Ranjeet Bhartiya 08/03/2019

गया जिला भारत के बिहार राज्य में स्थित एक जिला है. बिहार के दक्षिणी भाग में आने वाला यह जिला मगध प्रमंडल के अंतर्गत आता है. गया, मगध प्रमंडल का मुख्यालय भी है. मगध प्रमंडल के अंतर्गत कुल 5 जिले आते हैं- गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल.ये जगह बौद्ध धर्म मानने वाले लोगोंके लिए सबसे पवित्र जगह है.यहाँ स्थित बोधगया में भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्ती हुई थी. हिन्दूओं के लिए ये नगरी तो काफी महत्त्वपूर्ण है.वे यहांं पिंंडदान करने आते है.हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मावलंबियों के लिए पवित्र स्थल होने के कारण यहां देश-विदेश के श्रद्धालु आते हैं. गया जिले में कितने प्रखंड  हैं?गया जिले की पूरी जानकारी.

नामकरण और गठन

इस जिले  के नामकरण के पीछे मान्यता है कि यहाँ भगवान विष्णु ने एक असुर गयासुर का वध किया था. इसीलिए इस स्थान का नाम गया पड़ा.

गठन
3 अक्टूबर 1865 को गया एक स्वतंत्र जिले के रूप में अस्तित्व में आया.

गया जिले की भौगोलिक स्थिति

बाउंड्री (चौहद्दी)
येे जिलाा  झारखंड और बिहार के सीमा पर फल्गु नदी के किनारे बसा हुआ है.
उत्तर में – अरवल , जहानाबाद और नालंदा जिला
दक्षिण में – झारखंड का पलामू , चतरा और हजारीबाग जिला
पूरब में- नवादा जिला
पश्चिम में – औरंगाबाद जिला

क्षेत्रफल
गया जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 4976 वर्ग किलोमीटर है.

प्रमुख नदियां : फल्गु नदी

अर्थव्यवस्था- कृषि ,उद्योग और उत्पाद

गया जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन ,छोटे-मोटे उद्योग और पर्यटन पर आधारित है.

कृषि
इस  जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. यहां उगाए जाने वाले मुख्य फसल हैं: धान, गेहूं, आलू और दलहन.

पशुपालन
पशुपालन जिले के लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण जरिया है. यहां भारी संख्या में गाय , भैंस और सूअर को पाला जाता है.

उद्योग
जिले में तेल मिल ,शुगर फैक्ट्री ,लाह इत्यादि हैं. जिले में भारी संख्या में कुटीर उद्योग है. यहां पर तिलकुट लाय, अगरबत्ती, हैंडलूम और प्लास्टिक इत्यादि का काम होता है.

गया जिले का प्रशासनिक सेटअप

गया जिले के वर्तमान पदाधिकारी 

प्रमंडल: मगध
प्रशासनिक सहूलियत के लिए गया जिले को 4 अनुमंडलों और 24 प्रखंडों में बांटा गया है.

अनुमंडल: इस  जिले के अंतर्गत कुल 4 अनुमंडल हैं: गया सदर, नीमचक बथानी, शेरघाटी और टिकारी.

प्रखंड: गया जिले के अंतर्गत कुल 24 प्रखंड हैं.

गया सदर अनुमंडल में कुल 7 प्रखंड हैं: गया सदर, बोधगया, मानपुर, बेलागंज,फतेहपुर , वजीरगंज और टनकुप्पा.

टिकारी अनुमंडल के अंतर्गत कुल 4 प्रखंड हैं: टिकारी, गुरारू, परैया और कौंच.

नीमचक बथानी अनुमंडल के अंतर्गत कुल 4 प्रखंड हैं:
बथानी, खिजरसराय, अतरी और मोहड़ा

शेरघाटी अनुमंडल के अंतर्गत कुल 9 प्रखंड हैं: शेरघाटी, इमामगंज, डोभी, बाराचट्टी, डुमरिया, अमस, बांकेबाजार, गुरआ और मोहनपुर.

पुलिस थानों की संख्या : 35

नगर निगम : 1,नगर पालिका :1,नगर पंचायत : 2.

ग्राम पंचायतों की संख्या: 332
कुल गांवों की संख्या: 2887

निर्वाचन क्षेत्र
इस जिले के अंतर्गत 1 लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र और 10 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं.

लोक सभा
इस  जिले के अंतर्गत एक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र आता है -गया.

विधानसभा
गया जिले के अंतर्गत कुल 10 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं: गुरआ, शेरघाटी, इमामगंज, बाराचट्टी, बोधगया गया टाउन, टिकारी , बेलागंज, अतरी और वजीरगंज.

गया जिले की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी)

2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार,
कुल जनसंख्या : 43.91 लाख
पुरुष : 22.66 लाख
महिला: 21.24 लाख

जनसंख्या वृद्धि (दशकीय): 26.43%
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किलोमीटर): 883
बिहार की जनसंख्या में अनुपात: 4.22%
लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष) : 937

औसत साक्षरता: 63.67%
पुरुष साक्षरता : 73.31%
महिला साक्षरता: 53.34%

शहरी और ग्रामीण जनसंख्या
शहरी जनसंख्या : 13.24%
ग्रामीण जनसंख्या: 86.76%

धर्म

अधिकारीक जनगणना 2011 के अनुसार, गया एक हिंदू बहुसंख्यक जिला है. जिले में हिंदुओं की जनसंख्या 88.27% है, जबकि मुस्लिमों की आबादी 11.12% है.अन्य धर्मो की बात करें तो जिले में ईसाई 0.09%, सिख 0.02%, बौद्ध 0.02% और जैन 0.04% हैं.

