History

14 अगस्त 1947 की रात को क्या हुआ था?

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14 अगस्त 1947 की रात भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में दर्ज है, जब भारत और पाकिस्तान ने सदियों की गुलामी झेलने के बाद, एक लंबे संघर्ष के बाद ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी हासिल की थी। ब्रिटिश भारत के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के लिए आजादी की तारीख 15 अगस्त और पाकिस्तान के लिए 14 अगस्त तय की थी। इस लेख में हम 14 अगस्त 1947 की रात को हुए उन निर्णयों और घटनाओं की जाँच करेंगे जिनके कारण भारत को आज़ादी मिली। तो आइए जानते हैं कि 14 अगस्त 1947 की रात को क्या हुआ था?

14 अगस्त 1947 की रात को क्या हुआ था?

आपको आश्चर्य होगा कि ब्रिटिश सरकार ने भारत की आजादी की तारीख 30 जून 1948 तय की थी। लेकिन भारत तय समय से करीब 10 महीने पहले ही आजाद हो गया। ब्रिटिश प्रधान मंत्री क्लेमेंट एइट ने 20 फरवरी, 1947 को घोषणा की कि भारत में ब्रिटिश शासन 30 जून, 1948 तक समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद सत्ता जिम्मेदार भारतीय हाथों में स्थानांतरित कर दी जाएगी। लेकिन ब्रिटिश प्रधान मंत्री की इस घोषणा के बाद मुस्लिम लीग द्वारा एक आंदोलन शुरू किया गया और देश के विभाजन की मांग की गई।

मुस्लिम लीग द्वारा देश के विभाजन की मांग के बाद संभावित अशांति, रक्तपात, दंगे और खून-खराबे की आशंकाएं बढ़ गईं। ‌ माउंटबेटन ने 3 जून 1947 को भारतीय नेताओं से विभाजन की मंजूरी ले ली थी। अब वह जल्दी में थे। बैठक में दोनों पक्षों ने जल्द सत्ता हस्तांतरण पर जोर दिया था। फिर, 3 जून, 1947 को ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि 1946 में गठित भारतीय संविधान सभा द्वारा बनाया गया कोई भी संविधान देश के उन हिस्सों पर लागू नहीं हो सकता जो इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। इसलिए उसी दिन यानी 3 जून 1947 को भारत के वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने विभाजन की योजना सामने रखी, जिसे माउंटबेटन योजना के नाम से जाना जाता है। कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने योजना स्वीकार कर ली। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को लागू करने की योजना तत्काल प्रभाव से लागू की गई।

14-15 अगस्त, 1947 की आधी रात को, ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया, और सत्ता दो नए स्वतंत्र देशो ‌ भारत और पाकिस्तान को हस्तांतरित कर दी गई।
प्रसिद्ध लेखक डॉमिनिक लापिएरे और लैरी कॉलिन्स अपनी पुस्तक ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में 14 अगस्त 1947 के ऐतिहासिक दिन का चित्रण करते हुए लिखते हैं- ‘सैन्य छावनियों, सरकारी कार्यालयों, निजी घरों आदि पर लहराता यूनियन जैक उतारा जाने लगा था। जब 14 अगस्त को सूरज डूब गया, तो यूनियन जैक ने देश भर में अपना ध्वज-स्तंभ त्याग दिया, और चुपचाप भारतीय इतिहास में अतीत की बात बन गया। जिस कमरे में भारत के वायसरायों के भव्य तैलचित्र लगे रहते थे, वहाँ अब अनेक तिरंगे झंडे शान से लहरा रहे थे।”

लेकिन यहां ये बताना भी जरूरी है कि 14 अगस्त की उस आधी रात को भारत में जो हुआ उसने देश का इतिहास और भूगोल बदल दिया। हमें अंग्रेजों की 250 साल की गुलामी से आजादी तो मिल गई, लेकिन जाते-जाते वे हमें बंटवारे का दर्द भी दे गए। 14 अगस्त की रात को भारत दो हिस्सों में बंट गया जिससे लाखों लोग बेघर हो गये। एक तरफ भारत बना और दूसरी तरफ पाकिस्तान बना। बंटवारे के वक्त चारों तरफ हिंसा फैली हुई थी। जिनके साथ हम रहते थे वो ही हमारे दुश्मन बन गए। बंटवारे के इस दर्द ने करीब 10 लाख लोगों की जान ले ली।‌ सीमा के दोनों ओर से लगभग एक करोड़ लोग भारत और पाकिस्तान चले गये। आंकड़ों के मुताबिक उस समय दुनिया के इतिहास में यह लोगों का सबसे बड़ा विस्थापन था।

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