संथाल (Santal or Santhal) भारत में निवास करने वाला एक मूलनिवासी जातीय समूह है. आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत इन्हें अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribe, ST) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. यह मूल रूप से पूर्वी भारत के राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार, असम और त्रिपुरा में पाए जाते हैं. जनसंख्या की दृष्टि से यह झारखंड में सबसे बड़ी जनजाति है. भारत के अलावा बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में भी इनकी अच्छी खासी आबादी है. उत्तरी बांग्लादेश में स्थित राजशाही डिविजन और रंगपुर डिविजन में यह सबसे बड़े जातीय अल्पसंख्यक हैं. धर्म से यह हिंदू, सरना या क्रिश्चियन हो सकते हैं. लगभग 63% संथाल हिंदू धर्म का पालन करते हैं और हिंदू देवी -देवताओं की पूजा करते हैं. लगभग 31% संथाल अपने लोक धर्म ,सरना धर्म, का अनुपालन करते हैं. वहीं, 5% संथाल ईसाई धर्म को मानते हैं.यह संथाली भाषा बोलते हैं, जो एस्ट्रोएशियाटिक भाषा परिवार की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है. संथाली के अलावा यह हिंदी, बंगाली, उड़िया और नेपाली भाषा बोलते हैं. आइए जानते हैं संथाल जनजाति का इतिहास, संथाल शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?
संथाल संभवत: बंगाली भाषा से लिया गया एक उपनाम है. इस शब्द का अर्थ होता है-साउंट के निवासी, जो अब पश्चिम बंगाल के मिदनापुर क्षेत्र में है, जो संतालों की पारंपरिक मातृभूमि है. इनका जातीय नाम होर होपोन जिसका अर्थ होता है-“मानव जाति के पुत्र”.
भाषाविद् पॉल सिडवेल (Paul Sidwell) के अनुसार, ऑस्ट्रोएशियाटिक भाषा बोलने वाले संभवतः लगभग 4000-3500 साल पहले इंडोचीन से ओडिशा के तट पर पहुंचे थे. यह दक्षिण पूर्व एशिया से फैल गए और स्थानीय भारतीय आबादी के साथ व्यापक रूप से मिश्रित हो गए. महत्वपूर्ण पुरातात्विक अभिलेखों की कमी के कारण, संथालों की मूल मातृभूमि निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है. संथालों के लोककथाओं में इस बात का दावा किया जाता है कि यह हिहिरी से आए थे, जिसे विद्वानों ने हजारीबाग जिले के अहुरी के रूप में पहचाना किया है. है. अहुरी से उन्हें छोटा नागपुर, फिर झालदा, पटकुम और अंत में साउंट में धकेल दिया गया, जहां वे अच्छे के लिए बस गए. इस बात का उल्लेख कई विद्वानों ने किया है, और इसके प्रमाण के रूप में यह कहा जाता है कि कभी हजारीबाग में संथालों की महत्वपूर्ण उपस्थिति थी.
सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू: स्वतंत्रता सेनानी और संथाल विद्रोह के नायक
पंडित रघुनाथ मुर्मू: ओल चिकी लिपि के आविष्कारक
बाबूलाल मरांडी: झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री
शिबू सोरेन: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री
हेमंत सोरेन: झारखंड के मुख्यमंत्री
द्रौपदी मुर्मू: राजनीतिज्ञ और झारखण्ड की प्रथम महिला राज्यपाल
गिरीश चंद्र मुर्मू: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर
उमा सरेन: 16वीं लोकसभा में सांसद
खागेन मुर्मू: लोकसभा सांसद
बिरबाहा हाँसदा: संथाली, बंगाली और हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री तथा पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री
श्याम सुंदर बेसरा: सिविल सेवक और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक
रथिन किस्कू: गायक
Last updated: 27/11/2021 3:48 am
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