Sarvan Kumar 05/04/2019
जाट गायक सिद्धू मूसेवाला आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा बनी रहेगी। अपने गानों के माध्यम से वह अमर हो गए हैं । सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को मानसा जिले में उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या किसने और किस वजह से की यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन हमने जाट समाज का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके फैंस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। jankaritoday.com की टीम के तरफ से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 10/04/2019 by Sarvan Kumar

पुराना किला इतिहास जानने के बाद ये पता चलता है कि यहां पहले पांडवों की नगरी इंद्रप्रस्थ थी. कोई बात ना बनते देख पांडवों ने कौरवों से 5 गांव मांगे थे इसके मना करने के बाद ही महाभारत युद्ध छिड़ गया था. बहुत लोगों का मानना है कि दक्षिणी दिल्ली का पुराना किला वास्तव में पहले इंद्रप्रस्थ ही था. इंद्रप्रस्थ इन 5 गांव में से एक था. आइए जानते हैं  पुराना किले की पूरी जानकारी.

पुराना किला पश्चिमी दरवाजा
पुराना किला पश्चिमी दरवाजा(बड़ा दरवाजा) Main Entrance

पुराना किला के इंद्रप्रस्थ होने के प्रमाण

महाभारत काल का समय लगभग 1100 – 2000 ईसा पूर्व था.
कौरवों और पांडवों के बीच राज सिंहासन को लेकर काफी मतभेद था. धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन, योग्य और अपने से बड़े भाई युधिष्ठिर को हस्तिनापुर की गद्दी नहीं देना चाहते थे.धृतराष्ट्र ने इस मामले को शांत करने के लिए युधिष्ठिर को यमुना नदी के किनारे विरान खांडवप्रस्थ दे दिया. पांडवों ने अपने मेहनत और देवताओं की मदद से विरान खांडवप्रस्थ को खूबसूरत नगरी में बदल दिया. विद्वानों का मत है की ये खूबसूरत नगरी पुराना किला के जगह पर ही थी. आइए देखते हैं कुछ प्रमाण जो ये साबित करती है कि वास्तव में पुराना किला इंद्रप्रस्थ पर ही बना है.

प्रमाण I: मिट्टी के पात्र

1955 में यहां एक खुदाई की गई थी. यह जगह किले का दक्षिणी पूर्वी भाग था. इस खुदाई के बाद जो कुछ मिला वह हैरान कर देने वाला था. यहां पर मिट्टी के पात्र मिले. जब इन पात्रों को मिलान किया गया तो बिल्कुल वैसा ही था जैसे दूसरे महाभारत काल के जगहों से मिला है. इन पात्रों को अभी भी आप यहां के म्यूजियम में देख सकते हैं. गहरे भूरे रंग की यह बर्तन दूसरे महाभारतकालीन जगह जैसे हस्तिनापुर, मथुरा, कुरुक्षेत्र इत्यादि में भी देखे गए.

पेंटेड ग्रे वेयर कल्चर( Painted grey ware culture) है महाभारतकालीन पहचान

महाभारत बस सिर्फ एक ग्रंथ भर नहीं है ये साबित करने के लिए कई पुरातत्वेदी, इतिहासकार वर्षों से काफी प्रयास कर रहे हैं. इन लोगों ने यह निष्कर्ष निकाला कि महाभारतकालीन लोग एक विशेष तरह के मिट्टी के बर्तन प्रयोग करते थे. इस कल्चर को उन्होंने पेंटेड ग्रे वेयर कल्चर नाम दिया है. जिन जगहों पर ऐसे बर्तन पाए गए उन जगहों को महाभारतकालीन बताया गया. उल्लेखनीय बात यह है कि पुराना किला में खुदाई के दौरान ऐसे ही बर्तन पाए गए.

प्रमाण II: इंद्रप्रत गांव के निशान

पूराना किले के बाहर लगी सूचना पट्टी
किले के बाहर लगी सूचना पट्टी

आरकेलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) का कहना है कि इस जगह के आस पास 1913 तक इंद्रप्रत नाम का गांव था .अंग्रेजों ने इसे दिल्ली को बसाने के दौरान  उजाड़ दिया. गौररतलब बात यह है इंद्रप्रत , इंद्रप्रस्थ का ही अपभ्रंश नाम है.

