Sarvan Kumar 12/07/2019

हम आज उलझन में हैं किस परिस्थिति में खुश रहा जाए और कब ,दुख हमें यह समझ नहीं आ रहा. हम इस बात से खुश हो जाते कि हमें अच्छी जॉब मिल गई है, अगले ही पल इस बात से बहुत दुखी हो जाते हैं कि हमें जॉब में काफी मेहनत करनी होती है. हमें जॉब से टाइम नहीं मिल पाता हमें पर्सनल कामों के लिए समय नहीं मिलता. तो हम खुश ही इतने क्यों थे. नई जॉब मिलने पर हमने मिठाईयां भी तो बांटी थी। अगर हमें दुखी ही रहना था तो हमने जॉब ही क्यों की थी। कभी- कभी हमें अच्छी जॉब मिलने का घमंड भी हो जाता है पर अचानक कोई दूसरा जिसे हम से ज्यादा अच्छी जॉब है उससे मिलने पर मन दुखी भी हो जाता है। समय बदलता है, परिस्थितियां बदलती है पर दुख नहीं बदलता वो बना ही रहता है. आईये जानते हैं दुख के असली कारण क्या है और दुखों का निवारण कैसे करे?

दुःख का मूल कारण क्या है?

मंदिरों -मस्जिदो में या कोई बाबा- फकीर के पास बढ़ती भीड़ इस बात का इशारा नहीं करते कि हम कितने खुश हैं, यह हमारी दुखों को दर्शाते हैं। जाने हम कितने पैसों को, समय को इन जगहों में बर्बाद कर देते हैं .दुख के कई कारण है अगर इन सारे कारणों एक साथ लिखा जाए तो दुनिया की सबसे मोटी किताब बन जाए । सही करियर नहीं बनाने का दुख तो होता ही है उसके अलावा बहुत सारे दुख होते हैं हमारे पास।जैसे कि अच्छी जीवनसाथी का नहीं होना, अच्छी शक्ल- सूरत नहीं होना, काला होना,  हाइट कम होना , बैंक बैलेंस नहीं होना , अपना घर नहीं होना , बीमार हो जाना , संतान नहीं होना ,वगैरह- वगैरह। कुछ दुख तो अजीब होते हैं जैसे पड़ोसी ने महंगी गाड़ी ले ली, दोस्तों को प्रमोशन मिल गया , इंडिया मैच हार गया इत्यादि -इत्यादि।

इस दुख से है सब परेशान

ऐसा नहीं है कि दुख से बस हम ही परेशान हैं। दुखी होने का इतिहास बहुत पुराना है। जब से यह धरती है तब से ये दुख है. हम छोटे इंसान को ही नहीं, दुख महान बड़ी हस्तियों को भी होता है। विधायक को इस बात का दुख होता है कि वह एमपी नहीं है ? एमपी को इस बात से दुख है कि वह मंत्री कब बनेगा ? मंत्री इस बात से परेशान रहता है कि वह प्रधानमंत्री कब बनेगा? यानि लेवल चेंज होता है पर दुख नहीं बदलता वह बना ही रहता है।
बड़े- बड़े उद्योगपतियों को और पैसे नही बटोरने का दुख होता है। एक लड़का जो अच्छे पैसा कमाता था। आत्महत्या कर लिया । कारण जानने पर पता चला उसकी गर्लफ्रेंड उसको छोड़कर चली गई थी।

दुखों से छुटकारा

दुख से छुटकारा कैसे पाया जाए? क्या दुख के कारणों को मिटाया जा सकता है? क्या ऐसा कोई उपाय है कि दुख आए ही ना। हमे सब वही मिले जैसा हम चाहते हैं पर ऐसा नहीं हो सकता। दुख तो आएगा ही, हम हमेशा अपने मन मुताबिक नहीं जी सकते।
तो क्या हम दुख- सुख की धार में लटके रहे या कुछ ऐसा करें कि हमें किसी भी परिस्थिति में कोई असर ही ना हो। हम पूरी जिंदगी एक ही सुर में गाते रहे और जिंदगी के मजे करते रहे। प्रश्न यह नहीं है कि हमें किन बातों से दुख होता है, असली बात यह है कि हमें ये जानना चाहिए कि हमें किन- किन बातों से सुख मिलता है। दुख के कारणों को ना ढूंढते हुए सुख के कारणों को पता करे तो ज्यादा अच्छा रहेगा ।

