Religion

सैनी गोत्र इन राजस्थान, ओबीसी समुदाय की कई जातियां राज्य में निवास करती हैं

Share
Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।

राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है जो अपने ऐतिहासिक महत्व और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है. परंपराओं, धर्मों, प्रथाओं, रीति-रिवाजों और जातीयताओं के मामले काफी विविधता है इसीलिए इसे रंग बिरंगा राज्य भी कहा जाता है. राजस्थान जातीय रूप से भी एक विविध राज्य है जहां बड़ी संख्या में विभिन्न जातीय समूह निवास करते हैं जो राज्य की जनसंख्या का गठन करते हैं. आइए इसी क्रम में जानते हैं राजस्थान में सैनी जाति के गोत्र के बारे में.

राजस्थान में सैनी जाति के गोत्र

राजपूत, ब्राह्मण, जाट, मुस्लिम, बिश्नोई, भील, मीणा, गुर्जर, आदिवासी और चरण आदि राजस्थान के महत्वपूर्ण जातीय समूह हैं.राजस्थान की प्रभावशाली जातियों में जाट, गुर्जर, मीणा, राजपूत और ब्राह्मण प्रमुख हैं. सैनी समेत ओबीसी समुदाय की कई जातियां राज्य में निवास करती हैं. सैनी पारंपरिक रूप से खेती करने वालों, जमींदारों और बागवानों की जातियों में से एक है. सैनी जाति को कई जगहों पर माली या फूलमाली भी कहा जाता है. राजस्थान में अन्य जातियों की तरह सैनी समुदाय भी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. राज्य में सैनी समुदाय के लिए अलग आरक्षण की मांग अब मुखर होती जा रही है. सैनी, माली और कुशवाहा समुदाय के लोग लंबे समय से अलग 12% आरक्षण की मांग कर रहे हैं और इसके लिए कई बार आंदोलन भी किया जा चुका है. राजस्थान में गोत्रों के महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि विवाह संबंधों के लिए ही नहीं बल्कि राजनीति में भी गोत्रों की भी चर्चा होने लगी है. प्रदेश की राजनीति में जाति का दबाव इतना बढ़ गया है कि अब इसमें गोत्र की भूमिका भी बढ़ गई है. अब एक ही जाति के भीतर एक गोत्र से दूसरे गोत्र में होड़ बढ़ गई है. मीणा, गुर्जर, जाट, ब्राह्मण और राजपूत आदि मतदाताओं में यह चलन साफ ​​देखा जा सकता है. सैनी समुदाय की बात करें तो राजस्थान में सैनी समाज के 50 से अधिक गोत्र हैं जो स्वभाव से बहिर्विवाही हैं. राजस्थान में पाए जाने वाले प्रमुख सैनी गोत्र इस प्रकार हैं-


(A)

अमचिया (Amchia)

अग्रवाल (Agarwal)

(B)

बलान (Blan)

बागरी (Bagri)

बबेरवाल (Baberwal)

बंदलेवेल (Bandlewel)

बेनासे (Benase)

बनारा (Banara)

भानपुरिया (Bhanpuria)

बिसनलिया (Bisnalia)

(C )

चौहान (Chauhan)

चित्रेवल (Chitreval)

(D)

दहिया (Dahiya)

(G)

गुन्नीदहिया (Gunnidahiya)

(H)

हिंदोमिया (Hindomia)

हरथुमिया (Harthumia)

(K)

कच्छवा (Kachchawa)

कानबू (Kanboo)

कलावत (Kalawat)

कोलावत (Kolawat)

कटारिया (Kataria)

किरोमीवार (Kiromiwar)

कोलोतिया (Kolotia)

कुराड़िया (Kuradia)

खदोरिया (Khadoria)

(M)

मावर (Mawar)

मुंडेउरिया (Mundeuaria)

(N)

निमकिरोनिवार (Nimkironiwar)

(P)

परिहार (Parihar)

(S)

सांखला (Sankhla)

सिरगोदिया (Sirgodia)

सुइबाल (Suibals)

(T)

तोमर (Tomar)

टोंडवाल (Tondwal)

टाक (Tak)

तेनजरिया (Tenjaria)


References:

•Rajasthan, Part 2, 1998

•https://www.bbc.com/hindi/india/2013/11/131122_rajasthan_politics_gotra_division_dil

This website uses cookies.

Read More