बंगाल अपनी अनूठी संस्कृति, सभ्यता, पहनावा, खान-पान, भाषा के लिए जाना जाता है. बंगाल का खाना पूरी दुनिया में मशहूर है. लाखों दिलों पर राज करने वाले रसगुल्ले का आविष्कार बंगाल में ही हुआ था. बंगाल की मिठाई और मछली-चावल पूरी दुनिया में मशहूर हैं. बंगाल में शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजन बड़े चाव से खाए जाते हैं. इसी क्रम में हम यहां जानेंगे कि बंगाली ब्राह्मण मांसाहारी क्यों होते हैं.
पश्चिम बंगाल भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण राज्य है. राज्य में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लोग निवास करते हैं. राज्य में हिंदू बहुसंख्यक हैं लेकिन मुसलमानों की भी अच्छी खासी संख्या है. आमतौर पर माना जाता है कि मुस्लिम समुदाय के लोग मांसाहारी होते हैं. लेकिन बंगाल में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोग भी मांसाहारी व्यंजनों के बड़े शौकीन हैं. भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा प्रकाशित एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 98% से अधिक आबादी मांसाहारी है. इस रिपोर्ट से पुष्टि होती है कि पश्चिम बंगाल में रहने वाले अधिकांश हिंदू मांसाहारी हैं.
बंगाली ब्राह्मणों की बात करें तो परंपरागत रूप से बंगाल क्षेत्र में रहने वाले ब्राह्मणों को बंगाली ब्राह्मण कहा जाता है. आमतौर पर यह माना जाता है कि सभी ब्राह्मण शाकाहारी होते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. बंगाली ब्राह्मण सामिष भोजन करते हैं अर्थात बंगाली ब्राह्मण मांसाहारी होते हैं. बंगाली ब्राह्मण मछली भी खाते हैं और मांस भी. अन्य बंगालियों की तरह माछ-भात इनके भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.
आइए अब हम इस लेख के मुख्य विषय पर आते हैं और जानते हैं कि बंगाली ब्राह्मण मांसाहारी क्यों होते हैं. अन्य ब्राह्मणों की तरह पश्चिम बंगाल के ब्राह्मण भी पुजारी का काम करते आए हैं. पश्चिम बंगाल में शाक्त परंपरा के अनुसार देवी काली के मंदिरों में बकरे और भैंसों की बलि देने की परंपरा रही है. बंगाल में दुर्गा पूजा के लिए मां दुर्गा को मांस की बलि दी जाती है और फिर इसे पका कर खाया जाता है. बंगाल के शक्ति उपासक मांस को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. इसलिए बंगाली ब्राह्मण मांसाहारी होते हैं.
References:
•Hindī-śabdānuśāsana
By Kishoridas Vajpeyi · 1967
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