मल, मल्ल या मल्ला (Mal or Malla) भारत और बांग्लादेश में पाया जाने वाला एक जातीय समुदाय है.भारत में यह मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और झारखंड में पाए जाते हैं. थोड़े-बहुत संख्या में यह बिहार और असम में भी निवास करते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इनकी आबादी 3,06,234 थी. धर्म से यह हिंदू और मुसलमान दोनों हो सकते हैं. भारत में रहने वाले ज्यादातर मल्ल हिंदू धर्म को मानते हैं.यह कई उप समूहों में विभाजित हैं. जैसे -राजा मल, छत्रधारी मल, सपुरे मल और मल पहाड़िया.राजा मल; बंगाल-झारखंड सीमावर्ती क्षेत्र के शासक थे. छत्रधारी मल; राजा मल के मंत्री हुआ करते थे. सपुरे मल; मुख्य रूप से सपेरे होते हैं. मल पहाड़िया; आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में निवास करते हैं.यह हिंदी, बंगाली, असमिया और मैथिली भाषा बोलते हैं. आइए जानते हैं मल जाति का इतिहास, मल शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?
मुस्लिम मल सुन्नी इस्लाम को मानते हैं. इन्हें बेसाती मल या चूड़ीवाला भी कहा जाता है. मुस्लिम मल रूप से हिंदू थे, जो लगभग 9 शताब्दी पहले, धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन गए. मुस्लिम मल मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी भारत और पश्चिमी बांग्लादेश में निवास करते हैं.भारत में यह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, 24 परगना, मिदनापुर, बीरभूम और हावड़ा जिलों में निवास करते हैं. यह मुख्य रूप से एक भूमिहीन समुदाय है. इस समुदाय के कुछ सदस्य छोटे-मोटे किसान हैं. यह परंपरागत रूप से फेरी लगाकर चूड़ियां और अन्य पारंपरिक आभूषण बेचने के कार्य से जुड़े हुए हैं.
पश्चिम बंगाल और और झारखंड में पहाड़िया मल या मल पहाड़िया को अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe, ST) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. जबकि अन्य मल उप समूहों को अनुसूचित जाति (Scheduled Caste, SC) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार ने मुस्लिम मल को अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Classes, OBC) के रूप में सूचीबद्ध किया है.
मल्ल या मल्ला शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द “मल्ल” से हुई है, जिसका अर्थ होता है-“पहलवान”. इस जाति के लोग द्वंद्वयुद्ध में माहिर होते थे. इसलिए द्वंदयुद्ध /मल्ल युद्ध या कुश्ती लड़ने के कारण इनका नाम मल्ल पड़ा.
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