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नाइकड़ा (Naikda) समाज का इतिहास, नाइकड़ा की उत्पति कैसे हुई?

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नाइकड़ा या नैकदा (Naikda) भारत में पाई जाने वाली एक जनजाति है. इन्हें विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे महाराष्ट्र में इन्हें कातकरी  (Katkari) के नाम से जाना जाता है. कातकरी की उत्पत्ति “कथोरी” (kathori) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ होता है-“जानवरों का खाल”.जीवन यापन के लिए यह जमीन और कृषि पर निर्भर हैं. हालांकि, इस समुदाय में कई ऐसे लोग हैं जो भूमिहीन हैं जो जीवन निर्वाह के लिए आसपास के औद्योगिक इकाइयों में काम करते हैं.भारत सरकार के सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था रिजर्वेशन सिस्टम के अंतर्गत इन्हें गुजरात और महाराष्ट्र राज्य में अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribe, ST) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. नाइकड़ा मुख्य रूप से गुजरात और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं. गुजरात में यह मुख्य रूप से दक्षिण गुजरात के सूरत जिले में पाए जाते हैं. आइए जानते हैैं नाइकड़ा समाज का इतिहास, नाइकड़ा की उत्पति कैसे हुई?

नाइकड़ा समाज एक परिचय

नाइकड़ा समाज में बाल विवाह का प्रचलन है. कई मामलों में लड़कों की शादी 16 से 18 साल की आयु, जबकि लड़कियों की शादी 12 से 14 साल की उम्र में कर दी जाती है. हालांकि, शिक्षा के प्रसार के कारण धीरे-धीरे यह स्थिति बदल रही है. आमतौर पर इनमें एक ही बार विवाह करने की प्रथा है. यानी कि यह एकपत्नीत्व (monogamy) का पालन करते हैं. लेकिन इनमें कहीं-कहीं बहु विवाह का मामला भी देखा गया है. पति या पत्नी के बांझपन, व्यभिचार या मानसिक बीमारी की स्थिति में तलाक की अनुमति है. बच्चों के भरण-पोषण में ज्यादा सक्षम होने के कारण, तलाक के बाद, बच्चों की कस्टडी सबसे ज्यादा पिता को दी जाती है. विधवा और विधुर पुनर्विवाह की अनुमति है और इसे पैट (pat) कहा जाता है. विधवा और विधुर पुनर्विवाह समारोह केवल रात में किया जाता है.यह नाइकी (Naiki), गुजराती, मराठी और हिंदी बोलते हैं. नाइकी एक ऐसी बोली है जो मराठी और गुजराती भाषा का मिश्रण है.

नाइकड़ा की उत्पत्ति कैसे हुई?

नाइकड़ा एक वीर जनजाति है. ऐसी मान्यता है कि पुराने समय में यह स्थानीय राजाओं की सेनाओं में सैनिक थे.नाइकड़ा शब्द की उत्पत्ति संभवत: “नाइक” (Naik) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ होता है-“सेनापति” (commander). समय के साथ नाइक शब्द में बदलाव हुआ और कालांतर में इन्हें नाइकड़ा के नाम से जाना जाने लगा. नाइकड़ा इस क्षेत्र में पाए जाने वाले एक अन्य आदिवासी समुदाय धोडिया (Dhodia) से समान उत्पत्ति साझा करते हैं, यानी कि दोनों एक ही वंश के हैं. नाइकड़ा और धोडिया समुदाय के लोग रूपा खत्री (Rupa Khatri) और धना खत्री (Dhana Khatri) नाम के दो भाइयों से अपनी उत्पत्ति का दावा करते हैं. इनकी मान्यताओं के अनुसार, नाइकड़ा की उत्पत्ति रूपा खत्री से हुई है, जबकि धोडिया धना खत्री के वंशज हैं.

नाइकड़ा विद्रोह

इनका इतिहास स्वर्णिम, गौरवशाली और बलिदानों से भरा है. इन्होंने अन्याय और अत्याचार के सामने कभी घुटने नहीं टेके और हमेशा इसका डटकर मुकाबला किया. इसका उदाहरण है 1858 और 1868 में इस जनजाति द्वारा किया गया विद्रोह, जिसे नाइकड़ा विद्रोह (Naikda Revolt) के नाम से जाना जाता है. यह विद्रोह गुजरात के पंचमहल हिल्स के नाइकड़ा वन जनजाति के लोगों ने ब्रिटिश शासन के विस्तारवाद और हस्तक्षेप के खिलाफ किया था. इसका नेतृत्व रूप सिंह और जोरिया भगत ने किया था. इस विद्रोह का उद्देश्य अंग्रेजों का शासन खत्म करके धर्म-राज को स्थापित करना था.

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