यादव वंश भारतीय इतिहास के अति प्राचीन वंशों में से एक है. इस वंश का संबंध यदुवंशी क्षत्रियों से है. मान्यताओं के अनुसार, यह पौराणिक चंद्रवंशी राजा यदु के वंशज हैं. इससे पहले हम यादव वंश के बारे में विस्तार से जानें, आइए जानते हैं “वंश” का अर्थ क्या होता है. वंश शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है- बाँस. संस्कृत व्याकरण, संस्कृत-अंग्रेजी कोश, अंग्रेजी-संस्कृत कोश आदि विश्वविख्यात रचनाओं के प्रणेता मोनियर विलियम्स (Sir Monier Monier-Williams) के अनुसार, “वंशम्” शब्द ही कालांतर में “वंश” के अर्थ में विकसित हुआ. वंशम्” शब्द से “वंश शब्द का विकास संभवतः एक बेंत की आवधिक लंबाई (periodic lengths) से प्रेरित है, जहां एक अलग खंड (segment) पिछले का अनुसरण करता है, बढ़ता है, समाप्त होता है और दूसरे का आधार होता है. बाद में, वंश शब्द कुल, परिवार और वंशावली के अर्थ में विकसित हुआ.
आइए अब अपने मूल विषय “यादव वंश” पर आते हैं. पौराणिक राजा ययाति के 5 पुत्र थे- 1. पुरु, 2. यदु, 3. तुर्वस, 4. अनु और 5. द्रुह्मु. महाराज ययाति के ये पांचों पुत्र परम प्रतापी हुए जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी पर राज किया और अपने कुल का दूर-दूर तक विस्तार किया. महाराजा यदु यादव वंश/ यदुकुल के प्रथम सदस्य माने जाते है. यदु के चार पुत्र थे- सहस्त्रजित, क्रोष्टा, नल और रिपुं. यदु के इन पुत्रों से यादव वंश का विस्तार हुआ. इनके वंशज ही कालांतर में यादव या अहीर के नाम से विख्यात हुए. आगे चलकर यदुवंश की अनेक शाखाएं हुईं, इनमें प्रमुख हैं- अंधक, वृष्णि, माधव, हैहय, नंदवंशी, ग्वालवंशी, आदि. यादव वंश के इन प्रमुख शाखाओं के बारे में हम यहां संक्षेप में बता रहे हैं-
यह प्राचीन यादव वंश वृष्णि का वंशज माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, वृष्णि ययाति के पुत्र यदु के वंशज सातवत के पुत्र थे. पुराणों के अनुसार वृष्णि द्वारका के निवासी थे.
सातवत, यादव राजा यदु के वंशज थे. सातवत के पुत्र भीम हुये. भीम ने इक्ष्वाकुओं से मथुरा नगर को पुनः प्राप्त किया. भीम के पुत्र अंधक से इस वंश की उत्पत्ति मानी जाती है. मथुरा अंधक यदुवंशियों की राजधानी थी. इसके नेता उग्रसेन थे.
ग्वालवंशी यादव वंश की एक शाखा है जो भगवान कृष्ण के गोप व गोपियों के वंशज माने जाते हैं.
नंदवंशी कृष्ण के पालक पिता नंद के वंशज माने जाते हैं.
हैहय पांच गणों/कुलों (वितिहोत्रा, शर्यता, भोज, अवंती और टुंडीकेरा) का एक प्राचीन संघ था, जिन्होंने यदु से अपने सामान्य वंश का दावा किया था. हरिवंश पुराण (34.1898) के अनुसार हैहय यदु के परपोते और सहस्रजित के पोते थे.
References;
Soni, Lok Nath (2000). The Cattle and the Stick: An Ethnographic Profile of the Raut of Chhattisgarh (अंग्रेज़ी में). Anthropological Survey of India, Government of India, Ministry of Tourism and Culture, Department of Culture. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-85579-57-3.
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Last updated: 19/02/2023 3:06 pm
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