कछवाहा वंश का इतिहास अत्यंत ही गौरवशाली है.
भारत में इस सूर्यवंशी क्षत्रिय राजपूत वंश के शासकों ने जयपुर, अलवर, मैहर, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, और तालचर जैसे कई राज्यों और रियासतों पर शासन किया है. इनका सबसे बड़ा राज्य जयपुर था. लेकिन क्या आप जानते हैं इस ऐतिहासिक वंश के संस्थापक कौन थे? तो आइए जानते हैं, कछवाहा वंश के संस्थापक के बारे मे पूरी जानकारी.
कछवाहा वंश के संस्थापक दुल्हे राय (Dulhe Rai)
थे. इनका वास्तविक नाम तेजकरण (Tej Karan) था.
कछवाहा वंश की स्थापना को समझने से पहले आपको
ढूंढाड़ के बारे में जानना जरूरी है.
ढूंढाड़ (Dhundhar) उत्तर भारत का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है. राजस्थान की सबसे प्राचीन नदियां में एक ढूंढ़ नदी (Dhondh River) थी, जो रियासकाल में ही लुप्त हो गई. लेकिन नदी का बहाव क्षेत्र, मार्ग आज भी सुरक्षित है. जहां-जहां से ढूंढ़ नदी बहती थी, उस क्षेत्र को ढूंढाड़ के नाम से जाना जाता है. ढूंढाड़ को जयपुर क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है. इसे कछावा राज्य, आंबेर राज्य और जयपुर राज्य भी कहा गया है. यह क्षेत्र पूर्व-मध्य राजस्थान में स्थित है, और उत्तर-पश्चिम में अरावली रेंज, पश्चिम में अजमेर, दक्षिण-पश्चिम में मेवाड़ क्षेत्र, दक्षिण में हाड़ौती क्षेत्र और पूर्व में अलवर, भरतपुर और करौली जिलों से घिरा है. इसमें जयपुर के जिले, अरावली रेंज के पूर्व में स्थित सीकर जिले के कुछ हिस्से, दौसा, सवाई माधोपुर और टोंक और करौली जिले का उत्तरी भाग शामिल हैं. यहीं पर 1137 में दूल्हे राय ने कछवाहा वंश की स्थापना की थी. दुल्हे राय ने बड़गुर्जरों को हराने के बाद दौसा पर अधिकार कर लिया. दौसा कछवाहा वंश की प्रथम राजधानी थी. बाद में दुल्हे राय ने मीणा शासकों को पराजित करके रामगढ़ (जयपुर) पर कब्जा कर लिया. दुल्हेराय ने रामगढ़ में कछवाह वंश की कुलदेवी जमुवाय माता के मन्दिर का निर्माण करवाया था. ढूंढाड़ में प्राचीन रामगढ गुलाब की खेती के लिए प्रसिद्ध था, जिसके कारण रामगढ को ‘ ढूढांड़ का पुष्कर ‘ कहा गया है.
Last updated: 03/06/2022 9:56 am
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