संस्कृति को देश की आत्मा कहा जाता है. भारतीय संस्कृति न केवल विश्व की सबसे पुरानी संस्कृतियों में से एक है, बल्कि यह बहु-आयामी है और इसमें कई रंग हैं. भारत के लोग अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, अलग-अलग धर्मों का पालन करते हैं, इनके खान-पान में भी विविधता है. लेकिन इतनी विविधताओं के बावजूद भारत अनेकता में एकता का संदेश देता है.
भारत की संस्कृति को समृद्ध बनाने में भारतीय कलाओं का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है. विभिन्न जातियों और समुदायों के कलाकारों ने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर भारतीय संस्कृति को समृद्ध करने का काम किया है. आइए इसी क्रम में जानते हैं नाई जाति के अभिनेता के बारे में.
कला को संस्कृति की वाहिका कहा जाता है. प्राचीन हिंदू ग्रंथों में 64 कलाओं का उल्लेख मिलता है. चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, संगीत, साहित्य, नृत्य और नाट्यकला आदि भारतीय कला के विभिन्न रूप हैं. कला का स्वरूप कोई भी हो लेकिन इसे हमारे आंतरिक विचारों भावनाओं और अनुभवों के रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम माना गया है. कला का चाहे कोई भी रूप हो लेकिन किसे समाज और संस्कृति का प्रतिबिंब माना जाता है. अभिनय एक कला रूप है जिसमें एक अभिनेता या अभिनेत्री दर्शकों के सामने कहानी को प्रस्तुत करते हैं.
अब आते हैं अपने मूल प्रश्न पर और जानते हैं नाई जाति के अभिनेता के बारे में. अन्य जातियों के बाद नाई जाति के अभिनेताओं का भी फिल्म, टेलीविजन और थिएटर अभिनेताओं के रूप में अभिनय की कला को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इनमें से कई क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों में भी काम कर रहे हैं. लेकिन इनमें से ज्यादातर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अभी तक कोई बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर पाए हैं. यही वजह है कि आम जनता इनके बारे में नहीं जानती. लेकिन यहां पर भिखारी ठाकुर के के नाम का उल्लेख करना आवश्यक है. भिखारी ठाकुर को ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ कहा जाता है. उनका जन्म बिहार के सारण जिले में एक नाई परिवार में हुआ था. वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. एक अभिनेता होने के साथ-साथ वाह एक कवि, नाटककार, संगीतकार, समाज सुधारक, गायक और नर्तक भी थे. वह अपने नाटकों के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वासों पर प्रहार करते थे. ‘विदेशिया’ उनकी प्रमुख कृति है. भिखारी ठाकुर ने ‘विदेसिया’ पर एक फिल्म का निर्माण किया जिसमें उन्होंने अभिनय भी किया.
References:
•Leiter, Samuel L. (2007). Encyclopedia of Asian Theatre: A-N. Greenwood Press. p. 61. ISBN 9780313335297.
•The Journal of the Bihar Purāvid Parishad, Vol. 19-20. Bihar Purāvid Parishad. 1995.
•Shalaja Tripathi. “On the Shakespeare of Bhojpuri”. The Hindudate=16 June 2012. Retrieved 2 January 2015.
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