भारत विभिन्न समुदायों और जातियों के समूह से मिलकर बना एक विविधतापूर्ण राष्ट्र है. ये समूह देश भर में अपनी संख्या और वितरण में भिन्न हैं. भारत में जाति और समुदाय संबंधी विविधता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समावेशिता, सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देती है और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती है. इसी क्रम में यहां हम जानेंगे कि भारत में जाटों का प्रतिशत कितना है.
भारत में जाटों का प्रतिशत (Percentage of Jats in India) जानने से पहले हमें इस समुदाय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थितियों के बारे में संक्षेप में जान लेना चाहिए. कहा जाता है कि जाट मूल रूप से सिंध की निचली सिंधु नदी-घाटी के चरवाहे थे, जो मध्ययुगीन काल के अंत में उत्तर की ओर पंजाब क्षेत्र में चले गए. बाद में वे 17वीं और 18वीं शताब्दी में दिल्ली क्षेत्र, उत्तरपूर्वी राजपूताना और पश्चिमी गंगा के मैदान में बस गए. जाटों को एक योद्धा जाति माना जाता है. मध्ययुगीन काल के दौरान, जाटों को मुगलों सहित विभिन्न शासक राजवंशों के आक्रमणों और संघर्षों का सामना करना पड़ा. इन चुनौतियों के बावजूद, जाट उत्तरी भारत के विभिन्न हिस्सों में अपने राज्य और रियासतें स्थापित करने में सफल रहे.
आइए अब इस समुदाय की वर्तमान परिस्थितियों के बारे में जानते हैं. आधुनिक समय में, जाट समुदाय मुख्य रूप से कृषि में लगा हुआ है, हालांकि कई लोग व्यवसाय, राजनीति और सशस्त्र बलों जैसे अन्य व्यवसायों में भी शामिल हो गए हैं. भारत में, जाटों की हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्यों में मजबूत उपस्थिति है. हाल के दिनों में, जाट समुदाय में बदलाव आया है, उच्च शिक्षा प्राप्त करने और गैर-पारंपरिक करियर पथ अपनाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ रही है.
आइए अब इस लेख के मुख्य विषय पर आते हैं और जानते हैं कि भारत में जाट कितने प्रतिशत हैं. प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार “हिंदुस्तान टाइम्स” में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2012 में भारत में जाटों की आबादी 8.25 करोड़ बताई गई थी. एक अन्य प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार “इकोनॉमिक टाइम्स” में प्रकाशित एक रिपोर्ट में, वर्ष 2012 में, भारत की अनुमानित जनसंख्या 123 करोड़ बताई गई थी. इन आँकड़ों के विश्लेषण के आधार पर हम कह सकते हैं कि भारत में जाटों की अनुमानित जनसंख्या 6 से 7% के बीच हो सकती है.
References:
•Asher, Catherine Ella Blanshard; Talbot, Cynthia (2006). India before Europe. Cambridge University Press. p. 269. ISBN 978-0-521-80904-7.
•https://www.hindustantimes.com/delhi/government-turns-focus-on-jat-quota/story-MbwQJZJ5FrE6xNf7CuC1gO.html
•https://m.economictimes.com/news/economy/indicators/indias-population-at-123-crore-as-of-march-2012-minister/articleshow/22139551.cms
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