गया जिले के पर्यटन स्थल

विष्णुपद मंदिर

फल्गु नदी के पश्चिमी तट पर स्थित विष्णुपद मंदिर हिंदुओं के लिए एक पवित्र धर्म स्थल है. कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान विष्णु के पद चिन्हों पर किया गया है. यहां बेसाल्ट पत्थरों पर भगवान विष्णु के चरण चिन्ह खुदे हैं. मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के 40 सेंटीमीटर लंबे पांव के निशान हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहीं पर गयासुर नाम के असुर का की छाती पर पैर रखकर वध किया था. पितृपक्ष के अवसर पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्रित होती है.

सूर्य मंदिर

सूर्य मंदिर, प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूरी पर उत्तर में रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. सोन नदी के किनारे स्थित इस मंदिर पर छठ के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.

बोध गया

बोधगया विश्व के प्रमुख एवं पवित्र बौद्ध तीर्थस्थलों में से एक है. यही बोद्धि वृक्ष के नीचे गौतम ने ज्ञान प्राप्त किया जिसके उपरांत उन्हें बुद्ध कहा गया. महाबोधि महाविहार बौद्ध धर्म मानने वाले तीर्थयात्रियों के लिये सबसे पवित्रतम स्थान है. इस मंदिर में के गर्भगृह में भगवान बुद्ध की गोल्ड प्लेटेड प्रतिमा स्थापित है जिसे बंगाल के पाल वंश के राजाओं ने बनवाया था. महाबोधि महाविहार को 27 जून 2002 में यूनेस्को द्वारा “विश्व धरोहर” के तौर पर मान्यता प्रदान किया जा चुका है.

गया जिला
Bodhgaya before restoration

फल्गु नदी

पवित्र फल्गु नदी  जिले के पूर्वी छोर पर बहती है. यह मूलतः एक बरसाती नदी है. साल के अन्य महीनों में यह नदी सूख जाती है. लेकिन थोड़ी सी रेत हटाए जाने के बाद पानी मिल जाता है.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सीता के श्राप के कारण यह नदी अन्य नदियों की तरह जमीन पर नहीं बह कर भूमि अंदर से बहती है. इसीलिए इसे अंतः सलिला कहते हैं.

अक्षय वट

अक्षय वट विष्णुपद मंदिर के पास फल्गु नदी के तट पर स्थित है. ऐसी मान्यता है कि माता सीता ने इस पीपल के पेड़ को अमर होने का वरदान था जिसके कारण इसके पत्ते किसी भी ऋतु में नहीं झड़ते. अपनी दिव्यता की वजह से इसे पूजा जाता है.

सीता कुंड

सीता कुंड विष्णुपद मंदिर के ठीक पीछे फल्गु नदी के तट पर स्थित है. ऐसी मान्यता है कि माता सीता ने अपने ससुर राजा दशरथ का पिंडदान और श्राद्ध कर्म यही पर किया था.

मंगला गौरी

शहर के दक्षिण में एक छोटा पहाड़ पर मंगला गौरी मंदिर स्थित है. मंगला गौरी मंदिर में भगवान शिव की प्रथम पत्नी के रूप में सती देवी की पूजा होती है.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सती की मृत्यु के पश्चात भगवान शिव प्रलयंकारी नृत्य करने लगे. उन्हें शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने देवी सती के शरीर को कई टुकड़ों में काट दिया. देवी सती के शरीर के टुकड़े विभिन्न स्थलों पर गिरे स्थलों पर गिरे जिन्हें शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है.
यहां दो गोल पत्थर हैं जिसे देवी सती के स्तनों का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है.

रामशिला पर्वत

गया शहर के दक्षिणी-पूर्वी छोर पर रामशिला पर्वत एक पवित्र धार्मिक स्थल है. ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने इसी पहाड़ी पर अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था. इसी कारण इस पहाड़ का नाम रामशिला पर्वत पर पड़ा.

प्रेतशिला पर्वत

रामशिला पहाड़ी से लगभग 10 किलोमीटर दूरी पर प्रेतशिला पहाड़ी स्थित है. इसी कुंड में स्नान करने के बाद पिंडदान का कर्म आरंभ होता है.

गया कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग

इस जिले  का अपना एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो इसे भारत के सभी प्रमुख शहरों से जोड़ता है. ये जिला  वायु मार्ग से कोलंबो सिंगापुर इत्यादि कई अंतरराष्ट्रीय सहयोग शहरों से जुड़ा है.नजदीकी हवाई अड्डा: अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (बोधगया एयरपोर्ट, Code: GAY).इसके अतिरिक्त दूसरा नजदीकी हवाई अड्डा जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट (Code: PAT) गया जिले से लगभग 100 किलोमीटर दूर पटना में स्थित है.

रेल मार्ग
रेल मार्ग से आप आसानी से यहाँ  आ सकते हैं . देश के अन्य प्रमुख शहरों से गया के लिए नियमित ट्रेन चलती है.नजदीकी रेलवे स्टेशन: गया जंक्शन (GAYA).

सड़क मार्ग
गया, राज्य और देश के प्रमुख नगरों से शहरों से सड़क मार्ग से अच्छे से जुड़ा हुआ है. यह नेशनल हाईवे 22 (पटना-गया रोड) पर स्थित है. पटना से यहां सड़क मार्ग से 3 घंटे में पहुंचा जा सकता है. आप चाहे तो अपने निजी वाहन कार या बाइक से भी यहां आ सकते हैं.

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