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एयरटेल के मालिक सुनील मित्तल का संक्षिप्त जीवन परिचय

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सुनील मित्तल भारत के एक बड़े बिजनेसमैन और भारती इंटरप्राइजेज के फाउंडर -चेयरमैन हैं. भारती इंटरप्राइजेज का व्यापार टेलीकॉम, इंश्योरेंस, रियल एस्टेट, शिक्षा ,मॉल, हॉस्पिटैलिटी, एग्री और फ़ूड में फैला हुआ है. भारती एयरटेल दुनिया के बड़े टेलीकॉम कंपनियों में से एक है. एयरटेल का कारोबार एशिया और अफ्रीका के 16 देशों में फैला हुआ है और कस्टमर बेस 39 करोड़ है.आइए जानते है एयरटेल के मालिक सुनील मित्तल का संक्षिप्त जीवन परिचय।

प्रारंभिक जीवन-

सुनील मित्तल का पूरा नाम सुनील भारती मित्तल है. मित्तल का जन्म एक पंजाबी परिवार में हुआ. इनके पिता का नाम सत पॉल मित्तल है जो सांसद भी रह चुके हैं. सुनील मित्तल का जन्म 1957 में लुधियाना के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. सुनील मित्तल अपने माता-पिता के दूसरी संतान हैं. सुनील मित्तल के बड़े भाई का नाम राकेश है और छोटे भाई का नाम राजन है.

पिता की भविष्यवाणी-

सुनील मित्तल के पिता ने बचपन में यह भविष्यवाणी कर दी थी यह बच्चा बड़ा होकर के आगे कुछ बड़ा करेगा. इसका कारण था सुनील मित्तल बचपन से ही ज्यादा एक्टिव थे. इसीलिए पिता ने भी उन्हें काफी बढ़ावा दिया.

सुनील मित्तल बचपन से ही बड़े-बड़े सपना देखा करते थे. सुनील मित्तल कहते हैं, “मेरे पास एक बड़ा सपना था. जब मैं स्कूल में था तब भी मैं अपने जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना चाहता था. मुझे विश्वास नहीं था कि वो बड़ी चीज मुझे मिल ही जाएगी.”

शुरुआत, संघर्ष और सफलता-

1969 में पंजाब यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद सुनील मित्तल ने अपने सपनों का पीछा करना शुरू कर दिया.

साइकिल पार्ट्स बेचने और होजरी का काम-

जब सुनील मित्तल केवल 18 साल के थे और कॉलेज से निकले ही थे उन्होंने निश्चय किया कि कुछ शुरुआत किया जाये. उन्होंने अपने पिता से 20000 का लोन लेकर अपना पहला बिज़नेस शुरू किया.

उन दिनों को याद करके सुनील मित्तल कहते हैं, “मैं जानता था कि चीजें मेरे लिए आसान नहीं होगी , जीवन कठिन भी हो सकता है. मेरा पहला बिजनेस साइकिल पार्ट्स बेचने और होजरी का था. शुरुआती दिन काफी कठिन थे. मैं बहुत कम पैसा ही कमा पाया लेकिन मैंने काम जारी रखा. हर दिन रात में सोते समय मैं खुद से कहता था कि अगले दिन पैसा जरूर आएगा.”

सुनील मित्तल का बिजनेस कुछ ऐसा था कि उन्हें काफी यात्रा करनी होती थी. लेकिन जेब में पैसे कम होते थे . ऐसे में कई बार वो सामान के साथ ट्रक में ही यात्रा कर लेते थे.

सुनील कहते हैं, ” हवाई यात्रा का सवाल ही नहीं था. मेरे पास केवल ट्रैन के टिकट के पैसे थे. मुझे छोटे होटल में रहना पड़ता था. मैं 16 से 18 घंटे काम किया करता था. ”

पोर्टेबल जनरेटर सेट इंपोर्ट करने का काम-

काफी मेहनत करने के बावजूद भी बिजनेस उतना आगे नहीं बढ़ पा रहा था जितना मित्तल चाहते थे. उन्होंने दूसरी संभावनाओं पर भी विचार करना शुरू कर दिया. फिर उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया. उन्होंने पोर्टेबल जनरेटर सेट का इंपोर्ट का काम शुरू कर दिया. इसके बाद उनका जीवन बदल गया. वो उस समय के सबसे बड़े जनरेटर सेट इम्पोर्टर्स में गिने जाने लगे.

लेकिन किस्मत का खेल निराला है. 1983 में सरकार ने जेनरेट सेट के इंपोर्ट पर बैन लगा दिया. सुनील मित्तल रातोंरात बिज़नेस से बाहर हो गये. सुनील मित्तल के लिए सबकुछ ठहर सा गया. सुनील मित्तल के लिए एक भारी परेशानी खड़ी हो गई. सबसे बड़ा सवाल था-आगे क्या किया जाये?
तभी एक नई संभावना ने दस्तक दिया.

टेलीकॉम बिजनेस में एंट्री

मित्तल उन दिनों ताइवान में थे. उन्होंने देखा कि पुश बटन फोन ताइवान में काफी पॉपुलर है. जबकि इंडिया अभी भी घुमा कर नंबर डायल किये जाने वाले फोन का ही उपयोग होता था जिसमे स्पीड डाइल, रीडायल जैसे फीचर नहीं थे. संभावनाओं को पहचानते हुए सुनील मित्तल टेलीकॉम बिजनेस में आ गये.

सुनील मित्तल ने Beetel ब्रांड के नाम से टेलीफोन, आंसरिंग/ फैक्स मशीन की मार्केटिंग शुरू कर दी और जल्दी ही कंपनी तरक्की करने लगी.
1993 में जब भारत में टेलीकॉम सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोला गया तब उसमें सुनील मित्तल ने सफलतापूर्वक बोली लगाया . इस तरह से एयरटेल का 7 July ,1995 में जन्म हुआ.

अपनी सफलता पर क्या कहते हैं सुनील मित्तल?

सुनील मित्तल कहते हैं मेरी तरह सभी भाग्यवान नहीं होते. सभी सपने देखते हैं और सपना पूरा करने की कोशिश करते हैं. लेकिन ऐसे कम ही होते हैं जिनका सपना साकार होता है. मेरी कंपनी 15000 करोड़ की है और इसमें 5000 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं. आज भारती प्राइवेट टेलीकॉम सेक्टर का एक बहुत बड़ा प्लेयर है और एयरटेल की सेवाएं 16 देशों में फैली हुई है. अपना सपना साकार कर लेने पर मैं अपने आप को भाग्यवान मानता हूं.”

तिरुपति और वैष्णो देवी में है आस्था-

तिरुपति और वैष्णो देवी में सुनील मित्तल की अटूट श्रद्धा है. मित्तल का कहना है” मुझे दैविय शक्तियों पर पूरी आस्था है. कोई शक्ति है जो मुझे कई बार अच्छे-बुरे वक्त में रास्ता दिखती है, मेरे मन में सकारात्मक विचार पैदा करती है और प्रोत्साहित करती है. मैं नियमित रूप से तिरुपति और वैष्णो देवी जाता हूं.”

2007 में सुनील मित्तल को पदम भूषण से सम्मानित किया गया. यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा सिविलियन अवार्ड है.

Last updated: 30/08/2020 2:27 am

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