History

पाल और सेन वंश सांस्कृतिक दृष्टि से कितना महत्वपूर्ण?

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मध्यकालीन भारत में मुस्लिम शासन के आने से पहले बंगाल की भूमि पर दो महत्वपूर्ण राजवंशों का उदय हुआ- पाल वंश और सेन वंश. पाल शासकों ने लगभग 4 शताब्दियों तक बंगाल पर शासन किया. सेन वंश के शासकों ने 160 वर्षों तक बंगाल पर शासन किया. इतिहासकार इन दोनों राजवंशों के शासन को राजनीतिक दृष्टि से कम सांस्कृतिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं. आइए इसी क्रम में पाल और सेन वंश के बारे में जानते हैं.

पाल वंश (The Pala Dynasty)

•संस्थापक-
पाल वंश की स्थापना गोपाल ने 750 ईस्वी में की थी. गोपाल इस वंश के प्रथम सम्राट थे. पाल वंश ने 8वीं से 12वीं शताब्दी तक शासन किया.

•राजधानी-
•बिक्रमपुर, गौड़ और मुंगेर पाल शासकों की राजधानी थी.

•प्रमुख शासक-
गोपाल, धर्मपाल, देवपाल, नारायण पाल, महिपाल प्रथम और नयपाल पाल वंश के प्रमुख शासक थे.

•पतन-
पाल वंश के शासक रामपाल के शासन काल के बाद इस राजवंश की स्थिति डांवाडोल हो गई और कालांतर में इस राज वंश का पतन हो गया.

•महत्व-
पाल बौद्ध धर्म के कट्टर समर्थक थे. पाल वंश के संस्थापक गोपाल को बंगाल का पहला बौद्ध शासक माना जाता है. पाल शासकों के काल में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता था. पाल राजाओं ने बौद्ध धर्म के उत्थान के लिए कई बौद्ध मठों और स्तूपों का निर्माण करवाया. नारायण इस वंश के एक शक्तिशाली राजा थे. अपने पूर्वजों के विपरीत वह शैव धर्म के अनुयाई थे. उन्होंने अपने शासनकाल में 1000 से अधिक शिव मंदिरों का निर्माण करवाया.

सेन वंश ( The Sena Dynasty)

•संस्थापक
सेन वंश का संस्थापक सामंत सेन थे. उन्होंने पाल वंश के पतन के बाद सेन वंश की स्थापना किया. सेन वंश ने 10वीं से 12वीं शताब्दी तक शासन किया.

•राजधानी-
सेन शासकों की राजधानी के रूप में गौड़, बिक्रमपुर, नवद्वीप और लखनऊती आदि का उल्लेख मिलता है.

•प्रमुख शासक-
सेन के प्रमुख शासकों के नाम इस प्रकार हैं-हेमंत सेन, विजय सेन, बल्लाल सेन और लक्ष्मण सेन.

•पतन-
सेन वंश के शासक लक्ष्मण सेन के राज्य पर के 1199 में मुसलमानों का आक्रमण हुआ. कालांतर में सेन वंश का पतन हो गया.

•महत्त्व-
सेन शासकों के शासनकाल में हिंदू धर्म के प्रचार और संरक्षण पर अधिक ध्यान दिया गया. सेन शासकों ने कई महत्वपूर्ण हिंदू मंदिरों का निर्माण कराया, जिनमें ढाका का ढाकेश्वरी मंदिर सबसे प्रसिद्ध है. गीतगोविंद के रचयिता कवि जयदेव सेन वंश के शासक लक्ष्मण सेन के पंचरत्न थे.


References:
Madhyakalin Bharat Ka Itihas (in Hindi)
By Shailendra Sengar · 2005

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