प्रमाण III : पांडवों द्वारा मांगे गए पांच गांव में से एक, पुराना किला से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

पांडवों ने जो 5 गांव मांगे थे उनके नाम हैं पानीपत (प्राचीन पणप्रस्थ) सोनीपत(सोणप्रस्थ), बागपत(व्याग्रप्रस्थ) इंद्रप्रत( इंद्रप्रस्थ ,दिल्ली पुराना किला) और तिलपत(तिलप्रस्थ).
इंद्रपत तो 1913 ईस्वी तक देखे गए लेकिन यहां से 22 किलोमीटर दूरी पर तिलपत गांव अभी भी मौजूद है. इन सभी जगहों पर पेंटेड ग्रे वेयर कल्चर( गहरे भूरे रंग के मिट्टी के बर्तन)पाया गया है. पानीपत, तिलपत और सोनीपत अभी हरियाणा में है और बागपत उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित है.महाभारत ग्रंथ में लिखे गए ज्योग्राफिकल एरिया अभी भी वैसे के वैसे हैं. यह साबित करते हैं कि महाभारत सिर्फ एक ग्रंथ भर नहीं है.

प्रमाण IV: दीनपनाह आंतरीक किले के जगह पर थी पहले से ही कोई छोटा किला.

भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के प्रथम डायरेक्टर-जनरल अलेक्जेंडर कनिंघम अनुसार : जब हुमायूं ने अपने नगर दीनपनाह (पुराना किला इसी नगर का हिस्सा है) की नींव रखी थी, तो उस जगह पर पहले से ही एक किला था. अब प्रश्न यह उठता है कि वह किला वहां क्यों थी. क्या यह किला ही इंद्रप्रस्थ किला था.

विद्वानों में है मतभेद

बहुत से इतिहासकार और विद्वान पुराना किला इतिहास  को इंद्रप्रस्थ से जोड़ कर देखना एक ख्याली पुलाव ही समझते हैं. उनका यह कहना है की पेंटेड ग्रे वेयर कल्चर महाभारत काल से कोई संबंध नहीं है और इसका प्रयोग बहुत आगे तक भी होते रहे. तर्क चाहे जो भी हो तथ्यों का विश्लेषण कर यह समझा जा सकता है कि पुराना किला के जगह पर वास्तव में ही इंद्रप्रस्थ नगरी था.

पुराना किला इतिहास के कुछ और महत्वपूर्ण और रोचक बातें

हुमायूं और पुराना किला

मुगल बादशाह हुमायूं ने 1533 ईस्वी में  यमुना नदी के किनारे दीनपनाह नगर की आधारशिला रखी थी. जहां पर अभी पुराना किला है वहां पर हुमायूं के दीनपनाह नगर की राजधानी थी. दीनपनाह नगर में कई गांव बसे थे जैसे कि इंद्रप्रत, रायसिना और मालचा गांव. ऐसा कह सकते हैं कि जिस जगह पर अभी पुराना किला है वो जगह दीनपनाह नगर की आंतरिक किला थी.

शेरशाह और पुराना किला? पुराना किला किसने बनवाया था?

पुराना किला जो अभी आप देखते हैं इसका निर्माण शेरशाह ने किया था .1540 कन्नौज की लड़ाई में शेरशाह सूरी ने हुमायूं को बुरी तरह परास्त कर दिया था.उसके बाद शेरशाह का आगरा और दिल्ली पर अधिकार हो गया था . शेरशाह ने पुराने दीनपनाह तोड़कर अपनी नई नगर शेरगढ बनाई. शेरशाह का शासन काल 1540 -1545 वर्ष तक रहा.शेरसाह का मकबरा आप बिहार के रोहतास जिले में देख सकते हैं.

शेरगढ़ कितने एरिया में फैला था?

करीब 35 ऐकर में शेरगढ़, उत्तर में फिरोज शाह कोटला से शुरू होकर दक्षिण के निजामुद्दीन दरगाह तक फैला था. पुराना किला इसी शेरगढ़ का हिस्सा है। पुराना किला को ऊंची जगह पर बनाई गई थी इसके चारों ओर पानी से भरी खंदक थी.

पुराने किले की चहारदीवारी कितनी ऊंची है?

