता आशापुरा, सिसोदिया कुल की वाम माता, कछवाहा कुल की जमवाय माता की पूजा करते हैं.सैनी समाज की बात करें तो यह समुदाय कई गोत्रों और खापों में बंटा हुआ है. विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन खापों और गोत्रों में विभिन्न कुलदेवी-देवताओं की पूजा करने की परंपरा है. सैनी समाज के विभिन्न उपसमूह संगिया (चामुंडा), भावलमाता, आशापूर्णा, जीणमाता, आशापूर्णा, चामुंडा, रूनायक, सांचिया, ब्राह्मणीमाता, जाखणमाता, खिंवजमाता, जालपमाता / जीणमाता, बाणमाता, नागणेश्वरी माता, गाजल माता, और सागरजीणमाता आदि को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं.

Last updated: 13/03/2023 11:53 am

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