खुशियां कैसे आती है

तो चलिए लोगों से पता करते हैं उनको किस-किस बातों से खुशी मिलती है। लोगों से पूछने से यह पता चलता है कि जिस चीज से उन्हे सबसे ज्यादा सुख मिलता है, वह है पैसा और पावर। पैसा और पावर हमें इतना खुशी दे सकता है कि हम सारे गम भूल सकते हैं ज्यादा पैसे से हम खुशी खरीद सकते हैं। अपने जीने के तरीकों को बदल सकते हैं। ज्यादा पैसा आ जाने से हमें पावर भी मिल जाएगा और हमें समाज में इतना सम्मान मिल जाऐगा कि जिंदगी आराम से गुजर जाऐ। बिना पैसों कि हमारी कोई औकात नहीं। बीमार होने पर हमारे पास दो ऑपशन होते हैं। एक यह की सरकारी अस्पताल की लंबी कतार में लगे या महंगे प्राइवेट अस्पताल मे इलाज कराएं। फीवर में तपते बच्चे को लेकर लाइन में खड़े होंगे तो दुख तो होगा ही। जब आपकी खुद की औलाद दुकान के बाहर महंगी चॉकलेट लेने के लिए रोने लगे और आप खरीद न सके तो दुख तो होगा ही। सुबह से उठते- बैठते, सोने तक कई सारे ऐसे परिस्थितियां आती है जो हमें दुखी कर देता है। अगर हमारे पास ढेर सारा पैसा हो तो कुछ इस तरह के दुख से छुटकारा पाया जा सकता है। अब सबसे बड़ी बात ये है की क्या पैसा कमाना इतना आसान है। गरीब मां बाप के घर पैदा होने के बाद भी ,क्या हम करोड़पति ,अरबपति बन सकते हैं।

क्या हम दुख का झूठा रोना रो रहे?

हम हमेशा खुश रहना चाहते हैं और ये जानते हुए भी की बहुत सारी खुशियां सिर्फ पैसों से मिल सकती है हम इसके लिए ज्यादा मेहनत नहीं करते। चाहना अलग बात है और चाहतों को पूरा करना दूसरी बात है। बहुत सारे पैसे कमाने के लिए हमें बहुत मेहनत करनी होगी। हमें दिन रात एक कर के कुछ ऐसा करना होगा कि हमें ज्यादा पैसे मिल सके। क्या हम इतनी मेहनत करना चाहते हैं जबाब होगा नहीं। हम कभी भी कठोर परिश्रम नहीं करना चाहते हैं जिंदगी को हमेशा कंफर्ट जोन में बनाए रखते हैं।अगर हम स्टूडेंट है तो हम इतना ही पढ़ते हैं कि जिस से काम चल जाए। हम दूसरी तरह के मौज -मस्ती करना नहीं छोड़ते। तर्क देते हैं कि क्या ये समय दुबारा मिलेगा? जॉब करते हुए हम संतुष्ट हो जाते हैं कि अब इतना कमा लिया अब और क्या। बचपन से ही हम अपने आप को कंफर्ट जोन में रखते हैं. अब अगर हमें फ्यूचर में सिर्फ पैसों की वजह से दुख होता है तो क्या इसका जिम्मेवार कौन है? क्या हम दुख का झूठा रोना नहीं रो रहे।

पहचाने अपना कैटिगरी

हो सकता है कि हमारा मन संतुष्ट हो गया हो। कोई भी इस तरह के दुख आने पर हम भाग्य को कोस देते हैं, की हमारे भाग्य में यही लिखा था। सैटिस्फ़ैक्शॅन किसी भी कंडीशन में दुखी नही होने देता। सवाल इन लोगों का नहीं है। सवाल उन लोगों का है जो अपने जिंदगी को बेस्ट बनाना चाहते हैं। वे दुनिया में किसी से भी अपने को पीछे नहीं देखना चाहते हैं। इसी जिंदगी में वे कुछ ऐसा करना चाहते हैं की लोग उन्हे याद कर सके। दुख , डिप्रेशन , बेचैनी ऐसे लोगों में ज्यादा होता है। किसी भी कंडीशन में एडजस्ट होने वाले लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता। वह जिंदगी आराम से गुजार लेते हैं। प्रॉब्लम दूसरे तरह के लोगों को होता है जो सेटिस्फाइड नहीं होता उनका सैटिस्फ़ैक्शॅन लेवल काफी ऊंचा होता है। वे जो जिंदगी में कभी बहाने नहीं ढूंढते। वे हर कीमत पर अपने आपको बेस्ट साबित करना चाहते हैं।

हमें  करना होगा काम!

तो मतलब यह है कि आगे बढ़ने के सपने देखो और फिर पूरा ना होने पर डिप्रेशन में चले जाओ। सैटिस्फ़ैक्शॅन हमें मिलेगी नही एडजस्ट हम होंगे नहीं। तो क्या पूरी जिंदगी दुख में काटे नहीं एक समाधान है। कोई भी चाहे जितना पैसा कमाना चाहते हो कमा सकता है। बस हमें काम करना होगा। वह भी ढेर सारा काम।