किले को दुश्मनों से बचाने के लिए चारों ओर 18 मीटर ऊंची दीवार खड़ी की गई थी. यह दीवार आज भी देखने को मिलती है. पुराने किले के अंदर ही इंद्रप्रत गांव बसी थी।

हुमायूं ने खोया हुआ साम्राज्य वापस पाया

1540 -1555 ईसवी यानी कि लगभग 15 वर्ष हुमायूं भटकता रहा. इधर 22 मई 1945 को शेरशाह की दुर्घटनावश मृत्यु हो गई. शेरशाह की मृत्यु के बाद उसके बेटे जलाल खा( इस्लाम शाह) ने गद्दी संभाली. 22 नवम्बर 1554 को इस्लाम शाह की भी मृत्यु हो गई. मौका का फायदा उठाते हुए हुमायूं ने सुरी साम्राज्य के खिलाफ हमला बोल दिया. 23 जुलाई 1955 को उसने अपना खोया साम्राज्य वापस पा लिया. साम्राज्य वापस मिलने के बाद हुमायूं ने पुनः किले के अंदर कई सारे निर्माण करवाएं.

पुराने किला की बनावट(आर्किटेक्चर)कैसी है

1.इसकी दीवार 18 मीटर ऊंची है.

2.लगभग 2.4KM परिधि में फैली हुई हैं.

3.किले में तीन गेट बनाए गए जिनके नाम थे बड़ा दरवाजा (पश्चिमी दरवाजा), हुमायूं गेट( दक्षिणी दरवाजा) और तलाकी गेट(उत्तरी दरवाजा).

4.किले में अंदर जाने के लिए आजकल पश्चिमी दरवाजा प्रयोग में लाया जाता है.

5.तीनों दरवाजे के दोनों और बुर्ज बने हैं.

6.दो मंजिला संरचना वाली यह प्रवेश द्वार के दोनों तरफ बुर्ज होने के साथ-साथ झरोखा और स्तंभ युक्त मंडप भी है.

पुराने किला के अंदर क्या क्या देखने लायक चीजें हैं.

शेरमंडल

शेरमंडल

इस अष्टकोणीय 2 मंजिले भवन को हुमायूं ने बनवाया था। हुमायूं इसको पुस्तकालय के रूप रूप में प्रयोग में लाता था. इसी भवन से गिरने के बाद हुमायूं जख्मी हो गया था और कुछ ही दिनों में उसकी मृत्यु हो गई थी. ये दोपहर का समय हो रहा होगा, हुमायूं किताब लिए सीढ़ियों से चल रहे थे, तभी अजान की आवाज सुनाई देती है. धार्मिक प्रवृत्ति के हुमायूं अजान के स्वर सुनते ही नीचे झुकते हैं. उनका पैर लंबे चोगे में फंस जाता है और वह नीचे गिर पड़ते हैं.

किला -ए – कुहना मस्जिद

किला- ए -कुहना -मस्जिद सूचना पट्टी

इस मस्जिद का निर्माण शेरशाह ने करवाया था .हालांकि यह स्पष्ट नहीं है की शेरशाह ने इसे पूरी तरह बनवाया था या इसके कुछ भाग को ही बनवाया था. जो भी हो इस मस्जिद प्रयोग  शेरशाह खुद और दूसरे शाही परिवार ही करता था.

पुराना किला म्यूजियम

इस किले के अंदर एक म्यूजियम भी है. यहाँ पुराना किला इतिहास  से जुड़ी  कई चीजें देखने को मिलेगी. इसमें आप किले के अंदर खुदाई से निकले चीजों को देख सकते हैं. ये चीजें मौर्य, शुंग और शक- कुशान पीरियड के हैैं.

पुराना किला घूमने कब जाए?  क्या है टिकट प्राइस?

अगर आप पुराना किला इतिहास  को ज्यादा नजदीक से समझना चाहते हैं तो आप यहाँ आ सकते हैं.

पुराना किला कहाँ है?

पुराना किला दक्षिणी दिल्ली में स्थित है. ये मथुरा रोड पर दिल्ली जू (Delhi Zoo) के नजदीक है.

नजदीकी रेलवे स्टेशन

हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन है. आप यहाँ मेट्रो रेेेेलवे से भी आ सकते हैं. सबसे नजदीकी  मेट्रो स्टेशन प्रगति मैदान  और खान मार्केट है.

समय:  7 am- 5 pm

टिकट प्राइस

इंडियन विजिटर्स के लिए टिकट प्राइस ₹20 है लेकिन विदेशी पर्यटकों के लिए ₹200 है.

टिकट प्राइस और टाइमिंग अपडेट होते रहते है, जाने से पहले इन्हें कंफर्म जरूर करें

 

 

 

 

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