भारतीय समाज के ऐतिहासिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए भारत में आरक्षण की व्यवस्था शुरू की गई थी. अगर जाति आधारित आरक्षण की बात करें तो 1882 में विलियम हंटर और ज्योतिराव फुले ने मूल रूप से जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की कल्पना की थी. इसी क्रम में आइए जानते हैं कि सैनी जाति एससी है या ओबीसी.
इस लेख की विषयवस्तु पर आने से पहले आरक्षण की मूल बातें तथा एससी और ओबीसी के बीच के अंतर को समझना जरूरी है. आरक्षण एक संवैधानिक प्रावधान है जिसका उद्देश्य भारत में पिछड़े समुदायों की सामाजिक और शैक्षिक स्थिति को ऊपर उठाना है. सकारात्मक भेदभाव की इस प्रणाली के तहत मुख्य रूप से सभी 4 समूहों को आरक्षण दिया जाता है: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS). अनुसूचित जाति (एससी) आधिकारिक तौर पर लोगों के नामित समूह हैं और भारत में सबसे वंचित सामाजिक-आर्थिक समूहों में से हैं. अनुसूचित जाति भारत के संविधान के अनुसार दलितों के लिए आधिकारिक शब्द है. दलित, जिसे पहले अछूत के रूप में भी जाना जाता था, भारत में जातियों के सबसे निचले तबके से संबंधित लोगों का एक नाम है. इस प्रकार से, अनुसूचित जातियां उन अछूत जातियों के लिए आधिकारिक तौर पर नामित शब्द है जिनके साथ सबसे अधिक भेदभाव किया गया था. ओबीसी यानी पिछड़ी जातियों की बात करें तो सामाजिक पदानुक्रम में यह समूह सवर्ण जातियों से नीचे और अनुसूचित जातियों से ऊपर आता हैं. ओबीसी मुख्य रूप से सामाजिक शैक्षणिक और आर्थिक रूप से वंचित समूह है जो मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन व्यवसाय में शामिल रहा है. ओबीसी खुद को अनुसूचित जाति (एससी) से बेहतर मानते हैं.
ओबीसी समुदाय में शामिल जातियों के साथ जातिगत भेदभाव भी हुआ है, लेकिन आम तौर पर इन्हें छुआछूत का दंश नहीं झेलना पड़ा है.
सैनी जाति की बात करें तो यह मुख्यतः किसानों की जाति रही है. इस समुदाय के लोग पूर्व में जमींदार भी रहे हैं. सामान्यतः इनकी स्थिति मध्य जातियों के समान रही है, परन्तु कुछ स्थानों पर यह समुदाय अत्यधिक प्रभावशाली रहा है. इनकी सामाजिक शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति दलित समूहों से बेहतर रही है. उपरोक्त कारणों से सैनी समुदाय कभी भी अनुसूचित जाति का हिस्सा नहीं रहा है. भारत के कई राज्यों में सैनी जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में वर्गीकृत किया गया है.
References:
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