भारत में सामाजिक स्तरीकरण की एक विशेष व्यवस्था पायी जाती है जिसे वर्ण व्यवस्था के नाम से जाना जाता है. वर्ण व्यवस्था जाति/वर्ण पर आधारित सामाजिक स्तरीकरण की एक प्राचीन व्यवस्था है. इस व्यवस्था के तहत समाज को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बांटा गया है- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र. आइए इसी क्रम में जानते हैं सैनी क्षत्रिय के बारे में.
सैनी ऐतिहासिक रूप से उत्तर भारत में पाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण जमींदार और कृषक जाति है. उत्तर भारत के कई राज्यों में इनकी अच्छी खासी आबादी है. इनकी उत्पत्ति के बारे में अलग-अलग कहानियां प्रचलित हैं. इनमें से कई ब्राह्मण वंश से अपनी उत्पत्ति का दावा करते हैं. जबकि समाज के अधिकांश लोगों का मानना है कि सैनी समाज की उत्पत्ति क्षत्रियों से हुई है. इस लेख की विषय वस्तु को ध्यान में रखते हुए यहाँ हम मुख्य रूप से सैनी समाज की क्षत्रिय उत्पत्ति के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे. इसके साथ ही हम उन तथ्यों को भी जानेंगे जो सैनी समाज की क्षत्रिय पहचान को मजबूत करते हैं.
एक मत के अनुसार, सैनी समाज के लोग पंजाब के राजा शूरसेन के वंशज होने का दावा करते हैं. जालंधर और होशियारपुर जिलों के सैनी इन राज्यों पर शासन करने वाले यदुवंशी या शूरसेन वंश के राजपूतों के वंशज होने का दावा करते हैं, जो इन क्षेत्रों में इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन से बचने के लिए आए थे. इस समुदाय के लोगों का दावा है कि वे मूल रूप से राजपूत थे. मुस्लिम आक्रमणकारियों के आक्रमण के कारण राजपूतों के एक वर्ग को अपनी जान बचाने के लिए बागवानी का पेशा अपनाना पड़ा, जो बाद में सैनी या फूलमाली के नाम से जाने जाने लगे. एक अन्य मान्यता के अनुसार सैनी समाज के लोग सूर्यवंशी क्षत्रिय भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न के वंशज होने का दावा करते हैं. ऐसा माना जाता है कि महाराजा शूरसैन शत्रुघ्न के पुत्र थे. शूरसैन के पुत्र शूर सैनी हुए, जिनसे सैनी समुदाय की उत्पत्ति मानी जाती है.
सैनी समाज की उत्पत्ति के सम्बन्धित उपरोक्त मतों से इस बात की पुष्टि होती है कि सैनी एक क्षत्रिय जाति है.ब्रिटिश काल के दौरान सैनियों को एक वैधानिक कृषि जनजाति और बाद में, एक मार्शल जाति दोनों के रूप में वर्गीकृत किया गया था. परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार जोगिंदर सिंह सहनन और कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया सैनी जाति के थे. सैनी समाज का गौरवशाली सैन्य इतिहास भी सैनी समुदाय की क्षत्रिय पहचान को मजबूत करता है.
References:
•Rajasthan, Part 2, 1998
Editor:K. S. Singh
•Surasena refers to an ancient region named after a Jadu raja who is believed to have lived before Krishna. Bayana (near Mathura) from where the Jadus ruled …” Against History, Against State: Counterperspectives from the Margins, p 54, Shail Mayaram, published by Permanent Black, 2004
•Mazumder, Rajit K. (2003). The Indian army and the making of Punjab. Orient Blackswan. pp. 99, 105, 205. ISBN 978-81-7824-059-6.
•https://www.bhaskar.com/harayana/kaithal/news/haryana-news-the-history-of-saini-society-is-glorified-jagdish-072046-4490700.html
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