पटेल नाम सुनते ही आपके दिमाग में आता होगा कि यह एक सरनेम है जो भारत में रहने वाले कई समुदायों द्वारा प्रयोग में लाया जाता है जैसे कोली, कुर्मी, कुछ पारसी और मुसलमान. पारंपरिक रूप से यह उपनाम सामाजिक स्थिति या स्टेटस को संदर्भित करता है और मध्य काल के दौरान गांव के सरदारों द्वारा प्रयोग किया जाता था. लेकिन क्या आप जानते हैं पटेल राजस्व अधिकारियों की सहायता हेतु भारतीय उपमहाद्वीप के ग्रामीण क्षेत्रों में शासन द्वारा नियुक्त किया गया एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सरकारी पद भी है, जो स्थानीय शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं पटेल किसे कहते हैं और इनके क्या कर्तव्य हैं?
पटेल पश्चिम, उत्तर और मध्य भारत में बड़े पैमाने पर भूमि-अभिलेख अधिकारी के लिए उपयोग किया जाने वाला शब्द है. यह शब्द स्थानीय प्राधिकरण (local authority) में एक व्यक्ति को संदर्भित करता है जो एक विशिष्ट क्षेत्र के लिए स्वामित्व रिकॉर्ड (ownership records) रखता है और साथ ही भूमि करों (land taxes) का संग्रह भी करता है. यह वही कर्मचारी हैं जो आपको जमीन-खसरा आदि के बारे में जानकारी देते हैं. यह मूल रूप से ग्राम स्तर पर राजस्व प्रशासन में ग्राम लेखाकार अधिकारी होते हैं.बता दें कि यह पद राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है. वर्तमान में पटेल को लेखपाल के रूप में जाना जाता है. पूर्व में इन्हें पटवारी कहा जाता था. कुछ राज्यों में इन्हें ग्राम पटेल, कारनाम अधिकारी, शानबोगरु आदि के नाम से जाना जाता है. इस पद की शुरुआत 16 वीं शताब्दी में की गई थी.
ग्राम प्रशासन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. ब्रिटिश राज के दौरान अंग्रेजों ने भी इस व्यवस्था को बनाए रखा. एक लेखाकार की भूमिका में पटेल मुख्य रूप से कृषि का रिकॉर्ड रखते थे. हालांकि, मध्यकाल से चली आ रही ग्राम पटेल व्यवस्था वर्ष 2005 के बाद अपना अस्तित्व धीरे-धीरे खोती चली गई. पटेल और कोटवार को प्रशासन का रीढ़ माना जाता है. गांव में होने वाले छोटे-मोटे विवाद व समस्याओं का निराकरण करके शांति कायम रखने में भी दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है. यह प्रशासन के लिए सूचना तंत्र का काम करते हैं. अगर यह ठीक से काम नहीं करे तो प्रशासन के लिए गांव के लोगों को त्वरित सहायता पहुंचाना कठिन हो जाता है.
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि गांव में पटेलों की नियुक्ति कैसे होती है. राजतंत्र के जमाने में ग्राम पटेल वंशानुगत होता था. यानी गांव पटेल का बेटा ही अगला गांव पटेल होता था. किंतु लोकतांत्रिक व्यवस्था आने के बाद इसकी चयन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है. मध्यप्रदेश में भू संहिता अधिनियम,1959 की धारा 222 के अनुसार जिले का जिला कलेक्टर प्रत्येक ग्राम समूह में एक या एक से अधिक पटेलों की नियुक्ति कर सकता है या कलेक्टर के आदेश पर SDO (उपखण्ड अधिकारी) भी पटेल को नियुक्त कर सकता है.
आइए जानते हैं पटेल के मुख्य कर्तव्यों (main duties) के बारे में-
-भू-राजस्व कर या लगान की वसूली करवा कर शासकीय कोषागार में जमा करवाना.
-भूमि-अधिकार परिवर्तन (land-rights changes)
रिकॉर्ड करना.
-उपरोक्त डेटा की तैयारी के लिए लेखांकन
-ग्राम राजस्व लेखा और ग्राम भूमि अभिलेखों को बनाए रखना.
-राजस्व एकत्रित करने में अपने ऊपर के अधिकारियों की सहायता करना.
-राजस्व-संग्रह प्रणाली में सबसे निचले राज्य के कार्यकर्ता के रूप में, उनके काम में कृषि भूमि का दौरा करना और स्वामित्व और जुताई का रिकॉर्ड बनाए रखना.
-कलेक्टर के आदेश पर गांव का रिकॉर्ड प्रस्तुत करना.
-गांव मे किसी ने सरकारी भूमि में अवैध कब्जा कर लिया है ऐसे अतिक्रमण को हटवाना.
-गांव में बनाए गए शासकीय सीमा चिन्हों की सुरक्षा करना.
-ग्राम को साफ रखना.
-वन, शासकीय वृक्षों की रक्षा करना.
-जंगल की या पेड़ों की अवैध कटाई को रोकना.
-ग्राम के कोटवार पर नियंत्रण रखना.
-कलेक्टर द्वारा आदेशित अन्य कार्यों को करना.
-प्रत्येक भूमि स्वामी, पेंशनर, ग्राम अधिकारी की मृत्यु पर उसके वारिसों, उत्तरजीवियों आदि की सम्पूर्ण जानकारी देना .
https://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-nasrullaganj-news-035003-382656-NOR.html
https://www.bhaskar.com/news/latest-amla-news-021501-1899855.html
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