मनिहार (Manihar) भारत में पाई जाने वाली एक मुस्लिम जाति है.उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में इन्हें सौदागर के नाम से जाना जाता है. इस समुदाय के लोगों का मुख्य पेशा व्यवसाय करना है, इसीलिए इन्हें मुस्लिम स्वर्ण कहा जाता है. यह मुख्य रूप से उत्तर भारत, पाकिस्तान के सिंध प्रांत और नेपाल के तराई इलाकों में निवास करते हैं. कहा जाता है कि मूल रूप से ये कबीला पठानों की एक जंगी कबीला हुआ करती थी, जो भारत में आने के बाद कारोबार में शामिल हो गई. यह फेरीवालों की जाति है. यह चश्मा, बक्से, मौजा, सुई और धागा, नकली आभूषण आदि बेचने का काम करते हैं. मनिहार कांच की चूड़ियां और कंगन बनाने का काम करते हैं, और यह मध्य भारत की कचेरा जाति के समान हैं. मनिहार वैसे तो मुसलमान हैं, लेकिन वे कई रीति रिवाज हिंदुओं के समान हैं. आइए जानते हैं मनिहार जाति का इतिहास, मनिहार जाति की उत्पति कैसे हुई?
इनके उत्पत्ति के बारे में मुख्य रूप से दो मान्यताएं हैं.
पहली माान्यत : भारतीय सिद्धांत के अनुसार, इनके पूर्वज मूल रूप से राजपूत थे जो राजपाट त्याग कर इस्लाम कबूल करके मुसलमान बन गए. इस सिद्धांत के समर्थन में तर्क दिया जाता है कि इनके रीति रिवाज हिंदुओं से मिलते हैं तथा इनकी उपजातियों के नाम भी राजपूत उपजातियों से काफी मिलते हैं जैसे-सोलंकी, चौहान, भट्टी, बैसवारा, आदि.
दूसरी मान्यता: मध्य एशियाई मान्यता के अनुसार, यह गजनी में शासकों के यहां वाणिज्य से संबंधित काम करते थे. इनकी औरतें लड़ाकू क्षत्रिय थी जो 1000 ईसवी में महमूद गजनवी के साथ भारत आए और फिरोजाबाद के आस-पास बस गए.
इनकी प्रमुख उपजातियां हैं-मनिहार, बैसवारा, शेख़ावत, चौहान, पाण्ड्या, कछानी, शेख़, इसहानी, लोहानी, सैय्यद, खोखर, मुग़ल, ग़ोरी, कसाउली, भनोट, राठी और अली.यह सिद्दीकी उपनाम का प्रयोग करते हैं.यह सुन्नी इस्लाम को मानते हैं.
यह राजस्थान में, मनिहार झुंझुनू, जयपुर, सीकर, चुरू और अजमेर जिलों में पाए जाते हैं. यह चूड़ी बनाने का कार्य तथा लाख और सीलिंग वैक्स के व्यापारी हैं. यहां यह 3 क्षेत्रीय समूहों में विभाजित हैं-शीशगर, शेखावाटी और पदिया. क्षेत्रीय समूह कुलों में विभाजित हैं, जिनमें प्रमुख हैं-बलारा, चौहान, कसाली, गोरी, नौसल, सैय्यद, मिल्की, किदवई, बठोत, शेख और मुगल. गुजरात में इन्हें शेख साहब के नाम से जाना जाता है. यहां यह फिरोक से अहमदाबाद, कच्छ, खेड़ा, जामनगर और वडोदरा जिलों में निवास करते हैं. यह दावा करते हैं कि यह सिंध से आए है. यहां इनके तीन वंश हैं- लोदानी, कचनी और ईशानी.
Last updated: 13/01/2022 12:40 pm
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