मुख्य काम को नहीं बनाऐ पार्ट टाइम

अब सवाल ये है की क्या हम 24 घंटे अपने पेस में काम कर सकते हैं। हमें काम करने से बहुत कुछ रोकता है। हम उन कारणों को ढूंढते हैं जो हमें काम करने से रोकता हैं। सबसे पहले तो हमें ये पता करना की हम किस कैटेगरी में बिलॉन्ग करते हैं। अगर हमें लगता है कि हम एडजस्ट होने वालो में नहीं है तो हमें सब कुछ भूलाकर काम करना होगा। काम कर बहुत ऊपर जाने के लिए काफी डिटरमिनेशन होना चाहिए। जैसे की हमें एक्टर बनना है तो इसके लिए हमें क्या करना होगा तो एक्टर बनने के लिए हम ऐसे एक्टिंग सीखनी होगी हमें काफी प्रैक्टिस करनी होगी पर हम यह जानते हुए कि यही प्रोफेशन हमेशा कुछ दे सकता है हम इसको पार्ट टाइम बना देते हैं हम कुछ और करने के साथ साथ एक्टिंग सीखने को पार्ट टाइम आने दे देते हैं। चाहिए होता है कि हम इधर या उधर कहीं के नहीं रहते और दुख के पात्र बन जाते हैं।

रहे अपने विचारों पर दृढ़

उन लोगों की बात अलग है जिनके पैरंट उन्हें सपोर्ट करते हैं। जिनके पैरंट्स अपने बच्चों को सपोर्ट नहीं करते उनको काफी प्रॉब्लम हो  जाता  है। वो वही करते हैं जिससे उनके पैरंट्स खुश रखे। वे अपनी सोच को मार देते हैं। जब उन्हें एहसास होता है ये  मैंने क्या कर दिया तब तक देर हो जाती है। जिंदगी जीने लायक नहीं रह जाता। सपनों को अधूरा देख गम में पड़ जाते हैं। हमें एक अडिग  फैसला लेना होगा। यह जिंदगी हमारी है और जिंदगी में वही होगा जैसा हम चाहते हैं। कोई भी खराब परिस्थिति हमें अपने सपनों में रंग भरने से नहीं रोक सकता। हम वही करेंगे जैसा हमारा दिमाग कहेगा। दूसरे के  विचार हमें  दबा नहीं सके इसके लिए हमें हमारे खुद के विचारों को दृढ़ कनाना होगा। हर वक्त,  यह भी सही है, वह भी सही है ऐसा कहने वाला आदमी कभी खुशी से  काम नहीं कर पाएगा। वो जो सोचता है वही सही है ऐसी सोच उसे उसको अपने रास्ते से नहीं भटका पाएगा। हम पूरी मेहनत से काम कर पाएंगे।

लाइफ में बनाऐ एक गोल!

एक गोल को ही ध्यान में रखते हुए उस पर आगे बढ़ते रहे। दौड़ना  जरूरी है पर किस डायरेक्शन में यह ज्यादा जरूरी है। बिना डायरेक्शन आग बढने से हमें कुछ हासिल नहीं होने वाला। हमारा एक पक्का गोल होना बहुत जरूरी है। हम कभी-कभी काम करते हुए थक सकते हैं बोर हो सकते हैं तो हमें घबराना नहीं चाहिए। थोड़ा आराम कर हमें फिर से काम करना चाहिए। जिंदगी शायद एक ही बार मिलती है और एक ही जिंदगी में हमें क्या-क्या देखना होता है। जिंदगी के हर मोड़ पर हमें कुछ लोग ऐसे मिल जाते हैं जो हमें लुक डाउन करते हैं। हम अगर छोटे कॉलेज में है तो कोई बड़े कॉलेज वाले हमें आंख  दिखाते हैं। अगर हम कोई छोटे पद पर होते हैं तो बड़े पद वाले लोग हमें हमारी औकात दिखाते हैं । अब यहां पर दो बातें होती है हम यह मान ले कि हमारी यही वैल्यू है, हम उससे आगे नहीं जा सकते, यह  मानकर पूरी जिंदगी घुटन में रहे। पागल मन नहीं मानता। हम किसी भी कंडीशन में अपने आप को पीछे देखना नहीं चाहते। ऐसे मेंं हम डिप्रेशन में चले जाते हैं जहां पछताने के सिवाय कुछ नहीं रह जाता। देखा जाए तो इस कंडीशन के हम खुद ही रिस्पांसिबल है। हमने जिंदगी को अपने मन मुताबिक क्यों शेप नहीं दिया हो सकता।

सपने को हकीकत में बदलने का होना चाहिए जुनून

हो सकता  है कि हमें सही इंफ्रास्ट्रक्चर  नहीं मिला हो। वह सारी चीजें नहीं मिली जो हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए चाहिए। एक बात जो हममें  है वह है जुनून।  जुनून कुछ करने की, जुनून आगे बढ़ने की। हो सकता है कि कुछ समय निकल गया हो पर  हम अभी से शुरुआत कर सकते हैं। हम  कोई मंजिल को छूना चाहते हैं और वह हमसे बहुत दूर है वो और हमें नहीं मिला तो उसका मतलब कि है की  हमने सही से काम ही नहीं किया।

 

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